सेहत की बात:परिवार में किसी को डायबिटीज या कैंसर है तो आपको कितना खतरा? कब हो जाएं अलर्ट – Does Disease Run In Family Know Genetic Diseases Risk And How To Prevent

सेहत की बात:परिवार में किसी को डायबिटीज या कैंसर है तो आपको कितना खतरा? कब हो जाएं अलर्ट – Does Disease Run In Family Know Genetic Diseases Risk And How To Prevent

दुनियाभर में तेजी से बढ़ती बीमारियों के लिए मुख्यरूप से लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी को जिम्मेदार माना जाता रहा है। पर क्या आप जानते हैं कि अगर आपकी दिनचर्या और खानपान ठीक है तो भी आपमें कुछ बीमारियों का खतरा हो सकता है। आपमें कई बीमारियों का आनुवांशिक जोखिम भी हो सकता है जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह देते हैं। परिवार में किसी बीमारी की हिस्ट्री सुनते ही सबसे पहले दिमाग में यही सवाल आता है कि कहीं ये बीमारी मुझे भी तो नहीं हो जाएगी? 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, घर में करीबी रिश्तेदार या माता-पिता में किसी बीमारी होने से आपका जोखिम जरूर बढ़ जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बीमारी आपको निश्चित रूप से होगी। परिवार में बीमारी का असर दो तरह से हो सकता है। पहला, कुछ बीमारियों के पीछे सीधे आनुवंशिक बदलाव हो सकते हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते हैं। और दूसरा परिवार के लोगों में एक जैसी जीवनशैली, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और पर्यावरण होने के कारण भी कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

आइए जान लेते हैं कि किन बीमारियों का खतरा अधिक होता है?




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आनुवंशिक बीमारियों का खतरा
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आनुवंशिक बीमारियों का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई अध्ययनों में पाया गया है कि अगर माता-पिता, भाई-बहन को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग या कैंसर रहा है तो इसका दूसरे लोगों में भी खतरा हो सकता है।

  • अगर परिवार में कम उम्र में कुछ लोगों को बहुत हाई कोलेस्ट्रॉल रहा है या हार्ट अटैक हुआ है, तो इसके खतरे को लेकर बाकी लोगों को भी सावधान रहना चाहिए।
  • कुछ आनुवंशिक बीमारियों में जोखिम काफी स्पष्ट होता है। अध्ययनों में पाया गया है कि BRCA1 और BRCA2 आनुवंशिक बदलाव वंशानुगत स्तन और अंडाशय कैंसर सिंड्रोम से जुड़े हैं। वहीं लिंच सिंड्रोम में कोलोरेक्टल और कुछ दूसरे कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।


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कोलेस्ट्रॉल की समस्या
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परिवार में बीमारी होने का मतलब क्या बाकी सदस्यों को भी खतरा है?

परिवार में किसी करीबी सदस्य को कैंसर, हृदय रोग या डायबिटीज जैसी बीमारी होने पर दूसरे सदस्यों को अलर्ट हो जाना चाहिए। अपने डॉक्टर को इसकी जानकारी दें, वे आपकी शारीरिक स्थिति को देखकर खतरे का पता लगाने के लिए जांच की सलाह दे सकते हैं।

 

  • फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया एक आनुवंशिक स्थिति है जिसमें बैड कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा हो सकता है। इससे कम उम्र में कोरोनरी हार्ट डिजीज और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है। 
  • अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक हुआ हो या किसी सदस्य का बैड कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा रहता हो, तो दूसरे सदस्यों को भी डॉक्टर से मिलकर जांच करा लेनी चाहिए।


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ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम
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BRCA1/BRCA2 से जुड़े कैंसर

BRCA1 और BRCA2 जीन में कुछ आनुवंशिक बदलाव स्तन और अंडाशय के कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते हैं। ऐसे बदलाव होने पर कुछ कैंसर का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में बढ़ सकता है। अगर आपके परिवार में किसी को कम उम्र में स्तन कैंसर, अंडाशय का कैंसर रहा है तो दूसरी महिलाओं को भी अलर्ट हो जाना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जीन में बदलाव होने पर कैंसर होना निश्चित नहीं माना जा सकता।  डॉक्टर जेनेटिक काउंसलिंग और जरूरत के अनुसार आनुवंशिक जांच की सलाह दे सकते हैं ताकि अगर  जोखिम है तो स्क्रीनिंग जल्दी शुरू की जा सके।


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डायबिटीज का खतरा
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डायबिटीज का जोखिम

अगर माता-पिता या भाई-बहन को टाइप-2 डायबिटीज है, तो आपके इस बीमारी की चपेट में आने का जोखिम बढ़ सकता है। परिवार में डायबिटीज होने पर केवल जीन ही जिम्मेदार नहीं होते, बल्कि खान-पान की आदतें, शारीरिक गतिविधि और वजन जैसे कारक भी खतरा बढ़ाने वाले माने जाते हैं।

अच्छी बात यह है कि कुछ सावधानियां बरतकर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, वजन बढ़ने न देना और समय-समय पर शुगर की जांच से जोखिम को कम करने या बीमारी की जल्द पहचान करने में मदद मिल सकती है। 

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।


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