उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की सुरक्षा और व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रशासन ने हाईटेक तकनीक का उपयोग शुरू कर दिया है।
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मंगलवार को शिप्रा नदी के राणोजी की छत्री पर अत्याधुनिक ड्रोन का लाइव डेमो किया गया। इसमें चेन्नई, दिल्ली और गुरुग्राम की विशेषज्ञ कंपनियों ने अपने आधुनिक ड्रोनों की उड़ान क्षमता और तकनीकी विशेषताओं का डेमो दिया।
इस डेमो के दौरान आईजी उज्जैन राकेश गुप्ता, संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, डीआईजी नवनीत भसीन और एसपी प्रदीप शर्मा थे। उन्होंने ड्रोनों की तकनीक का बारीकी से देखा। डेमो में ड्रोनों में लंबी दूरी तक रियल टाइम निगरानी करने की क्षमता थी।
इनके माध्यम से शिप्रा नदी के घाटों, मेला क्षेत्र, मुख्य सड़कों और आसपास की गलियों की लाइव तस्वीरें सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचाई गईं। अधिकारियों को बताया गया कि भीड़ बढ़ने, रास्ता बाधित होने या किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचाई जा सकती है, जिससे त्वरित कार्रवाई होगी।

डेमो के दौरान संभाग आयुक्त आशीष सिंह और अन्य अफसर।
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ 2028 में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इतने बड़े आयोजन में इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के साथ ड्रोन तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। डेमो में कैथोड और नॉन-कैथोड दोनों प्रकार के ड्रोन प्रदर्शित किए गए।
इनमें कुछ ड्रोन 8 किलोमीटर तक तेज गति से उड़ान भरकर निगरानी कर सकते हैं, जबकि अन्य में पब्लिक एड्रेस सिस्टम (पीए सिस्टम) लगा है, जिससे मौके पर ही भीड़ को आवश्यक निर्देश दिए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त, कुछ ड्रोन आपातकालीन राहत और बचाव कार्यों में भी सहायक होंगे।
एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ड्रोनों की उड़ान क्षमता, कैमरे की गुणवत्ता और अन्य तकनीकी सुविधाओं का गहन परीक्षण किया गया है।
इस परीक्षण के परिणामों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि सिंहस्थ में कितने और किस प्रकार के ड्रोन तैनात किए जाएंगे।
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