हाईकोर्ट में ग्वालियर नगर निगम की पोल खुली:  जिस सड़क की सैंपलिंग होनी थी, निगम ने रातों-रात खोदी और बना दी नई परत – Gwalior News

हाईकोर्ट में ग्वालियर नगर निगम की पोल खुली: जिस सड़क की सैंपलिंग होनी थी, निगम ने रातों-रात खोदी और बना दी नई परत – Gwalior News

हाईकोर्ट में ग्वालियर नगर निगम की पोल खुली:  जिस सड़क की सैंपलिंग होनी थी, निगम ने रातों-रात खोदी और बना दी नई परत – Gwalior News


ग्वालियर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। दरअसल, जिस सड़क से जांच कमीशन को सैंपलिंग करना था, नगर निगम ने जांच से ठीक पहले उसकी ऊपरी परत खुदवाकर नई सड़क बनाना शुरू कर दिया। मामले की भनक लगते ही हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय को चैंबर में तलब किया। निगमायुक्त द्वारा कोर्ट में दिखाए गए वीडियो व साक्ष्यों को देखने के बाद जस्टिस जीएस अहलूवालिया व जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बेंच ने सख्त निर्देश दिए हैं। कहा है कि कमिश्नर अपने मोबाइल से कोई भी वीडियो, फोटो या व्हाट्सएप चैट डिलीट नहीं करेंगे, ऐसा करने पर फोन जब्त कर लिया जाएगा। एक फीट गहराई के नीचे से लिए जाएंगे सैंपल याचिकाकर्ता के वकील अवधेश सिंह तोमर ने कोर्ट में फोटो-वीडियो पेश कर खुलासा किया कि 19 अगस्त को सड़क नंबर 7 (बेटी बचाओ चौराहा से गुड़ा गुड़ी का नाका) की सैंपलिंग तय थी, लेकिन निगम ने उसकी ऊपरी परत उखाड़कर निर्माण शुरू कर दिया। क्या सरकारी काम व्हाट्सऐप पर करने की अनुमति है? निगमायुक्त ने कोर्ट को बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद उन्होंने कार्यपालन यंत्री को व्हाट्सएप पर गड्ढे भरने के निर्देश दिए थे। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकारी काम व्हाट्सएप के जरिए कराने की अनुमति है? और जब सालभर से सड़क खराब थी, तो सैंपलिंग तय होते ही बिना कोर्ट की अनुमति के मरम्मत क्यों शुरू कराई गई? सैंपलिंग का नया तरीका निगमायुक्त द्वारा यह स्वीकार करने पर कि 1 फीट गहराई तक सड़क खोद दी गई है, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सैंपलिंग करते समय ऊपर की 1 फीट परत को छोड़कर उसके नीचे से ही सैंपल लिया जाएगा। साथ ही, निगम के रवैये को देखते हुए सैंपलिंग 20 की जगह 19 अगस्त को ही कराने के आदेश दिए गए। ‘जनता त्रस्त अधिकारी मस्त’ नाम से निगमायुक्त के फोन में पहले से था वीडियो सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाली बात भी सामने आई कि निगमायुक्त सड़क की बदहाली से पहले से वाकिफ थे। उनके मोबाइल में एक वीडियो मिला, जिसका टाइटल था “जनता त्रस्त अधिकारी मस्त, बीते एक साल से बेटी बचाओ चौराहे के पास की सड़क की स्थिति बदहाल, आम जन परेशान, जिम्मेदारों ने आंखों पर बांध रखी पट्टी।” यह वीडियो खुद निगमायुक्त ने निगम के वकील को भेजा था। कोर्ट ने दर्ज किया कि जब कमिश्नर के पास यह वीडियो पहले से था और वे स्थिति से अवगत थे, तो सैंपलिंग तय होते ही अचानक सड़क को खोदकर नया बनाने का खेल क्यों रचा गया। डीपीआर छिपाई तो अफसरों पर होगी अवमानना की कार्रवाई गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हर स्थान से कुल 84 सैंपल लिए जाएंगे। प्रत्येक स्थान के चार सैंपल ग्वालियर एसएसपी कार्यालय की मोहर वाले मोम से सील होंगे। एक सैंपल पीडब्ल्यूडी टेस्टिंग लैब और दूसरा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा लैब भेजा जाएगा। तीसरा सैंपल जिला न्यायालय के मालखाने में सुरक्षित रहेगा (ताकि क्रॉस चेक किया जा सके) और चौथा नगर निगम के पास रहेगा। नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को संबंधित सड़क की मूल डीपीआर और मेजरमेंट बुक देनी होगी। रिकॉर्ड छिपाने या बाढ़/आग का बहाना बनाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत अवमानना की कार्रवाई होगी।

Source link
#हईकरट #म #गवलयर #नगर #नगम #क #पल #खल #जस #सडक #क #सपलग #हन #थ #नगम #न #रतरत #खद #और #बन #द #नई #परत #Gwalior #News

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *