
पोर्टल से नहीं जुड़े थे धर्मकांटे, कोर्ट ने पूछा- रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं की?
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक खेडकऱ ने पक्ष रखते हुए बताया कि सभी खदान संचालकों ने अपने क्रशर क्षेत्र के निकास द्वार पर कांटा लगा रखा था, हालांकि इनमें से कोई भी आधिकारिक पोर्टल से ङ्क्षलक या इंटीग्रेटेड नहीं था। इस पर अदालत ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि जब मुख्य आरोप ही अत्यधिक उत्खनन और ट्रकों में ओवरलोङ्क्षडग का है, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने इन धर्मकांटों का रिकॉर्ड जब्त क्यों नहीं किया? हाईकोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर को इस संबंध में स्पष्ट और विशिष्ट जवाब पेश करने का आदेश दिया है।
कलेक्टर से इन बिंदुओं पर मांगा जवाब
<कोर्ट ने कहा, मामले का मूल विवाद लंबित कारण बताओ नोटिसों को लेकर है। कलेक्टर को निर्देशित किया कि वे रोजाना सुनवाई कर एक माह में अंतिम निराकरण करें।
<याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कई खदान संचालकों पर आरआरसी जारी होने के बाद भी वे खनन कर रहे हैं और वसूली नहीं की गई। कोर्ट ने कलेक्टर को जारी सभी आरआरसी का ब्योरा और उन्हें निष्पादित करने की तय समय सीमा पेश करने के निर्देश दिए।
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