पिता वर्ल्ड चैंपियन और मां ओलंपिक रनर… जानें ₹4 करोड़ के उस बाइडेन घोड़े की कहानी, जिसे पाने के लिए इंदौर की खिलाड़ी से हुआ फ्रॉड

पिता वर्ल्ड चैंपियन और मां ओलंपिक रनर… जानें ₹4 करोड़ के उस बाइडेन घोड़े की कहानी, जिसे पाने के लिए इंदौर की खिलाड़ी से हुआ फ्रॉड

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। घुड़सवारी की दुनिया में घोड़े की पहचान सिर्फ उसकी रफ्तार से नहीं, बल्कि उसकी ब्लड लाइन, प्रशिक्षण, स्वभाव और प्रदर्शन क्षमता से तय होती है। इस कारण डेनमार्क का नौ वर्षीय घोड़ा ‘बाईडेन’ सुदीप्ती ने चार करोड़ में खरीदा था। बाईडेन अंतरराष्ट्रीय ब्लड लाइन से जुड़ा है। उसकी मां ओलंपिक स्तर पर प्रदर्शन कर चुकी है और पिता विश्व चैंपियन रह चुके हैं।

बाईडेन को विशेष रूप से ड्रेसाज प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया गया है। ड्रेसाज घुड़सवारी की वह विधा है जिसमें घोड़े और घुड़सवार के बीच तालमेल, संतुलन, अनुशासन और सटीक मूवमेंट का परीक्षण होता है। इसे घुड़सवारी का सबसे तकनीकी और कलात्मक प्रारूप माना जाता है।

ब्लड लाइन तय करती है भविष्य और नौ साल की उम्र में परिपक्व प्रदर्शन

घुड़सवारी विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी स्पोर्ट्स हार्स का मूल्यांकन उसकी ब्लड लाइन से शुरू होता है। यदि माता-पिता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल रहे हों तो उनके गुण संतान में आने की संभावना अधिक रहती है। बाईडेन के साथ भी यही बात उसे खास बनाती है। उसकी मां ओलंपिक स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है, जबकि पिता विश्व चैंपियन रह चुके हैं। यही वजह है कि कम उम्र से ही उसे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया गया।

बाईडेन की उम्र करीब नौ वर्ष है, जिसे ड्रेसाज घोड़ों के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रतिस्पर्धी दौर माना जाता है। इस उम्र तक घोड़े का शारीरिक विकास लगभग पूरा हो जाता है और लगातार प्रशिक्षण के कारण वह जटिल मूवमेंट और कठिन तकनीकों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने लगता है।

घोड़े का व्यवहार और ऊर्जा स्तर परखकर ही अनुभवी घुड़सवार लेते हैं निर्णय

घुड़सवार घोड़ा खरीदते समय उसकी बनावट या रंग से ज्यादा उसके एनर्जी लेवल, मानसिक संतुलन, सीखने की क्षमता और प्रदर्शन के दौरान प्रतिक्रिया पर ध्यान दिया जाता है। घोड़े की चाल, कमांड पर प्रतिक्रिया, सहनशक्ति और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता ही उसकी असली कीमत तय करती है।

इसी कारण अनुभवी घुड़सवार पहले घोड़े का व्यवहार और ऊर्जा स्तर परखते हैं, उसके बाद ही खरीद का निर्णय लेते हैं। कंपनी ने सुदीप्ती का स्कोर देख कर बगैर 4 करोड़ लिए दे दिया था। हालांकि उसकी आनरशिप अपने पास रखी थी। सुदीप्ती गेम्स की तैयारी करने लगी थी।

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क्या होती है स्पूफिंग?

स्पूफिंग साइबर ठगी का ऐसा तरीका है, जिसमें ठग अपनी असली पहचान छिपाकर किसी भरोसेमंद व्यक्ति, संस्था या कंपनी की नकली पहचान बना लेते हैं, ताकि सामने वाला उन पर विश्वास कर ले। जैसे ई-मेल स्पूफिंग में ठग ऐसा ई-मेल भेजते हैं जो देखने में बैंक, कंपनी या किसी अधिकारी के आधिकारिक ई-मेल जैसा लगता है, जबकि वह फर्जी होता है।

इसी तरह कालर आइडी स्पूफिंग में मोबाइल पर बैंक, पुलिस या किसी परिचित का नंबर दिखाई देता है, लेकिन काल वास्तव में ठग कर रहे होते हैं। वेबसाइट स्पूफिंग में भी असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाकर लोगों से लागिन, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती है।

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