सिविल-जज बनने के लिए 3 साल की प्रैक्टिस जरूरी नहीं:सुप्रीम कोर्ट ने नियम बदले; 2027 से सर्टिफिकेट, ट्रेनिंग और क्लर्कशिप भी करनी होगी

सिविल-जज बनने के लिए 3 साल की प्रैक्टिस जरूरी नहीं:सुप्रीम कोर्ट ने नियम बदले; 2027 से सर्टिफिकेट, ट्रेनिंग और क्लर्कशिप भी करनी होगी

सिविल-जज बनने के लिए 3 साल की प्रैक्टिस जरूरी नहीं:सुप्रीम कोर्ट ने नियम बदले; 2027 से सर्टिफिकेट, ट्रेनिंग और क्लर्कशिप भी करनी होगी


सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनने के लिए वकीलों की अनिवार्य प्रैक्टिस टाइम तीन साल से घटाकर एक साल कर दिया है। कोर्ट ने 2025 के उस फैसले में बदलाव किया है, जिसमें शुरुआती ज्यूडीशियल सर्विस में भर्ती के लिए तीन साल की प्रैक्टिस जरूरी की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने यह निर्देश दिए। जस्टिस चंद्रन ने फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि बार में तीन साल की प्रैक्टिस जरूरी करने वाले पुराने फैसले पर दोबारा विचार करने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि एक अप्रैल 2027 के बाद होने वाले सिविल जज (जूनियर डिवीजन) एग्जाम के हर उम्मीदवार के पास कम से कम 1 साल की प्रैक्टिस होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को संबंधित हाईकोर्ट से सलाह लेकर तीन महीने के भीतर लागू सेवा नियमों में बदलाव करने और उन्हें नोटिफाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट बोला- प्रैक्टिस सर्टिफिकेट और रिकॉर्ड जरूरी फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कैंडिडेट की प्रैक्टिस को ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ के जरिए वैरिफाई किया जाएगा। यह सर्टिफिकेट तभी जारी होगा, जब उम्मीदवार की कोर्ट में मौजूदगी, कोर्ट की कार्यवाही में भागीदारी का रिकॉर्ड दर्ज हो। कोर्ट ने कहा- रिव्यू किए जा रहे फैसले को सुनाए हुए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। इसलिए ट्रांजिशन पीरियड के लिए लॉ ग्रेजुएट 3 साल की प्रैक्टिस शर्त के बावजूद एप्लाई कर सकेंगे। इसके लिए उम्मीदवारों को एक साल की प्रैक्टिस कम्पलीट किया माना जाएगा। हालांकि प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस की शर्त को पूरी तरह खत्म नहीं किया है। लेकिन इसका तरीका बदला है। बेंच ने कहा कि जज बनने वाले आवेदक को अदालती कामकाज की पर्याप्त समझ होना जरूरी है। थर्ड ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन केस का भी जिक्र सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन केस का भी जिक्र किया। उस मामले में कोर्ट ने 3 साल की प्रैक्टिस की शर्त हटा दी थी। लेकिन नई भर्ती के लिए एक से 2 साल की ट्रेनिंग की सिफारिश की थी। कोर्ट ने 2025 के फैसले से वकीलों को हुई परेशानी का भी जिक्र किया। इनमें वे वकील शामिल थे, जिन्होंने नियम बदलने के समय अपनी कानूनी पढ़ाई पूरी कर ली थी या कर रहे थे। 20 साल तक नए लॉ ग्रेजुएट बिना पहले से तय प्रैक्टिस टेन्योर के ज्यूडीशियल सर्विस में जा सकते थे। 2025 के फैसले में एग्जाम के लिए भी 3 साल की प्रैक्टिस जरूरी कर दी गई थी। जस्टिस चंद्रन मत अलग, 3 साल प्रैक्टिस की शर्त को सही ठहराया जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने बेंच उस फैसले से असहमति जताई, जिसमें तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त बदली गई है। उन्होंने कहा कि पुराना फैसला तीन जजों की बेंच का सोच-समझकर दिया गया फैसला था और उस पर दोबारा विचार करने का कोई आधार नीहीं है। उनके मुताबिक न्यायिक सेवा में आने वाले वकीलों के लिए बार का अनुभव जरूरी है। पढ़िए जस्टिस चंद्रन के कमेंट्स… जस्टिस चंद्रन ने ट्रेनिंग व्यवस्था का भी विरोध किया जस्टिस चंद्रन ने बेंच की तरफ से तय की गई ट्रेनिंग व्यवस्था का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि एक साल की प्रैक्टिस वाले उम्मीदवारों को ट्रेनिंग और क्लर्कशिप में 2 और साल लगाने होंगे। इससे सैलरी पर असर पड़ सकता है। रेगुलर सर्विस में एंट्री में देरी हो सकती है। उम्मीदवारों की अलग-अलग कैटेगरी के लिए एक जैसी या अलग ट्रेनिंग व्यवस्था लागू करना भी चिंताजनक है। ज्यादातर हाईकोर्ट बार में अनुभव की जरूरत के पक्ष में थे। केवल एकेडमिक क्वालिफिकेशन मुकदमेबाजी की असली परिस्थितियों के अनुभव की जगह नहीं ले सकती। उन्होंने कहा, “पूरे सम्मान और गहरे अफसोस के साथ मैं असहमति जताता हूं। मेरे विचार में सोच-समझकर दिए गए फैसले पर दोबारा विचार की कोई गुंजाइश नहीं है।” पांच साल बाद योजना की समीक्षा होगी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नई योजना को हमेशा के लिए तय व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह योजना फैसले की तारीख से 5 साल तक लागू रहेगी। पांच साल बाद भर्ती की गुणवत्ता, ट्रेनिंग और क्लर्कशिप की उपयोगिता, न्यायिक अधिकारियों के प्रदर्शन और बाकी आंकड़े कोर्ट के सामने रखे जाएंगे। जरूरत पड़ने पर फिर रिव्यू किया जा सकता है।

Source link
#सवलजज #बनन #क #लए #सल #क #परकटस #जरर #नहसपरम #करट #न #नयम #बदल #स #सरटफकट #टरनग #और #कलरकशप #भ #करन #हग

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *