पूर्वी बायपास से लगी यह जमीन कई वर्षों से विवादों में बनी हुई है। यह जमीन डायमंड गृह निर्माण संस्था की बताई जा रही है। दस्तावेजों में जमीन के कुछ हिस्से बेचे जा चुके हैं, लेकिन मौके पर अब भी 42 से ज्यादा निर्माण मौजूद हैं। इन्हें हटाने के लिए समय-समय पर अलग-अलग दबंगों और गुंडों को ठेका दिया जाता रहा है।
पहले बब्बू-छब्बू को मिला था जमीन खाली कराने का जिम्मा
सबसे पहले जमीन खाली कराने का ठेका बब्बू-छब्बू को दिया गया था। उस समय भी विवाद हुआ था, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद जमीन खाली कराने की जिम्मेदारी अलग-अलग दबंगों को दी जाती रही। जानकारी के मुताबिक, जमीन खरीदने वाली कंपनी ने एक भूमाफिया के साथ भी जमीन खाली कराने के लिए अनुबंध किया था। चर्चा यह भी है कि एक प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़े कुछ लोगों ने भी इस जमीन को खाली कराने की जिम्मेदारी ली थी।
21 जून को विवाद के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला
21 जून को दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन वहां मौजूद गुंडों ने पुलिसकर्मियों पर ही हमला कर दिया। इस हमले में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। हमले के बावजूद कनाड़िया थाना पुलिस ने मामला दबाए रखा। घायल पुलिसकर्मियों का न तो मेडिकल कराया गया और न ही आरोपियों के खिलाफ तत्काल कोई मामला दर्ज किया गया।
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थाना प्रभारी पर बैठी जांच
मामले में हुई देरी को लेकर कनाड़िया थाना प्रभारी के खिलाफ जांच बैठा दी गई है। पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर सामने आने के बाद पुलिस ने आखिरकार मामला दर्ज किया। पुलिस ने इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे विवाद के बाद कुछ पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
निजी अस्पताल में कराया गया इलाज
हमले में घायल दोनों पुलिसकर्मियों का इलाज निजी अस्पतालों में कराया गया। इनमें से एक पुलिसकर्मी के सिर में 15 से ज्यादा टांके आए, जबकि दूसरा पुलिसकर्मी भी घायल हुआ। आरोपियों पर कड़ी धाराएं लगाने के बजाय पुलिस ने केवल शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया, जिस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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