महू के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) अपना सहयोग देगा। यह पहला मौका होगा जब सिंहस्थ जैसे किसी वृहद जन समूह वाले आयोजन में भार…और पढ़ें

HighLights
- सिंहस्थ 2028 में पहली बार भारतीय सेना का सहयोग
- उज्जैन सिंहस्थ में सेना की हाई-टेक तकनीक का पहरा
- सेना की तकनीक और AI कैमरों से होगी पूरी निगरानी
उदय प्रताप सिंह, इंदौर। दो साल बाद उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में उज्जैन में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा पुलिस व प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगा। इस चुनौती को हल करने में महू के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) अपना सहयोग देगा। यह पहला मौका होगा जब सिंहस्थ जैसे किसी वृहद जन समूह वाले आयोजन में भारतीय सेना अपना सहयोग देगी।
सिस्टम उपलब्ध करवाएगा एमसीटीई महू
गौरतलब है कि नवंबर 2025 में प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग और एमसीटीई, महू के बीच अनुबंध हुआ था। इसके बाद दो दौर की बैठके हो चुकी है। इसमें एमसीटीई ने सिंहस्थ में अपनी और से भीड़ प्रबंधन व अपराध प्रबंधन के लिए तकनीक देने पर सहमति दी थी। अब सितंबर में उज्जैन में तीसरे दौर की होने वाली बैठक में प्रदेश सरकार व एमसीटीई, महू के प्रतिनिधियों के बीच इस पर विस्तृत चर्चा होगी।
एमसीटीई, महू के पास ये है तीन महत्वपूर्ण तकनीक
- व्हीकल रिग्नाइजेशन सिस्टम: एआइ पर आधारित इस सिस्टम के माध्यम से किसी भी वाहन का नंबर से उसकी पहचान पता की जा सकती है। एमसीटीई के सिस्टम में देश के सभी वाहनों का डेटा बेस उनकी जानकारी है। ऐसे में सिंहस्थ क्षेत्र में किसी संदिग्ध वाहन के दिखाई देने पर पांच से सात सेकेंड में उस वाहन की पहचान हो सकेगी। उस क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे वाहन के नंबर को रीड कर नेशनल डेटा बेस से मिलान करेगे। इससे पता चल जाएगा कि वाहन का मालिक कौन, किस कार्य में वाहन का उपयोग होता है और उसके पास किस तरह का परमिट है।
- फेस रिक्गनाइजेशन सिस्टम: एमसीटीई ने ऐसा सिस्टम तैयार किया है जिसमें देश-विदेश के सभी अपराधियों का डेटा फीड है। इसके अलावा इस सिस्टम में इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म जैसे फैसबुक व एक्स पर मौजूद लोगों की जानकारी उपलब्ध है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति विशेष के फोटो को इस सिस्टम में डालते ही उसकी सारी जानकारी व कुंडली सामने आ जाएगी।
सेना की अलग-अलग यूनिट चेक पोस्ट चेकिंग में कर रही इस्तेमाल
महू एमसीटीई द्वारा तकनीक रुप से तैयार किए गए इन सिस्टम का उपयोग महू में सेना अपने चेकपोस्ट पर जांच में इस्तेमाल कर रही है। एमसीटीई द्वारा तैयार हुए इस सिस्टम को भारतीय सेना की अलग-अलग इकाईयों का द्वारा भी सुरक्षा जांच में उपयोग किया जा रहा है।
प्रयागराज सिंहस्थ में इस तरह सुरक्षा का सिस्टम हुआ था उपयोग
प्रयागराज सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए निजी एजेंसियों की सेवाएं ली गई थी। यहां पर एआइ संचालित फेशियल रिकग्निशन तकनीक का उपयोग किया गया था। इससे संदिग्ध व अपराधियों की पहचान में उपयोग किया गया था। नौ प्रमुख रेलवे स्टेशन पर 100 से अधिक फेशियल रिकग्निशन कैमरे लगाए गए थे। वही एआई और स्मार्ट सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम से भीड़ नियंत्रण का कार्य किया गया।
प्रयागराज में पूरे मेला परिसर में 2,700 से अधिक एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। ये कैमरे किसी भी घाट या मार्ग पर भीड़ की संख्या का लाइव विश्लेषण करते थे। जैसे ही किसी निश्चित स्थान पर तय सीमा से अधिक भीड़ जुटती है, सिस्टम तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देता है।
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एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र भी तैयार हुआ था। यहां पर सभी कैमरों की लाइव फीड को मुख्य व्यूइंग सेंटर्स से जोड़ा गया था। ऐसे रियल टाइम में मेले की निगरानी हुई थी। उज्जैन में अभी इस तरह का कंट्रोल कमांड सेंटर बनाने की कवायद की जा रही है।
एमसीटीई की तकनीक का करेंगे उपयोग
सिंहस्थ में सुरक्षा के लिए एमसीटीई महू द्वारा उपलब्ध करवाई जाने वाली तकनीक पर हम उनके साथ चर्चा करेंगे। साइबर सुरक्षा व सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा वाली तकनीक का भी हम उपयोग करेंगे।- आशीष सिंह, कमिश्नर उज्जैन संभाग
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