अध्ययन ने खोली पोल… इंदौर में बारिश नहीं, अनियोजित निर्माण कार्य बन रहे जलजमाव का संकट

अध्ययन ने खोली पोल… इंदौर में बारिश नहीं, अनियोजित निर्माण कार्य बन रहे जलजमाव का संकट

संस्थान ने शहर के सर्वे के लिए विद्यार्थियों द्वारा टीम बनाई थी। बीते एक साल से विद्यार्थी इस पर कार्य कर रहे थे। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार हो चुकी…और पढ़ें

Publish Date: Sat, 27 Jun 2026 10:06:38 AM (IST)Updated Date: Sat, 27 Jun 2026 10:06:38 AM (IST)

अध्ययन ने खोली पोल… इंदौर में बारिश नहीं, अनियोजित निर्माण कार्य बन रहे जलजमाव का संकट
इंदौर में जलजमाव की समस्या। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. एसजीएसआईटीएस द्वारा किया गया अध्ययन, पिछले पचास साल वर्षा का डाटा किया उपयोग
  2. जलजमाव की समस्या का कारण केवल भारी वर्षा नहीं, बल्कि शहर की विकास योजनाएं और बाधित होती जल निकासी व्यवस्था भी है
  3. श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलाजी एंड साइंस द्वारा किए गए अध्ययन में ये जानकारी सामने आई है

भरत मानधन्या, नईदुनिया, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में हर साल बारिश के साथ सामने आने वाली जलजमाव की समस्या का कारण केवल भारी वर्षा नहीं, बल्कि शहर की विकास योजनाएं और बाधित होती जल निकासी व्यवस्था भी है। श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलाजी एंड साइंस द्वारा किए गए अध्ययन में ये जानकारी सामने आई है।

संस्थान ने शहर के सर्वे के लिए विद्यार्थियों द्वारा टीम बनाई थी। बीते एक साल से विद्यार्थी इस पर कार्य कर रहे थे। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और इस पर लगातार कार्य किया जा रहा है। अध्ययन के लिए पिछले पचास सालों का वर्षा का डाटा और पांच साल का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का डाटा भी लिया गया है।

अध्ययन में सामने आया है कि पिछले एक दशक में इंदौर का तीव्र विस्तार हुआ है। बड़े पैमाने पर सड़कों, भवनों, पार्किंग स्थलों और व्यावसायिक परिसरों के निर्माण से वर्षा जल का प्राकृतिक अवशोषण कम हो गया है। परिणामस्वरूप अधिकांश पानी सीधे सड़कों पर बहता है। वहीं, हाल के वर्षों में मेट्रो, फ्लाईओवर और सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के दौरान कई स्थानों पर अस्थायी निकासी व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे जलभराव की घटनाएं बढ़ी हैं।

शहर के कई क्षेत्रों में वर्षा जल निकासी की क्षमता वर्तमान जनसंख्या और विकास के अनुरूप नहीं बढ़ाई गई। कई स्थानों पर जल निकासी लाइनें छोटी अथवा अपर्याप्त हैं। कचरा, प्लास्टिक, निर्माण मलबा और अतिक्रमण नालों की क्षमता को कम कर देते हैं। कई बार पानी की निकासी बाधित होने से कुछ ही समय में सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। इसके साथ ही पुराने नालों, तालाबों के कैचमेंट क्षेत्र और प्राकृतिक जल प्रवाह मार्गों पर निर्माण कार्य होने से वर्षा जल का प्रवाह बाधित हो जाता है। वहीं, नालों, तालाबों और कान्ह नदी के किनारे बढ़ते अतिक्रमण ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

वर्षा का भी बदला पैटर्न

अध्ययन में यह सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के पैटर्न में भी बदलाव हुआ है। अब वर्षा अधिक तीव्रता से हो रही है। 20 से 30 मिनट में असमान्य 40 से 60 मिमी तक वर्षा होने पर मौजूदा निकासी व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।

प्रमुख जलभराव प्रभावित क्षेत्र

  • विजय नगर चौराहा
  • सत्यासाईं चौराहा
  • रोबोट चौराहा
  • सयाजी चौराहा
  • नवलखा चौराहा
  • खजराना चौराहा
  • भंवरकुआं
  • रसोमा चौराहा
  • मदन महल एवं मधुमिलन क्षेत्र
  • तीन इमली
  • उद्योग भवन क्षेत्र
  • बीआरटीएस कॉरिडोर एवं एबी रोड के कुछ हिस्से

जलभराव प्रभावित आवासीय क्षेत्र

  • तिलक नगर
  • पिपलियाहाना
  • द्वारकापुरी
  • गीता नगर
  • सिकंदराबाद
  • चंदन नगर
  • रामबाग
  • मालवा मिल
  • मल्हारगंज
  • जूनी इंदौर
  • भगीरथपुरा
  • संगम नगर
  • बियाबानी
  • अमितेश नगर
  • मुसाखेड़ी
  • सिरपुर क्षेत्र की कॉलोनियां
  • खजराना एवं आसपास के क्षेत्र

विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्र

  • नालों एवं नदी किनारे स्थित बस्तियां
  • निचले स्तर वाली कालोनियां
  • पुराने शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्र
  • रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड के आसपास के क्षेत्र

अध्ययन में समस्या को जलजमाव की समस्या को खत्म करने के सुझाव भी दिए गए हैं

  • प्री-मानसून ड्रेनेज आडिट
  • जलभराव हॉटस्पॉट मानिटरिंग
  • नालों, पुलियों एवं प्राकृतिक जलमार्गों अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं
  • स्थायी डी-वाटरिंग पंप की स्थापना
  • शहर का जीआइएस आधारित ड्रेनेज नेटवर्क तैयार किया जाए
  • वर्षा जल संचयन
  • परमीएबल पेवमेंट का उपयोग
  • तालाबों एवं जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण
  • स्मार्ट अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम

विद्यार्थियों द्वारा जलभराव और कारकों पर अध्ययन किया जा रहा है

विद्यार्थियों द्वारा जलभराव और कारकों पर अध्ययन किया जा रहा है। जलभराव केवल भारी वर्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि अनियोजित शहरीकरण, अपर्याप्त ड्रेनेज क्षमता, नालों पर अतिक्रमण, निर्माण गतिविधियों और प्राकृतिक जलमार्गों की उपेक्षा का संयुक्त परिणाम है। यदि वैज्ञानिक ड्रेनेज प्रबंधन, वर्षा जल संचयन तथा सतत शहरी नियोजन को अपनाएं, तो इंदौर को जलभराव मुक्त एवं जल-संवेदनशील स्मार्ट सिटी बनाया जा सकता है। – इंजीनियर विवेक तिवारी, असिस्टेंट प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, एसजीएसआईटीएस

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