
नई व्यवस्था लागू होने के बाद शस्त्र विक्रेताओं को हर खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करना होगा। इससे पता चल सकेगा कि किस लाइसेंसधारक ने कब, कहां से और कितने कारतूस खरीदे। कारतूसों के उपयोग से संबंधित रिकॉर्ड को भी निगरानी व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। शस्त्र लाइसेंस के लिए एक नवंबर से ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं होंगे। अब आवेदन एनडीएएल पोर्टल के माध्यम से ही करना होगा। जिलों से लाइसेंस प्रस्ताव गृह विभाग भेजने की व्यवस्था भी समाप्त की जाएगी।
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