
गौरतलब है कि बच्ची के पिता की मौत हो चुकी है। बाल विवाह की सूचना पर विभाग की टीम ने समझाइश देकर शादी रुकवाई और परिजन ने लिखित आश्वासन भी दिया था। इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर बच्ची पर नजर रख रहे थे, लेकिन मामला चुपचाप आगे बढ़ता रहा। उडऩदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक ने बताया कि बालिका के भाई की पत्नी ने शर्त रखी कि यदि उसकी ननद यानी नाबालिग लड़की उसके चाचा की पत्नी बन गई है और उसे यहां भेजा जाए तभी वह ससुराल लौटेगी। इसके बाद परिजन ने बच्ची पर भी दबाव बनाना शुरू कर दिया।
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