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ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद सोने और चांदी की क़ीमतों में गिरावट दर्ज की गई है.
होर्मुज़ स्ट्रेट बंद होने की आशंका के दौरान कच्चे तेल, सोने और चांदी की क़ीमतें अपने उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं. अब इन तीनों की क़ीमतों में बड़ी गिरावट आई है.
बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की क़ीमत में पिछले सात महीनों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. वहीं, चांदी की क़ीमत भी जनवरी के स्तर से क़रीब आधी रह गई है.
फ़िलहाल दोनों धातुओं की क़ीमतें पिछले नवंबर के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं.
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इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक़, गुरुवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की क़ीमत 1.40 लाख रुपये थी, जबकि एक किलोग्राम चांदी की क़ीमत 2.15 लाख रुपये दर्ज की गई.
जनवरी के आख़िर में 10 ग्राम सोने की क़ीमत 2 लाख रुपये तक पहुंच गई थी. इसी तरह एक किलोग्राम चांदी की कीमत 4.04 लाख रुपये के स्तर पर थी. इसके बाद से दोनों की क़ीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, पिछले बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की क़ीमत पिछले सात महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई. एक औंस (28.35 ग्राम) सोने की क़ीमत 4,000 डॉलर से नीचे आ गई. सिर्फ़ बुधवार को ही सोने की क़ीमत में 3.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
वहीं, इस दौरान अमेरिकी डॉलर भी मज़बूत हुआ है. इसकी वजह से डॉलर के अलावा दूसरी किसी भी मुद्रा में सोना ख़रीदना पहले की तुलना में महंगा हो गया है.
सोने को निवेश के तौर पर रखा जाता है और इससे किसी तरह का ब्याज या नियमित आय नहीं मिलती. इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने में निवेश का आकर्षण कम हो जाता है.
पिछले जनवरी में सोने की क़ीमत एक औंस के लिए 5,594 डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी. उस स्तर की तुलना में अब सोने की क़ीमत प्रति औंस क़रीब 1,600 डॉलर तक गिर चुकी है.
इस स्थिति को समझने के लिए बीबीसी ने आभूषण कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों और व्यापारियों से बातचीत की.
सोने और चांदी की क़ीमत पर कैसे पड़ता है असर
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अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का इन धातुओं की क़ीमतों पर बड़ा असर पड़ता है.
पिछले दो दिनों में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में 10 ग्राम सोने की क़ीमत 6 हज़ार रुपये तक गिर गई. वहीं, चांदी की क़ीमत में भी 15,500 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई.
इस बारे में एचडीएफ़सी सिक्योरिटीज़ में कमोडिटी मार्केट विश्लेषक सौमिल गांधी ने बीबीसी से कहा, “पिछले सप्ताह अमेरिकी फ़ेडरल बैंक की बैठक हुई थी. इसमें नए अध्यक्ष केविन वार्श ने ब्याज दरों को लेकर सख़्त रुख़ अपनाया.”
उन्होंने कहा, “अमेरिका में पिछले पांच वर्षों से महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. इसलिए महंगाई को नियंत्रित करना अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. इसी वजह से इस साल अमेरिकी फ़ेडरल बैंक एक या दो बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है. ब्याज दरें बढ़ने के संकेत मिलने के कारण निवेशक सोने से पैसा निकालकर अमेरिकी डॉलर में निवेश कर रहे हैं.”
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सौमिल गांधी ने बताया कि फ़िलहाल डॉलर इंडेक्स पिछले 13 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. इसकी वजह से सोना, चांदी और अन्य सभी बेस मेटल्स में बिकवाली देखने को मिल रही है.
बाज़ार के अनुमान के मुताबिक़, अमेरिकी केंद्रीय बैंक सितंबर और दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है.
सौमिल गांधी का कहना है कि जनवरी में बने रिकॉर्ड स्तर के बाद सोने की तरह चांदी की क़ीमतों में भी बड़ी गिरावट आई है.
