स्पेस में कोई एस्ट्रोनॉट क्राइम करे तो कौन देगा सजा, अंतरिक्ष में किसका कानून?

स्पेस में कोई एस्ट्रोनॉट क्राइम करे तो कौन देगा सजा, अंतरिक्ष में किसका कानून?

स्पेस में कोई एस्ट्रोनॉट क्राइम करे तो कौन देगा सजा, अंतरिक्ष में किसका कानून?

अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत अगर कोई एस्ट्रोनॉट स्पेस में कोई गैर-कानूनी काम करता है, तो उस पर मुकदमा चलाने का पहला अधिकार उसके अपने देश का होता है. यानी अपराधी जिस देश का पासपोर्ट धारक है, वही देश अपने नागरिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा.

अगर अमेरिका का नागरिक कोई जुर्म करता है तो अमेरिकी अदालतें और अगर रूस का नागरिक गलती करता है तो रूसी कानून के तहत मामला दर्ज किया जाता है. अंतरिक्ष स्टेशन में हर हिस्से यानी मॉड्यूल का रजिस्ट्रेशन अलग-अलग देशों के नाम होता है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में जिस देश ने अपना मॉड्यूल लगाया है, उस हिस्से में उसी देश का कानून प्रभाव में रहता है.

अगर अमेरिका का नागरिक कोई जुर्म करता है तो अमेरिकी अदालतें और अगर रूस का नागरिक गलती करता है तो रूसी कानून के तहत मामला दर्ज किया जाता है. अंतरिक्ष स्टेशन में हर हिस्से यानी मॉड्यूल का रजिस्ट्रेशन अलग-अलग देशों के नाम होता है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में जिस देश ने अपना मॉड्यूल लगाया है, उस हिस्से में उसी देश का कानून प्रभाव में रहता है.

इस व्यवस्था को रजिस्ट्रेशन का नियम कहा जाता है. अगर अंतरिक्ष में हुए किसी अपराध में पीड़ित व्यक्ति किसी दूसरे देश का नागरिक है, तो मामला और संवेदनशील हो जाता है.

इस व्यवस्था को रजिस्ट्रेशन का नियम कहा जाता है. अगर अंतरिक्ष में हुए किसी अपराध में पीड़ित व्यक्ति किसी दूसरे देश का नागरिक है, तो मामला और संवेदनशील हो जाता है.

ऐसी स्थिति में पीड़ित का देश आरोपी के खिलाफ अपनी अदालतों में केस चलाने या फिर आरोपी के प्रत्यर्पण की मांग कर सकता है. अगर आरोपी का देश कार्रवाई करने में आनाकानी करता है, तो पीड़ित देश अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रास्तों और अंतर-सरकारी समझौतों के जरिए न्याय की मांग कर सकता है.

ऐसी स्थिति में पीड़ित का देश आरोपी के खिलाफ अपनी अदालतों में केस चलाने या फिर आरोपी के प्रत्यर्पण की मांग कर सकता है. अगर आरोपी का देश कार्रवाई करने में आनाकानी करता है, तो पीड़ित देश अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रास्तों और अंतर-सरकारी समझौतों के जरिए न्याय की मांग कर सकता है.

अंतरिक्ष में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए साल 1967 में आउटर स्पेस ट्रीटी बनाई गई थी. यह अंतरराष्ट्रीय कानून का मुख्य ढांचा है. इसके तहत अंतरिक्ष पूरी मानवता की साझी धरोहर है.

अंतरिक्ष में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए साल 1967 में आउटर स्पेस ट्रीटी बनाई गई थी. यह अंतरराष्ट्रीय कानून का मुख्य ढांचा है. इसके तहत अंतरिक्ष पूरी मानवता की साझी धरोहर है.

कोई भी देश चांद, तारों या किसी भी खगोलीय पिंड पर अपना झंडा गाड़कर मालिकाना हक या संप्रभुता का दावा नहीं कर सकता है. इसके साथ ही अंतरिक्ष में परमाणु हथियार या जनसंहार के हथियार ले जाने पर पूरी तरह पाबंदी है.

कोई भी देश चांद, तारों या किसी भी खगोलीय पिंड पर अपना झंडा गाड़कर मालिकाना हक या संप्रभुता का दावा नहीं कर सकता है. इसके साथ ही अंतरिक्ष में परमाणु हथियार या जनसंहार के हथियार ले जाने पर पूरी तरह पाबंदी है.

अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और स्टेशन के संचालन के लिए आईएसएस इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) लागू किया गया है. यह समझौता अमेरिका, रूस, जापान, कनाडा और यूरोपीय संघ के देशों के बीच एक कानूनी ढांचा तैयार करता है.

अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और स्टेशन के संचालन के लिए आईएसएस इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) लागू किया गया है. यह समझौता अमेरिका, रूस, जापान, कनाडा और यूरोपीय संघ के देशों के बीच एक कानूनी ढांचा तैयार करता है.

इसके तहत अंतरिक्ष में होने वाली किसी भी आपराधिक गतिविधि, संपत्ति के नुकसान या अनुशासनहीनता से निपटने के लिए पहले आपसी सहमति से जांच की जाती है, जिसके बाद संबंधित देश का न्याय विभाग कार्रवाई तय करता है.

इसके तहत अंतरिक्ष में होने वाली किसी भी आपराधिक गतिविधि, संपत्ति के नुकसान या अनुशासनहीनता से निपटने के लिए पहले आपसी सहमति से जांच की जाती है, जिसके बाद संबंधित देश का न्याय विभाग कार्रवाई तय करता है.

Published at : 09 Aug 2026 05:55 PM (IST)

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