केप वर्डे: फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना के फ़ैंस की सांसें रोक देने वाले इस छोटे से मुल्क की ये हैं 6 ख़ासियतें

केप वर्डे: फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना के फ़ैंस की सांसें रोक देने वाले इस छोटे से मुल्क की ये हैं 6 ख़ासियतें

 अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी

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इमेज कैप्शन, अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी (बाएं ) को केप वर्डे के केविन पिना रोकने की कोशिश करते हुए

‘केप वर्डे फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में भले ही हार गया हो लेकिन ऐसा लगता है इस मैच का विजेता वही है.’

फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप फुटबॉल में अर्जेंटीना से आख़िरी पलों मे एक गोल से हारने के बाद बीबीसी के सीनियर फुटबॉल रिपोर्टर ईयान डेनिस की इस टिप्पणी से साफ़ है कि केप वर्डे ने पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रेमियों पर किस कदर अपनी छाप छोड़ी है.

निर्धारित 90 मिनट के खेल में अर्जेंटीना को बराबरी पर रोकने में कामयाब रहे केप वर्डे ने अर्जेंटीना के प्रशंसकों की सांसें लगभग रोक दी थी.

लेकिन मैच के 111वें मिनट में केप वर्डे के डाइनी बोर्गेस के ऑन गोल ने अर्जेंटीना को जिता दिया.

हालांकि इस साल के फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में केप वर्डे ने शुरू से ही चौंकाया है.

केप वर्डे की टीम पहली बार फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप खेल रही थी. यह फ़ीफ़ा रैंकिंग में 64वें स्थान पर है. लेकिन केप वर्डे दुनिया की दूसरे नंबर की टीम अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ मैच में एक समय दो-दो की बराबरी पर था.

फुटबॉल वर्ल्ड कप में छोटे से आइलैंड देश केप वर्डे ने स्पेन और उरुग्वे जैसे देशों को कड़ी चुनौती दी और नॉकआउट स्टेज में जगह बनाई. ये टीम ग्रुप स्टेज में एक भी मैच नहीं हारी.

केप वर्डे अफ़्रीका का छोटा सा द्वीप देश है, जिसकी आबादी महज पांच लाख से कुछ अधिक है.

केप वर्डे

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इमेज कैप्शन, केप वर्डे के समर्थक अपनी टीम के गोल दागने पर खुशी मनाते हुए

‘ब्लू शार्क्स’ के नाम से मशहूर केप वर्डे की टीम ने अपने क्वालिफाइंग ग्रुप में पहले स्थान पर पहुंच कर 2026 फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप का टिकट हासिल किया था.

केप वर्डे की टीम इससे पहले कभी भी फुटबॉल के सबसे बड़े टूर्नामेंट,फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में नहीं खेली थी.

पश्चिमी अफ़्रीका में सेनेगल के तट से 500 किलोमीटर से अधिक दूर अटलांटिक महासागर में बसे इस छोटे-से द्वीपसमूह के लिए यह उपलब्धि कभी एक असंभव सपना मानी जाती थी.

आइए, जानते हैं इस छोटे से मुल्क की 6 बड़ी ख़ासियतें-

1. पुर्तगालियों के आने तक यहां सिर्फ़ चमगादड़ों का बसेरा था

सिदादे वेल्हा

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इमेज कैप्शन, सैंटियागो द्वीप पर स्थित सिदादे वेल्हा. क्षेत्र का पहला यूरोपीय औपनिवेशिक शहर और केप वर्डे की पहली राजधानी

करीब 4,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले केप वर्डे में कुल दस द्वीप हैं, जिनमें से नौ पर आबादी रहती है.

यहां की एकमात्र स्थानीय प्रजाति ग्रे लॉन्ग-ईयर्ड बैट (धूसर लंबे कान वाला चमगादड़) है. प्राचीन काल से यही चमगादड़ इस द्वीप समूह में रहता था.

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, 1456 में यहां पहुंचने के बाद पुर्तगालियों ने दक्षिणी द्वीप सैंटियागो पर रिबेरा ग्रांड नामक बस्ती बसाई.

आज इस शहर का नाम सिदादे वेल्हा है. यह देश की राजधानी और सबसे बड़े शहर प्राया से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

पुर्तगालियों ने इन द्वीपों का नाम केप वर्डे अफ्रीकी मुख्यभूमि के सबसे निकट स्थित केप वर्डे प्रायद्वीप के नाम पर रखा.

आज इसी प्रायद्वीप पर सेनेगल की राजधानी डकार बसी हुई है.

2. अफ़्रीका और अमेरिका के बीच दास व्यापार का प्रमुख केंद्र

1856 के एक चित्रण में दिखाए गए केप वर्डे के निवासी

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इमेज कैप्शन, 1856 के एक चित्रण में दिखाए गए केप वर्डे के निवासी

अफ़्रीका और अमेरिका के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण 16वीं शताब्दी में केप वर्डे अटलांटिक पार होने वाले दास व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बन गया.

यह अमानवीय व्यापार तीन सौ वर्षों से भी अधिक समय तक चलता रहा.

अनुमान है कि हर वर्ष अफ़्रीका से लाए गए लगभग 3,000 गुलामों को केप वर्डे में यूरोप और अमेरिका भेजने के लिए बेचा जाता था.

इनमें से कुछ लोगों को केप वर्डे में ही रोक लिया जाता था, जहां उनसे नमक की खदानों और पुर्तगाल के लिए विकसित की जा रही कपास की शुरुआती खेती में काम कराया जाता था.