उन्होंने कहा, “अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के युद्धविराम पर सहमति बनी है. हालांकि, यह कितने समय तक कायम रहेगा, इसके बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है. इसलिए आने वाले दिनों में ख़बरों और हालात के आधार पर सोने और कच्चे तेल की क़ीमतें बढ़ भी सकती हैं और घट भी सकती हैं.”
ज्वैलर्स की स्थिति कैसी है?
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अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की क़ीमतों में गिरावट के बाद क्या भारत में इसकी बिक्री बढ़ेगी, इस पर अहमदाबाद की ज्वैलर्स एसोसिएशन ‘चोक्सी महाजन’ के सदस्य हेमंत सथवारा ने कहा कि सोने और चांदी की क़ीमतों में गिरावट के बावजूद फ़िलहाल ग्राहकों के बीच ख़रीदारी का उत्साह नहीं दिख रहा है.
उन्होंने कहा, “मौजूदा समय में सोने और चांदी के बाज़ार में सुस्ती का माहौल है. स्कूल खुल चुके हैं, इसलिए लोगों ने अपनी बचत का बड़ा हिस्सा स्कूल फीस, किताबों और दूसरी जरूरी चीज़ों पर ख़र्च कर दिया है. यही वजह है कि खुदरा बाज़ार में सोने की बिक्री फिलहाल कम बनी हुई है.”
उन्होंने यह भी कहा कि सोने और चांदी की बढ़ती क़ीमतों के साथ-साथ इन पर आयात शुल्क बढ़ने से कारोबार पर भी गंभीर असर पड़ा है.
हेमंत सथवारा ने कहा कि पिछले तीन दिनों में डॉलर की मज़बूती की वजह से सोने और चांदी की क़ीमतों में गिरावट आई है.
उन्होंने कहा, “अगर अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है तो सोने और चांदी की क़ीमतें घटती हैं. वहीं, अगर ब्याज दरों में कटौती की जाती है तो इन धातुओं की क़ीमतें बढ़ जाती हैं.”
ख़रीद में लोगों की दिलचस्पी कम क्यों?
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हेमंत सथवारा के मुताबिक़, 25 जून को अहमदाबाद में 10 ग्राम सोने की क़ीमत 1.44 लाख रुपये थी, जबकि एक किलोग्राम चांदी की क़ीमत 2.19 लाख रुपये दर्ज की गई.
उन्होंने बताया कि ख़रीदारी के समय ग्राहकों को इन क़ीमतों पर 3 प्रतिशत जीएसटी भी देनी पड़ती है.
उन्होंने आगे कहा, “फ़िलहाल सोने और चांदी के बाज़ार में कोई नए ऑर्डर नहीं आ रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सोने के आभूषणों की ख़रीद से बचने की अपील की, उसके बाद से इसकी खपत में काफ़ी गिरावट आई है. ऐसे हालात में छोटे आभूषण निर्माता भी काम की कमी से जूझ रहे हैं.”
हेमंत सथवारा ने कहा कि आमतौर पर सोने की क़ीमतें घटने पर बाज़ार में कारोबार बढ़ जाता है, लेकिन इस बार ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है.
उनका कहना है कि जब दूसरे क्षेत्रों में भी मंदी का असर है, तो आभूषण उद्योग इससे अछूता नहीं रह सकता.
उन्होंने उम्मीद जताई कि अगस्त से शुरू होने वाला त्योहारों का सीज़न, जो दिवाली तक चलता है, कारोबार में तेज़ी ला सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में त्योहारों को लेकर अभी तक कोई अग्रिम ऑर्डर नहीं मिले हैं.
चांदी की क़ीमत में गिरावट क्यों आई?
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पिछले साल चांदी की क़ीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी ने सभी को हैरान कर दिया था. हालांकि, अब इसकी क़ीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है.
इसके पीछे एक बड़ा कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना है. इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से चांदी पर मिलने वाला अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम भी घट गया है.
सोने की तरह चांदी भी कोई निश्चित ब्याज या नियमित आय नहीं देती. वहीं, इसकी तुलना में अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न मिल रहा है.
यही वजह है कि अधिक लाभ की उम्मीद में निवेशकों ने चांदी से पैसा निकालकर बॉन्ड में निवेश करना शुरू कर दिया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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