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संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को बालाघाट के आदिवासी अंचल से समाज सेवा करने वालों को अहंकार से बचने का संदेश दिया। लंबे समय से गरीबी झेल रहे वंचितों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार देकर सक्षम बनाना चाहिए। भागवत 18 दिन में दूसरी बार अहंकार पर बोले हैं। इससे पहले 18 सितंबर को उज्जैन की युवा धर्म संसद में उन्होंने कहा था कि अहंकार में व्यक्ति मानने लगता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है।
भागवत ने फ्लायदुबई की उड़ान में 170 यात्रियों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित मछार के साहस की सराहना की। प्रसंग से संदेश… बच्चों को दवा और शिक्षा की जरूरत भागवत ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि धर्मांतरण के दौर में भाऊराव देवरस से एक गांव के अशिक्षित बुजुर्ग मुखिया ने कहा था- हमने कठिन परिस्थितियों में भी धर्म बचाया है। हमें बच्चों की शिक्षा और मलेरिया की दवा चाहिए। हमारी कमजोरी दूर कर दीजिए, धर्म हम संभाल लेंगे।
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