अगस्त से अक्तूबर के महीने में देश के अधिकतर राज्यों में मच्छर जनित रोगों का बढ़ा हुआ प्रकोप देखा जाता रहा है। हालिया रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से दिल्ली से लेकर गुजरात और तमिलनाडु तक डेंगू और मलेरिया का खतरा देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए निरंतर उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।
क्या आप जानते हैं कि मच्छरों के काटने से सिर्फ डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां ही नहीं होती हैं? कई बार ये आपके शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया का खतरा भी बढ़ा सकती है? मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में ये खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है।
आइए जानते हैं कि मच्छरों के काटने से एनीमिया का खतरा कैसे बढ़ जाता है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है?

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एनीमिया की दिक्कत
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मलेरिया रोगियों में एनीमिया का खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मलेरिया के शिकार कई लोगों में समय के साथ एनीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
- मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है, मलेरिया प्लास्मोडियम नामक परजीवी से संक्रमित मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से फैलता है।
- मलेरिया का परजीवी खून में रेड ब्लड सेल्स पर अटैक करता है। ये कोशिकाएं शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं।
- जब मलेरिया के कारण लाल रक्त कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं, तो इससे शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता जिससे एनीमिया की स्थिति पैदा हो सकती है।
- गंभीर मामलों में मरीज को बहुत ज्यादा कमजोरी, सांस फूलने और दिल की धड़कन तेज होने जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।

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रेड ब्लड सेल्स डैमेज होने की समस्या
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शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई होने लगती है कम
मलेरिया के परजीवी चूंकि लाल रक्त कोशिकाओं को डैमेज करके हीमोग्लोबिन का स्तर कम कर देते हैं, जिसके कारण मरीज को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
- हीमोग्लोबिन का काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के बाकी हिस्सों तक पहुंचाना है। जब इसकी मात्रा कम होने लगती है, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऐसे में रोगी को थकान, चक्कर-कमजोरी, सांस फूलने और दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- अगर एनीमिया गंभीर हो जाए, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

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गर्भावस्था में मलेरिया की समस्या
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किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मलेरिया वैसे तो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन पांच साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं में गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। बार-बार होने वाला मलेरिया एनीमिया की समस्या को बढ़ा सकता है। गर्भावस्था में मलेरिया मां और बच्चे, दोनों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए मलेरिया के लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो मलेरिया के शिकार सभी लोगों को एनीमिया की दिक्कत नहीं होती है, पर कुछ स्थितियां इसका खतरा बढ़ाने वाली हो सकती हैं। यही कारण है कि एनीमिया की समस्या से बचने के लिए मलेरिया के लक्षणों पर ध्यान देना और इसका इलाज कराना जरूरी है।
- मलेरिया के शुरुआती लक्षणों में बुखार, ठंड लगने, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान की दिक्कत होती है।
- वहीं एनीमिया होने पर त्वचा या आंखों के पीला पड़ने, चक्कर आने और सांस फूलना जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
अगर बुखार के साथ बहुत ज्यादा कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, आंखों या त्वचा में पीलापन बेहोशी या दौरे पड़ने जैसे लक्षण हों, तो तुरंत अस्पताल जाकर खून की जांच कराएं।

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मलेरिया से बचाव कैसे करें?
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मलेरिया से बचाव कैसे करें?
मच्छरों के काटने से बचाव वाले उपाय आपको मलेरिया और इसके कारण होने वाली गंभीर समस्याओं से बचा सकते हैं।
- मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। मलेरिया के मच्छर रात के समय में ज्यादा काटते हैं।
- मच्छर भगाने वाली क्रीम या अन्य सुरक्षित रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
- बुखार आने पर खुद से मलेरिया की दवा या आयरन सप्लीमेंट न लें। जांच कराकर डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज करें।
- मलेरिया का समय पर इलाज होने पर गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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