5 हजार अतिथि शिक्षकों के हित में फैसला:90% ई-अटेंडेंस नहीं तो भी कर सकेंगे री-जॉइनिंग, स्कूल शिक्षा विभाग ने दी राहत

5 हजार अतिथि शिक्षकों के हित में फैसला:90% ई-अटेंडेंस नहीं तो भी कर सकेंगे री-जॉइनिंग, स्कूल शिक्षा विभाग ने दी राहत

5 हजार अतिथि शिक्षकों के हित में फैसला:90% ई-अटेंडेंस नहीं तो भी कर सकेंगे री-जॉइनिंग, स्कूल शिक्षा विभाग ने दी राहत


स्कूलों में पढ़ाने वाले प्रदेश के करीब पांच हजार अतिथि शिक्षकों के हित में लोक शिक्षण आयुक्त ने बड़ा फैसला लिया है। ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम होने के कारण जो शिक्षक इस शिक्षा सत्र में विद्यालयों में री-जॉइन नहीं कर पा रहे थे, उन्हें राहत दी गई है। अब ऐसे शिक्षकों को री-जॉइनिंग के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। इसके बाद वे विद्यालयों में री-जॉइन कर सकेंगे, लेकिन आगे उन्हें नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज करानी होगी। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने सभी संयुक्त संचालकों, जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों तथा संकुल प्राचार्यों (हायर सेकेंडरी एवं हाई स्कूल) को जारी निर्देश में कहा है कि 30 जून 2026 को जारी आदेश में री-जॉइनिंग के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य की गई थी। इसके बाद अतिथि शिक्षक संगठन ने आयुक्त से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं और राहत देने का आवेदन सौंपा। इसके बाद आयुक्त अभिषेक सिंह ने नया आदेश जारी करते हुए कहा कि चालू शिक्षा सत्र के लिए री-जॉइनिंग में 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता में शिथिलता दी जाती है। हालांकि, री-जॉइनिंग के बाद अतिथि शिक्षकों को लिखित वचन-पत्र देना होगा कि भविष्य में इस संबंध में किसी प्रकार की राहत नहीं मांगी जाएगी और वे नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज करेंगे। आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगामी शिक्षा सत्रों में री-जॉइनिंग की प्रक्रिया ई-अटेंडेंस के आधार पर ही होगी और किसी प्रकार की शिथिलता नहीं दी जाएगी। एक लाख 10 हजार अतिथि शिक्षक, पांच हजार को राहत अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने बताया कि स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के अधीन कार्यरत अतिथि शिक्षकों की कुल संख्या करीब एक लाख 10 हजार है। उन्होंने बताया कि इनमें से करीब पांच हजार अतिथि शिक्षक 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता अचानक लागू होने के कारण री-जॉइनिंग से वंचित हो रहे थे। उनकी वास्तविक समस्याओं से 14 जुलाई को हुई बैठक में लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आयुक्त अभिषेक सिंह को अवगत कराया गया था। संगठन ने बताया था कि गंभीर बीमारी, मातृत्व अवकाश, परिवार में आकस्मिक मृत्यु, नेटवर्क की अनुपलब्धता, तकनीकी कारण, प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने या स्वयं के विवाह जैसे कारणों से कई शिक्षकों की उपस्थिति 90 प्रतिशत से कम रही। ऐसे मामलों में मानवीय आधार पर राहत देने की मांग की गई थी। इसके बाद आयुक्त ने इन मामलों में राहत प्रदान की है। संगठन के प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता और उमाशंकर बैस ने बताया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में भोपाल में प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें पद स्थायित्व और अवकाश की पात्रता सहित अन्य मांगों पर मंथन कर आगामी रणनीति तय की जाएगी।

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