उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो चुकी है। 403 विधानसभा सीटों वाले प्रदेश में हर सीट का अपना अलग राजनीतिक इतिहास है। कुछ सीटें किसी खास पार्टी के गढ़ के तौर पर जानी जाती हैं, तो कुछ ऐसी सीटें हैं जहां दशकों से एक ही परिवार का प्रभाव देखने को मिलता है। इटावा जिले की जसवंतनगर विधानसभा सीट भी ऐसी ही सीट है, जहां 1985 से मुलायम सिंह यादव परिवार का दबदबा कायम है।
जसवंतनगर की सियासत की कहानी सिर्फ चुनावी जीत-हार की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक विरासत की कहानी है, जिसकी शुरुआत मुलायम सिंह यादव से हुई और बाद में उनके छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव ने उसे आगे बढ़ाया। दोनों भाइयों ने अलग-अलग दौर में इस सीट का प्रतिनिधित्व किया और लंबे समय से जसवंतनगर सीट को यादव परिवार की मजबूत राजनीतिक जमीन बनाए रखा।
पहले जानते हैं जसवंतनगर विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला इटावा है। इटावा जिले में कुल 3 विधानसभा सीटें हैं। इनमें- इटावा, जसवंतनगर और भरथना शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम इटावा जिले की जसवंतनगर विधानसभा सीट की बात करेंगे। इटावा जिले की जसवंतनगर विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आ गई थी। यहां पहला चुनाव 1957 में ही हुआ था। यहां से पहले विधायक चौधरी अभय राम सिंह यादव बने थे, जिन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। यह विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव के परिवार का प्रमुख गढ़ मानी जाती है। 1967 से लेकर अब तक (केवल 1969 और 1980 के चुनाव को छोड़ दें) तो इस सीट पर लगातार यादव परिवार का ही वर्चस्व रहा है।