सुप्रीम कोर्ट बोला- फॉर्म-6 पर हमने कोई फैसला नहीं दिया:न हमारे सामने आया, न मंजूर किया ना ही नामंजूर किया; बिहार SIR पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट बोला- फॉर्म-6 पर हमने कोई फैसला नहीं दिया:न हमारे सामने आया, न मंजूर किया ना ही नामंजूर किया; बिहार SIR पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट बोला- फॉर्म-6 पर हमने कोई फैसला नहीं दिया:न हमारे सामने आया, न मंजूर किया ना ही नामंजूर किया; बिहार SIR पर सुनवाई


बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान इस्तेमाल हुए नए फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्थिति स्पष्ट कर दी है। कोर्ट ने कहा कि उसने नए फॉर्म-6 पर कोई न्यायिक फैसला नहीं दिया है। इससे फॉर्म-6 को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच बिहार SIR से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने की बात कही है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा, “नए फॉर्म-6 पर कोई न्यायिक फैसला नहीं हुआ है। बिहार SIR मामले की सुनवाई के समय नए फॉर्म-6 का मुद्दा अदालत के सामने था ही नहीं।” इससे पहले 5 अक्टूबर को भी सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग याचिका पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि उसने SIR में इस्तेमाल हो रहे फॉर्म-6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। शब्दों को चुन-चुन कर इस्तेमाल न करेंः CJI जस्टिस बागची ने कहा कि नए फॉर्म 6 पर कोई फैसला नहीं हुआ है। मंजूरी मिली है या नहीं, जब बिहार पर फैसला हुआ था, तब नया फॉर्म 6 कोर्ट के सामने नहीं था। वहीं सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कृपया न्यूज आइटम के लिए शब्दों को चुन-चुनकर इस्तेमाल न करें। जस्टिस बागची ने कहा कि नए फॉर्म 6 पर कोई फैसला नहीं हुआ है। CJI ने यह कहा था कि जब बिहार SIR मामले में फैसला सुनाया गया था, तब नया फॉर्म 6 मौजूद नहीं था। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंज़ूरी दी है या मंजूरी नहीं दी है। दरअसल, चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में मई 2026 के बिहार SIR संबंधी फैसले का हवाला देते हुए फॉर्म-6 के घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट से बरकरार रखे जाने की बात कही थी। सोमवार की सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि नए फॉर्म-6 पर उसने कोई न्यायिक निर्णय नहीं दिया है। क्या है फॉर्म 6 और किस बात पर है विवाद फॉर्म 6 भारत में मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला लीगल आवेदन है। इसे कोई भी नागरिक नया वोटर बनने के लिए भरता है। या जो किसी और जगह से शिफ्ट होकर आए हैं, वो अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरते हैं। मौजूदा विवाद ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में जोड़े गए एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर है, जिसमें आवेदक या उसके माता-पिता के साथ दादा-दादी का किसी पिछली मतदाता सूची में नाम होने के बारे में जानकारी मांगी गई। विपक्ष ने उठाए सवाल विपक्ष का आरोप है कि यह घोषणा-पत्र संसद की मंजूरी के बिना जोड़ा गया है, जो कानूनी तौर पर गलत है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर किसने यह बदलाव करने का आदेश दिया। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने भी इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘अनधिकृत’ बताया था। बाद में चुनाव आयोग ने उन राज्यों में यह घोषणा हटा दी, जहां SIR पूरा हो चुका है, लेकिन जहां अभी चल रहा है, वहां यह अभी भी बरकरार है। “किसी भी मतदाता का नाम ना छूटे’ चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, बिहार राज्य के 38 मतदाता विवरण अधिकारियों (डीईओ) ने यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय अभियान शुरू किया है कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से न छूटे। इसके लिए राज्य के 90,712 बूथों पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति को कोई शिकायत है, तो 90,712 बीएलओ, 2,976 एईआरओ, 243 ईआरओ या 38 डीईओ में से किसी को भी सूचित कर सकते हैं।

Source link
#सपरम #करट #बल #फरम6 #पर #हमन #कई #फसल #नह #दयन #हमर #समन #आय #न #मजर #कय #न #ह #नमजर #कय #बहर #SIR #पर #सनवई

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *