आर्थिक तंगी के कारण बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ जैविक मां की ओर से उसे गोद दिया जाना अपने आप में इस बात का आधार नहीं हो सकता कि बच्चा बेचा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट का आदेश खारिज कर दिया। अदालत ने हैदराबाद की बाल कल्याण समिति को नाबालिग बच्चे की कस्टडी उन दो लोगों को सौंपने का निर्देश दिया, जिन्हें रिकॉर्ड में उसका दत्तक माता-पिता बताया गया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने मोहम्मद अकबर और अन्य की अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। मामला तब सामने आया था, जब बच्चे को बाल कल्याण समिति ने इस संदेह में अपनी कस्टडी में लिया कि उसकी जैविक मां ने उसे अकबर और उनकी पत्नी को बेच दिया था।
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