12 साल पहले ग्वालियर में पकड़ाया था विदेशी घुसपैठिया:  अब कोर्ट में बोला-मुझे अवैध कब्जे में  रखा; सउदी लाइसेंस, बांग्लादेशी पासपोर्ट मिला था – Gwalior News

12 साल पहले ग्वालियर में पकड़ाया था विदेशी घुसपैठिया: अब कोर्ट में बोला-मुझे अवैध कब्जे में रखा; सउदी लाइसेंस, बांग्लादेशी पासपोर्ट मिला था – Gwalior News

12 साल पहले ग्वालियर में पकड़ाया था विदेशी घुसपैठिया:  अब कोर्ट में बोला-मुझे अवैध कब्जे में  रखा; सउदी लाइसेंस, बांग्लादेशी पासपोर्ट मिला था – Gwalior News


ग्वालियर रेलवे स्टेशन के बाहर से ठीक 12 साल पहले 21 सितंबर 2014 को गिरफ्तार किया गया संदिग्ध विदेशी घुसपैठिया अहमद अलमक्की एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्तमान में असम के डिटेंशन सेंटर में बंद अलमक्की ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि भारत सरकार ने उसे अवैध रूप से हिरासत में रखा है। उल्लेखनीय है कि जब 2014 में उसे पकड़ा गया था, तब उसके पास से सऊदी अरब का ड्राइविंग लाइसेंस और बांग्लादेशी पासपोर्ट बरामद हुआ था, जिसके बाद यह पूरा मामला बेहद उलझ गया था। जबकि दोनों ही देश उसे अपना नागरिक मानने से इनकार कर चुके हैं। इससे उसकी नागरिकता साबित नहीं हो पाई थी। अब इस मामले में कोर्ट ने फिर शासन से जवाब मांगा है। फर्जी दस्तावेजों से खरीद रहा था सिम ग्वालियर में 21 सितंबर 2014 को विदेश घुसपैठिया अहमद अलमक्की ग्वालियर रेलवे स्टेशन के बाहर एक दुकान पर सऊदी अरब के ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से सिम कार्ड खरीद रहा था। संदेह होने पर दुकानदार ने मामले की सूचना तत्काल पड़ाव थाना पुलिस को दी थी। जिस पर पुलिस ने उसे पकड़ा, तो खुफिया एजेंसियों की पूछताछ में वह लगातार गुमराह करता रहा। वह कभी खुद को सऊदी अरब तो कभी बांग्लादेशी बताता रहा। उसके पास से बांग्लादेश का पासपोर्ट व साउदी अरब का ड्राइविंग लाइसेंस मिलना ही यह साबित करता था कि वह अवैध तरीके से देश में घुसा है। अदालत ने सुनवाई के बाद उसे 37 महीने की जेल की सजा सुनाई थी। पड़ाव थाने की कस्टडी से भागा, हवलदार के बेटे की चला रहा था सिम देश में अवैध तरीके से घुसने पर घुसपैठिया अहमद अलमक्की को 37 महीने की सजा हुई थी। उसके बाद साल 2017 में सजा पूरी होने के बाद वह जेल से छूट गया था, लेकिन विदेशी नागरिक होने के कारण उसे पड़ाव थाने में बनाए गए अस्थायी डिटेंशन सेंटर में रखा गया था। क्योंकि अभी तक यहां उसकी नागरिकता साबित नहीं हो पाई थी। साल 2018 में पड़ाव थाने से फूलबाग मस्जिद जाते समय वह पुलिस जवानों को चकमा देकर फरार हो गया। उसके बाद खुलासा हुआ था कि पड़ाव थाना के एक हवलदार (मुंशी) के बेटे के नाम की सिम वह चला रहा था। हवालात में रहते समय हवलदार से उसने दोस्ती कर ली थी। हैदराबाद में रोहिंग्या बनने की रच रहा था साजिश अहमद अलमक्की के भागने के बाद देशभर में अलर्ट जारी होने के बाद पुलिस ने उसे कुछ दिन बाद हैदराबाद में उसके एक दोस्त के ठिकाने से दबोचा। जांच में खुलासा हुआ कि वह फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुद को रोहिंग्या सिद्ध कर बांग्लादेश भागने की फिराक में था। जिस पर उसकी वापस गिरफ्तारी कर पुलिस कस्टडी से भागने का केस चला और फिर जेल भेजा गया। किसी भी देश ने नहीं माना अपना नागरिक पुनः गिरफ्तारी के बाद कोर्ट के आदेश पर उसे साल 2024 में असम के डिटेंशन सेंटर शिफ्ट किया गया, ताकि उसे उसके देश वापस (डिपोर्ट) भेजा जा सके। हालांकि, जब भारतीय दूतावास ने बांग्लादेश और सउदी अरब दोनों देशों की सरकारों से संपर्क कर दस्तावेज भेजे, तो दोनों ही देशों ने अलमक्की को अपना नागरिक मानने से साफ इनकार कर दिया। नागरिकता स्पष्ट न होने के कारण वह 2024 से असम के डिटेंशन सेंटर में ही बंद है, जहां से अब उसने अपनी रिहाई को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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