2000 करोड़ की बरगी डायवर्जन टनल परियोजना में नया खुलासा:  टर्न-की कॉन्ट्रैक्ट के बावजूद DMRC को जोड़ा, करोड़ों का अतिरिक्त खर्च; CBI तक पहुंची शिकायत – Jabalpur News

2000 करोड़ की बरगी डायवर्जन टनल परियोजना में नया खुलासा: टर्न-की कॉन्ट्रैक्ट के बावजूद DMRC को जोड़ा, करोड़ों का अतिरिक्त खर्च; CBI तक पहुंची शिकायत – Jabalpur News

कटनी जिले में करीब 2000 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित बरगी डायवर्जन प्रोजेक्ट (BDP) की स्लीमनाबाद टनल को लेकर एक और बड़ा खुलासा सामने आया है।

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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की आपत्तियों के बाद अब आरोप लगे हैं कि टर्न-की (Turn-Key) अनुबंध होने के बावजूद नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) ने परियोजना में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को तकनीकी सलाहकार के रूप में जोड़कर करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया।

शिकायतकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट नीरज मिश्रा ने आरोप लगाया है कि यह भुगतान अनुबंध की मूल शर्तों के विपरीत किया गया और इसके माध्यम से ठेकेदार कंपनी को करोड़ों रुपए का अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाया गया।

मामले की शिकायत लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और CBI तक पहुंच चुकी है।

2000 करोड़ की बरगी डायवर्जन टनल परियोजना में नया खुलासा:  टर्न-की कॉन्ट्रैक्ट के बावजूद DMRC को जोड़ा, करोड़ों का अतिरिक्त खर्च; CBI तक पहुंची शिकायत – Jabalpur News

कटनी की स्लीमनाबाद टनल।

800 करोड़ से शुरू हुई परियोजना पहुंची 2000 करोड़ तक

बरगी डायवर्जन परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में लगभग 800 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से हुई थी। निर्माण के दौरान तकनीकी समस्याओं, देरी और अतिरिक्त कार्यों के चलते परियोजना की लागत बढ़ते-बढ़ते करीब 2000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।

इसी परियोजना में पटेल-एसईडब्ल्यू जेवी (Patel-SEW JV) कंपनी के साथ टर्न-की अनुबंध किया गया था। ऐसे अनुबंध में परियोजना से जुड़े अधिकांश तकनीकी और वित्तीय जोखिम ठेकेदार की जिम्मेदारी होते हैं।

टर्न-की अनुबंध के बाद भी DMRC को जोड़ा

आरटीआई एक्टिविस्ट नीरज मिश्रा का आरोप है कि टर्न-की अनुबंध होने के बावजूद वर्ष 2021 में NVDA ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के साथ एमओयू कर उसे तकनीकी विशेषज्ञ (Technical Consultant) के रूप में शामिल किया।

शिकायत के अनुसार DMRC की तकनीकी अनुशंसाओं के आधार पर ठेकेदार को डिवाटरिंग (पानी निकासी), केमिकल ग्राउटिंग और TBM (टनल बोरिंग मशीन) की मरम्मत जैसे कार्यों के लिए करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया, जबकि अनुबंध के अनुसार इन कार्यों का खर्च ठेकेदार को स्वयं वहन करना था।

टनल के लिए बनाई गई बाहरी सुरंग।

टनल के लिए बनाई गई बाहरी सुरंग।

एक ही दिन मांगा गया अभिमत, उसी दिन अनुशंसा

शिकायत के अनुसार तत्कालीन मुख्य अभियंता राममणि शर्मा ने 4 मार्च 2023 को DMRC से अभिमत मांगा और उसी दिन DMRC ने पत्र जारी कर फोर्स मेज्योर (Force Majeure) क्लॉज के तहत ठेकेदार को वित्तीय सहायता देने की अनुशंसा कर दी।

इस अनुशंसा के आधार पर विभाग ने डिवाटरिंग, ग्राउटिंग और TBM सुधार कार्यों के लिए अलग से करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया।

CAG ने भी उठाए सवाल

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने 31 मार्च 2023 तक के रिकॉर्ड की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में लगभग 100 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत किया है।

