देशभर से इंदौर आए ट्रांसपोर्टरों ने परिवहन मंथन 2026 में सरकार के लिए 10 सूत्री साझा एजेंडा तैयार किया।

HighLights
- ई-चालान, टोल, भाड़ा और ट्रांसपोर्ट नगर जैसे मुद्दों पर नीति सुधार की मांग
- डॉ. हरीश सबरवाल ने ड्राइवरों की कमी से वाहन खड़े होने की आशंका जताई
- सभी ने यात्री बसों में माल ढुलाई पर प्रतिबंध जैसे सुझाव दिए गए
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बढ़ती परिचालन लागत, प्रशिक्षित चालकों की कमी, ई-चालान और टोल व्यवस्था से जुड़ी परेशानियां और स्पष्ट राष्ट्रीय परिवहन नीति के अभाव ने देश के ट्रांसपोर्ट उद्योग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर इंदौर में आयोजित आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआइएमटीसी) की 219वीं मैनेजिंग कमेटी बैठक और मध्य प्रदेश इकाई के प्रांतीय अधिवेशन ‘परिवहन मंथन-2026’ में देशभर से आए ट्रांसपोर्टरों, बस-ट्रक संचालकों और मोटर स्वामियों ने विस्तृत चर्चा की। सम्मेलन में सरकार के समक्ष रखने के लिए 10 सूत्री साझा एजेंडा तैयार किया गया।
एआईएमटीसी के पदाधिकारियों ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले परिवहन उद्योग को आज भी बुनियादी सुविधाओं और स्पष्ट नीति का इंतजार है। लगातार बढ़ती लागत, तकनीकी नियमों के नाम पर होने वाली परेशानियां और अव्यवस्थित व्यवस्था से कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका कहना था कि अब समय आ गया है कि पूरे देश के ट्रांसपोर्टर एकजुट होकर नीति सुधार की मांग को मजबूती से उठाएं।
ई-चेकिंग प्रणाली पारदर्शी बनाने की मांग
एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सबरवाल ने कहा कि देश में प्रशिक्षित ड्राइवरों की गंभीर कमी पैदा हो रही है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी संख्या में वाहन खड़े होने की स्थिति बन सकती है। उन्होंने चालकों के प्रशिक्षण, बीमा और सामाजिक सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था करने, राष्ट्रीय परिवहन नीति लागू करने, लागत आधारित भाड़ा निर्धारण और ई-चेकिंग प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की।
मुख्य अतिथि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि परिवहन क्षेत्र के बिना देश की अर्थव्यवस्था की कल्पना संभव नहीं है। इंदौर तेजी से देश के प्रमुख लाजिस्टिक्स हब के रूप में उभर रहा है और पिछले 12 वर्षों में शहर के विस्तार में परिवहन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एआइएमटीसी के प्रदेश सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि अधिवेशन में मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टर शामिल हुए।
सुविधाओं से बढ़ेगी सड़क सुरक्षा (सीएल मुकाती, चेयरमैन, आरटीओ एवं ट्रैफिक कमेटी)
वर्ष 2003 में परिवहन उद्योग जिन समस्याओं से जूझ रहा था, उनमें से अधिकांश आज भी जस की तस हैं। केवल जुर्माना बढ़ाने से सड़क हादसे नहीं रुकेंगे। शहरों के बाहर आधुनिक ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किए जाएं और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रक चालकों के लिए रेस्ट हाउस, पार्किंग तथा सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था हो। ट्रक चालकों के लिए बीमा योजना लागू की जाए तथा स्पीड गवर्नर और वीडीएल (व्हीकल लोकेशन डिवाइस) के नाम पर होने वाली अवैध वसूली पर रोक लगे।
लागत के अनुरूप तय हो भाड़ा (बाल मलकीत सिंह, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, एआइएमटीसी)
संगठन की 10 प्रमुख मांगें केंद्र सरकार के समक्ष रखी जाएंगी। ट्रांसपोर्टरों के लिए लागत आधारित प्रति किलोमीटर भाड़ा तय किया जाए, ताकि प्रतिस्पर्धा के बीच भी उचित दर सुनिश्चित हो सके। साथ ही ई-चालान प्रणाली में सुधार और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ड्राइवरों के लिए पर्याप्त रेस्ट हाउस विकसित किए जाएं।
यात्री बसों में माल ढुलाई पर लगे पूर्ण प्रतिबंध (जीआर शानमुगप्पा, चेयरमैन, एआइएमटीसी)
यात्री बसों में व्यावसायिक माल ढुलाई यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। इस पर पूरे देश में प्रभावी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश में संगठित प्रयासों से इस व्यवस्था पर रोक लगाई गई है। साथ ही ई-चालान प्रणाली की खामियां दूर करने और ग्रीन टैक्स सहित अन्य नियमों की समीक्षा की भी आवश्यकता है।
सम्मेलन से निकले अहम सुझाव
- जांच व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो।
- राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर ट्रक पार्किंग और सुविधा केंद्र बनाए जाएं।
- पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाकर एक समान दर लागू हो।
- हर जिले में आधुनिक ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किए जाएं।
- टोल प्लाजा का आडिट कर वसूली पूरी होने पर टोल दरें घटाई जाएं।
- चालकों के लिए प्रशिक्षण, बीमा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो।
- लागत के अनुरूप वैज्ञानिक तरीके से भाड़ा तय किया जाए।
- यात्री बसों में व्यावसायिक माल ढुलाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
- ई-चालान के दुरुपयोग और मनमानी वसूली पर रोक लगे।
उद्योग ने सुझाए ये सुधार
- व्यवस्था सुधारने के बाद ही सख्ती लागू हो।
- ई-चालान के नाम पर मनमानी और अवैध वसूली रुके।
- ड्राइवरों के लिए सुरक्षा, प्रशिक्षण और सामाजिक सुविधाएं बढ़ें।
- यात्री बसों में माल ढुलाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
- ट्रक परिवहन को उद्योग का दर्जा मिले।
- पैनिक बटन की अनिवार्यता और अव्यावहारिक लोडिंग नियमों की समीक्षा हो।
- वीडीएल के नाम पर हो रही वसूली बंद की जाए।
- 95 लाख देशभर में पंजीकृत ट्रकों की संख्या
- 7 लाख मध्य प्रदेश में संचालित ट्रक
- 1.5 लाख इंदौर में संचालित ट्रक
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