गांवों तक स्मार्टफोन, इंटरनेट और डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने निशाने बदल लिए हैं। यही वजह है कि मध्य प्रदेश पुलिस ने…और पढ़ें

HighLights
- डिजिटल बैंकिंग, डीबीटी और यूपीआइ के विस्तार के साथ बढ़ी नई चुनौती
- डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने निशाने बदल लिए हैं
- मध्य प्रदेश पुलिस ने अपने राज्यव्यापी साइबर जागरूकता अभियान सेफ क्लिक 2.0 को शहरों से आगे बढ़ाकर 50 हजार से अधिक गांवों तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। एक समय था जब साइबर अपराध को मुख्यतः शहरों की समस्या माना जाता था। ऑनलाइन बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट आधारित ठगी के मामले महानगरों और बड़े शहरों से सामने आते थे, लेकिन डिजिटल क्रांति ने अब ग्रामीण भारत की तस्वीर भी बदल दी है। गांवों तक स्मार्टफोन, इंटरनेट और डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने निशाने बदल लिए हैं। यही वजह है कि मध्य प्रदेश पुलिस ने अपने राज्यव्यापी साइबर जागरूकता अभियान सेफ क्लिक 2.0 को शहरों से आगे बढ़ाकर 50 हजार से अधिक गांवों तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियान के शुभारंभ अवसर पर साइबर खतरों को अदृश्य दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश लिंक, डीपफेक, ओटीपी धोखाधड़ी और आनलाइन ठगी जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
गांवों की बदलती डिजिटल दुनिया
पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन का दायरा तेजी से बढ़ा है। किसान सम्मान निधि, पेंशन, छात्रवृत्ति, मनरेगा भुगतान और अन्य सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। किराना दुकानों से लेकर छोटे व्यापारियों तक यूपीआइ भुगतान का उपयोग बढ़ा है। बैंकिंग सेवाओं के लिए अब गांवों के लोग भी मोबाइल एप और डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्मार्टफोन अब केवल बातचीत का साधन नहीं रहा, बल्कि बैंक, बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच का प्रमुख माध्यम बन चुका है। हालांकि इस बदलाव के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है। तकनीक का उपयोग बढ़ा है, लेकिन उसके जोखिमों और सुरक्षा उपायों की जानकारी अभी भी सीमित है।
बदल रहे हैं ठगी के तरीके
साइबर अपराधी अब केवल शहरों के लोगों को निशाना नहीं बना रहे। वे बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या योजना प्रतिनिधि बनकर फोन करते हैं। कभी केवाईसी अपडेट कराने, कभी सब्सिडी दिलाने और कभी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से बैंकिंग जानकारी और ओटीपी हासिल करने का प्रयास किया जाता है। फर्जी लिंक, निवेश योजनाएं और लॉटरी के झांसे भी ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं।
गांव-गांव तक पहुंचेगा अभियान
मध्य प्रदेश पुलिस का सेफ क्लिक 2.0 अभियान 24 जून से 8 जुलाई तक प्रदेश के 10 संभाग, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांवों में चलाया जा रहा है। अभियान के तहत पंचायतों, स्कूलों, बैंकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताए जाएंगे। हेल्पलाइन नंबर 1930 और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की जानकारी भी दी जाएगी।
सावधानी के पांच सूत्र
- किसी को भी ओटीपी, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी न दें।
- अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- डराने या लालच देने वाली कॉल पर तुरंत भरोसा न करें।
- साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
- परिवार के बुजुर्गों और युवाओं को भी साइबर सुरक्षा की जानकारी दें।
केस स्टडी: ई-चालान के नाम पर 1.8 लाख की ठगी
- स्थान: अंजनिया कलां गांव, खंडवा जिला
- पीड़ित: 28 वर्षीय अर्थमूवर चालक जितेंद्र गौर
- तरीका: वाट्सएप पर आरटीए ई-चालान का एपीके फाइल भेजी गई।
- फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक हो गया।
- साइबर ठगों ने बैंक खाते से 1.8 लाख रुपये निकाल लिए।
- यह राशि उसने परिवार और बच्चों के भविष्य के लिए बचाकर रखी थी।
Source link
#सफ #कलक #परदश #म #हजर #गव #तक #पहचय #ज #रह #जगरकत #अभयन


