इंदौर निगम घोटाला: 350 फर्जी नामांतरण की जांच में नया मोड़, अब 3 सदस्यीय कमेटी करेगी पड़ताल; IT एक्सपर्ट भी शामिल

इंदौर निगम घोटाला: 350 फर्जी नामांतरण की जांच में नया मोड़, अब 3 सदस्यीय कमेटी करेगी पड़ताल; IT एक्सपर्ट भी शामिल

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नगर निगम में रातों-रात हुए 350 से ज्यादा नामांतरण की जांच में नया मोड़ आ गया है। मामले की जांच अब तक अपर आयुक्त आकाश सिंह कर रहे थे। उन्होंने सोमवार शाम तक मामले में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तैयारी कर भी ली थी, लेकिन अब मामले की जांच तीन सदस्यीय कमेटी करेगी।

फर्जीवाड़े में शामिल आरोपितों की पहचान आसान होगी

इस कमेटी में अपर आयुक्त आकाश सिंह के साथ अपर आयुक्त अर्थ जैन और आईटी विभाग के कपिल गेहलोत को शामिल किया गया है। दावा है कि समिति का दायरा बढ़ने के बाद अब जांच में नए बिंदु शामिल किए जाएंगे। आईटी विभाग से एक व्यक्ति के समिति में होने से विस्तृत जांच में मदद मिलेगी और फर्जीवाड़े में शामिल आरोपितों की पहचान आसान होगी।

नई समिति गठित होने के बाद अब जांच रिपोर्ट इस सप्ताह के अंत तक पेश होने की उम्मीद है। इधर जिन छह लोगों को अपर आयुक्त आकाश सिंह ने नोटिस जारी किए थे, उनमें से चार ने जवाब सौंप दिए हैं। इन सभी ने फर्जीवाड़े में अपनी भूमिका से इंकार किया है।

एक ही रात में निराकृत किए थे 350 से ज्यादा प्रकरण

फर्जी नामांतरण जनवरी से मार्च 2026 के बीच किए गए थे। इनमें संपत्तिकर खातों में संपत्ति स्वामियों के नाम बदले गए। आरोपितों ने फर्जीवाड़े को रात 10 से सुबह तीन बजे के बीच अंजाम दिया था। जिन संपत्तियों के फर्जी नामांतरण किए गए, उनमें से ज्यादातर में पारिवारिक विवाद था और ये प्रकरण सालों से लंबित थे।

ज्यादातर फर्जी नामांतरण उपायुक्त केशव सगर की आईडी से किए गए थे, जबकि कुछ उपायुक्त प्रदीप जैन की आईडी से बदले गए थे। जिस तरह से फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया था, उससे आशंका है कि यह काम निगम की कार्यप्रणाली से परिचित किसी व्यक्ति ने किया था।

आरोपितों को अधिकारियों की लॉगिन आईडी की जानकारी थी। मामले की जांच कर रहे अपर आयुक्त आकाश सिंह ने इस मामले में दो उपायुक्तों सहित छह लोगों को नोटिस जारी किया था। इस बीच निगमायुक्त ने मामले में नई कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी मामले की नए सिरे से जांच शुरू करेगी।

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राजस्व समिति प्रभारी ने सवा माह पहले ही लिख दिया था पत्र

चौंकाने वाली बात यह है कि राजस्व समिति प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने 26 मई 2026 को ही निगमायुक्त को घोटाले के संबंध में पत्र लिखकर जांच की मांग की थी, लेकिन उस वक्त उनकी बात पर किसी ने कान नहीं धरा।

चौहान ने पत्र में स्पष्ट कहा था कि मेरे द्वारा एमआईएस की आईडी भी मांगी गई थी, जो मुझे उपलब्ध कराने के कुछ ही दिन बाद बंद कर दी गई। इससे स्पष्ट है कि निगम के ही कुछ कर्मचारी इस भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और निष्पक्ष और पारदर्शिता के साथ काम नहीं होने देना चाहते।

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