CAG ने स्पष्ट किया कि अनुबंध में Force Majeure Clause के तहत केवल समयावधि बढ़ाने का प्रावधान था, वित्तीय सहायता देने का नहीं। इसके बावजूद ठेकेदार को अतिरिक्त भुगतान किया गया, जो अनुबंध की भावना के विपरीत है।

59 करोड़ का अनुचित लाभ

नीरज मिश्रा का आरोप है कि DMRC की अनुशंसा के आधार पर ठेकेदार कंपनी को करीब 59 करोड़ रुपए का अनुचित लाभ पहुंचाया गया। उनका कहना है कि यदि DMRC को सलाह देनी भी थी तो वह केवल तकनीकी और समय विस्तार तक सीमित होनी चाहिए थी, न कि अतिरिक्त भुगतान की अनुशंसा।

इसी आधार पर उन्होंने पूरे मामले की शिकायत CBI से करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

अधिकारियों पर गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि परियोजना में डिवाटरिंग सहित कई कार्यों को फोर्स मेज्योर के दायरे में लाकर करीब 229 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।

इसके अलावा बार-बार TBM मशीनों की खराबी, मरम्मत, अतिरिक्त ग्राउटिंग और अन्य तकनीकी कार्यों के नाम पर भी ठेकेदार को अलग-अलग मदों में भुगतान किया गया, जबकि इनका दायित्व अनुबंध के अनुसार कंपनी का था।

अतिरिक्त भुगतान पर भी सवाल

CAG रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अनुबंध में शामिल कुछ कार्यों का खर्च विभाग ने स्वयं उठाया। सड़क मरम्मत सहित अन्य मदों में भी निर्धारित राशि की वसूली नहीं की गई। कुछ कार्य मूल ठेकेदार के बजाय अन्य एजेंसियों को देकर अतिरिक्त भुगतान किया गया, जिसके लिए विशेष परिस्थितियों का हवाला दिया गया।

CBI जांच की मांग तेज

मामले में शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि CBI निष्पक्ष जांच करती है तो परियोजना में हुए वित्तीय निर्णयों और तकनीकी अनुशंसाओं से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल लोकायुक्त, EOW और CBI के समक्ष शिकायत लंबित है। वहीं CAG की रिपोर्ट के बाद इस बहुचर्चित परियोजना में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

एनवीडीए ने शिकायतों को निराधार बताया

नर्मदा घाटी विकास प्रधिकरण के तत्कालीन मुख्य अभियंता आरएम शर्मा ने सभी शिकायतों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि किभी भी विशेषज्ञ को रखने के लिए शासन की स्वीकृति ली जाती है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर, इंजीनियरों की टीम यहां आकर काम देखते हैं, क्योंकि वो हमारे सलाहकार हैं।

टर्न-की अनुबंध के बाद भी डीएमआरसी के साथ इसलिए अनुबंध किया गया कि काम के दौरान कोई गलती ना हो, क्योंकि टनल बनाने के लिए डीएमआरसी विशेषज्ञ और जानकार है। उन्होंने बताया कि जितने भी काम हुए उनकी स्वीकृति के लिए सीएम, मुख्य सचिव की बैठक होती है। तीन साल के भीतर उनके कार्यकाल में पांच किलोमीटर लंबी टनल को तैयार कर लिया गया था, और अब जब यह टनल तैयार होगी तो हजारों किसानों की लाखों हेक्टेयर जमीन सिचिंत होगी। उन्होंने कहा कि विभागीय प्रक्रिया को जाने बिना शिकायत करना सही नहीं है।

तत्कालीन मुख्य अभियंता आरएम शर्मा का कहना था कि 2019 तक चार किलोमीटर टनल बनकर तैयार हो गई थी। इसके बाद जब मेरी पोस्टिंग हुई तो साढ़े तीन साल के कार्यकाल में 6 किलोमीटर बनकर तैयार हो गई थी

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जबलपुर में 800 करोड़ की टनल पर 2000 करोड़ खर्च

मध्य प्रदेश के महत्वाकांक्षी बरगी डायवर्जन प्रोजेक्ट (BDP) की स्लीमनाबाद टनल एक बार फिर विवादों में है। वर्ष 2008 में करीब 800 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से शुरू हुई यह परियोजना करीब 18 साल बाद लगभग 2000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।पूरी खबर पढ़ें

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