ईरान का दावा, ‘क्षेत्र के अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना’, समझौते के 10 दिन बाद ही अमेरिका-ईरान फिर आमने-सामने

ईरान का दावा, ‘क्षेत्र के अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना’, समझौते के 10 दिन बाद ही अमेरिका-ईरान फिर आमने-सामने

ईरान पर हमला

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इमेज कैप्शन, यह कार्रवाई उस ड्रोन हमले के बाद हुई, जिसमें होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजर रहे एक कार्गो शिप को निशाना बनाया गया था
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ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एलान किया है कि ईरानी तटों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में उसकी नौसेना ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.

आईआरजीसी के बयान में कहा गया है अमेरिका ने ईरान के तट पर हवाई हमले शुरू कर दिए थे.

आईआरजीसी ने इन हमलों को युद्धविराम और अमेरिकी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन बताया, और दावा किया कि इसके जवाब में, “क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती के केंद्रों” को निशाना बनाया गया. निशानों के स्थान, हमले के प्रकार या संभावित नुकसान के बारे में कोई विवरण जारी नहीं किया गया है.

आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी हमले दोबारा दोहराए जाते हैं, तो ईरान की प्रतिक्रिया और भीषण होगी.

इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से तनाव बढ़ गया है. ताज़ा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और कोस्टल रडार पोज़िशन पर हमला किया.

यह कार्रवाई उस ड्रोन हमले के बाद हुई, जिसमें होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजर रहे एक मालवाहक जहाज़ (कार्गो शिप) को निशाना बनाया गया था.

अमेरिकी सेंटकॉम ने इसे ईरान के ‘सीज़फायर उल्लंघन’ बताते हुए ईरान पर हमला कर दिया.

जबकि ईरान ने दावा किया कि कार्गो शिप पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वो होर्मुज़ स्ट्रेट के उस रास्ते से जा रहा था जिसे ईरान ने अधिकृत नहीं किया है.

अमेरिकी कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद हुई जिसमें उन्होंने ईरान पर सीज़फ़ायर के ‘मूर्खतापूर्ण उल्लंघन’ का आरोप लगाया था.

हमले से पहले ट्रंप ने कहा था- आपको पता चल जाएगा

डोनाल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्हें ईरान की ओर से हुआ हमला ठीक नहीं लगा (फ़ाइल फ़ोटो)

दरअसल, गुरुवार को होर्मुज़ स्ट्रेट में एक जहाज़ पर एक तरफ़ा हमला करने वाले ड्रोन से हमला हुआ.

इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ. वहां फंसे हज़ारों नाविकों को निकालने की योजना बनाई गई.

इसके बाद व्हाइट हाउस में शुक्रवार दोपहर ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि वे यह नहीं बताएंगे कि अमेरिका ड्रोन हमले का कैसे जवाब देगा या सीज़फ़ायर को अब भी मानता है या नहीं.

उन्होंने कहा, “आपको पता चल जाएगा. मुझे यह अच्छा नहीं लगा कि उन्होंने कल हमला किया. उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था.”

जब पूछा गया कि ईरान ऐसा क्यों करेगा, ट्रंप ने बस इतना कहा, “वे थोड़े अलग हैं.”

इसके बाद शुक्रवार को ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि उसने ईरान के मिसाइल-ड्रोन रखने वाले ठिकानों और कोस्टल रडार पोज़िशन पर हमला किया.

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान पर किए गए हमलों के बारे में और जानकारी दी है.

सेंटकॉम ने कहा कि अमेरिकी विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारों के साथ तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया.

बयान के अनुसार, सिंगापुर के झंडे वाला जहाज़ ‘ऑर लवली’ 25 जून को होर्मुज़ स्ट्रेट से निकलते समय ओमान के तट के पास एक आत्मघाती ड्रोन हमले का शिकार हुआ.

सेंटकॉम ने इस हमले को ईरान की कार्रवाई और युद्धविराम का साफ़ उल्लंघन बताया. उसने कहा कि इस तरह की कार्रवाई दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्ग में स्वतंत्रता को ख़तरे में डालती है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह भी घोषणा की, उसकी सेनाएं व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सहयोग और समर्थन जारी रखेंगी. साथ ही, ईरान के साथ हुए समझौते को पूरी तरह लागू करने के लिए क्षेत्र में मौजूद और तैयार रहेंगी.

जेडी वेंस

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इमेज कैप्शन, जेडी वेंस ने हमले के बाद कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा (फ़ाइल फ़ोटो)

अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने सेंटकॉम का बयान साझा करते हुए कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा.

जेडी वेंस ने एक्स पर लिखा, “ईरान ने युद्धविराम समझौते पर दस्तख़त किए हैं. हमने उसका पालन किया है. अगर उन्हें इस एमओयू के लागू होने पर कोई आपत्ति है, तो वे फ़ोन कर सकते हैं. लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा.”

आईआरजीसी ने अमेरिका को दी चेतावनी

आईआरजीसी गार्ड

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इमेज कैप्शन, आईआरजीसी ने हमले के बाद अमेरिका को चेतावनी दी है

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर (आईआरजीसी) ने इस हमले के लिए अमेरिका और इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराया.

आईआरजीसी ने शुक्रवार को हुए हमले के बाद अमेरिका और इसराइल पर सीज़फ़ायर तोड़ने के आरोप लगाए.

आईआरजीसी ने कहा, “समझौता तोड़ने वाला अमेरिकी शासन हमेशा की तरह अपने वादे तोड़ता है और अलग-अलग बहानों से ईरान के तट पर हवाई हमला करता है.”

आईआरजीसी ने चेतावनी देते हुए आगे कहा, “अगर हमला दोबारा हुआ तो हमारा जवाब इससे भी बड़ा होगा.”

आईआरजीसी ने इसराइल पर भी लेबनान में सीज़फायर तोड़ने का आरोप लगाया.

इब्राहिम अज़ीज़ी
इमेज कैप्शन, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी (फ़ाइल फ़ोटो)

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने अमेरिकी हमले की तीखी आलोचना की.

उन्होंने एक्स पर लिखा, “अमेरिका ने बातचीत के बीच एक बार फिर ईरान पर हमला किया. नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिखा दिया है कि उसे बातचीत या युद्धविराम के नियमों की कोई परवाह नहीं है.

इब्राहिम अज़ीज़ीने आगे लिखा, “यह लापरवाही भरा उल्लंघन हमेशा की तरह उनके पीछे हटने और पछतावे की वजह बनेगा. अब आरोप-प्रत्यारोप का खेल काम नहीं करता.”

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और युद्धविराम को लेकर 18 जून 2026 को समझौता हुआ है.

इस समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने हस्ताक्षर किए थे.

इस समझौते में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्धविराम करने की बात शामिल थी. हालांकि, समझौता करने वाले दोनों प्रमुख देशों के बीच ही यह नहीं टिक पाया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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