दास व्यापार की इस विरासत ने केप वर्डे की आबादी की संरचना पर गहरा प्रभाव डाला.

आज यहां की अधिकांश आबादी मिश्रित अफ़्रीका और यूरोपीय मूल (मुख्य रूप से पुर्तगाली) की है.

इसलिए, हालांकि पुर्तगाली यहां की आधिकारिक भाषा है, लेकिन अधिकांश लोग केप वर्डियन क्रियोल भी बोलते हैं.

यह पुर्तगाली और अफ़्रीकी भाषाओं के मेल से बनी भाषा है, जिसकी नौ बोलियां हैं.

हरेक आबाद द्वीप की अपनी अलग बोली है.

औपनिवेशिक शासन की छाप धर्म पर भी साफ दिखाई देती है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की द वर्ल्ड फैक्टबुक के मुताबिक़, देश की 72.5 फ़ीसदी आबादी कैथोलिक है.

3. पर्यटकों की पसंदीदा जगह

केप वर्डे का समुद्र तट

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इमेज कैप्शन, धूप, खूबसूरत समुद्र तटों और अन्य आकर्षणों की तलाश में हर साल पहले से अधिक पर्यटक केप वर्डे पहुंच रहे हैं

द्वीपों के बीच लंबी दूरी, सीमित जमीन और खेती योग्य जमीन की कमी और ज्वालामुखीय चट्टानों से ढके विशाल इलाके जैसे कारणों से पिछले साढ़े पांच सौ वर्षों में केप वर्डे की आबादी अपेक्षाकृत कम ही बढ़ी है.

इसका क्षेत्रफल अल सल्वाडोर के क्षेत्रफल के पांचवें हिस्से से भी कम है, जबकि अल सल्वाडोर लैटिन अमेरिका का सबसे छोटा देश है.

इसके अलावा, यहां की केवल करीब 11 फ़ीसदी जमीन ही खेती योग्य है.

विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक़, 2024 में केप वर्डे की आबादी लगभग 5.24 लाख थी.

इसके मुकाबले उसी वर्ष इस द्वीपसमूह में करीब 12 लाख पर्यटक आए, यानी पर्यटकों की संख्या देश की आबादी से दोगुने से भी अधिक थी.

वास्तव में, पर्यटन केप वर्डे की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार है.

अमेरिकी वाणिज्य विभाग समेत विभिन्न स्रोतों के मुताबिक़, देश के सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई है.

देश में रहने वाले केप वर्डे के नागरिकों की संख्या, विदेशों में बसे उनके लोगों (प्रवासी समुदाय) से भी कम है.

सरकार के 2023 के अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 20 लाख केप वर्डेवासी रहते हैं.

इनमें से अधिकांश पुर्तगाल और अमेरिका में बसे हैं.

हालांकि व्यापक और समग्र अध्ययनों के अभाव में इस अनुमान पर कुछ विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाए हैं.

4. अफ़्रीका के सबसे स्थिर लोकतंत्रों में से एक

सितंबर 2024 में अमिलकार काब्राल की जन्मशती के अवसर पर नस्लवाद और औपनिवेशिक विरासत के विरोध में केप वर्डे  के लोगों ने लिस्बन में मार्च निकाला.

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इमेज कैप्शन, सितंबर 2024 में अमिलकार काब्राल की जन्मशती के अवसर पर नस्लवाद और औपनिवेशिक विरासत के विरोध में केप वर्डे के लोगों ने लिस्बन में मार्च निकाला

1951 में पुर्तगाल ने केप वर्डे का दर्जा उपनिवेश से बदलकर विदेशी प्रांत कर दिया.

लेकिन यह बदलाव वहां के लोगों की वास्तविक स्वशासन और आजादी की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सका.

1950 और 1960 के दशक में अमिलकार काब्राल जैसे स्थानीय नेताओं ने गिनी-बिसाउ के स्वतंत्रता आंदोलन के साथ मिलकर पुर्तगाली शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष शुरू किया.

यह खूनी मुक्ति संग्राम अंततः 5 जुलाई 1975 को केप वर्डे की स्वतंत्रता के साथ समाप्त हुआ.

स्वतंत्रता के बाद 1990 तक केप वर्डे में एक-दलीय शासन व्यवस्था रही.

इसके बाद मूवमेंट फॉर डेमोक्रेसी (एमपीडी) के उभरने से बहुदलीय राजनीति का रास्ता खुला और जनवरी 1991 में देश में पहली बार बहुदलीय चुनाव आयोजित किए गए.

तब से केप वर्डे ने शांतिपूर्ण और स्थिर राजनीतिक व्यवस्था बनाए रखी है.

यहां सत्ता का हस्तांतरण लोकतांत्रिक तरीके से होता रहा है. देश की संस्थागत व्यवस्था में जनता द्वारा निर्वाचित राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय विधानसभा (संसद) और सर्वोच्च न्यायालय शामिल हैं.

सत्ता परिवर्तन की यह लोकतांत्रिक परंपरा 2021 में फिर मजबूत हुई, जब सेंटर-लेफ़्ट विपक्षी नेता जोस मारिया नेवेस ने राष्ट्रपति चुनाव जीता.

उनकी जीत के साथ सेंटर-राइट एमपीडी पार्टी के लगभग दस वर्षों के राजनीतिक वर्चस्व का अंत हुआ.

5. ना नदी ना झील, सिर्फ़ ज्वालामुखी

पिको दो फोगो

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इमेज कैप्शन, 15वीं सदी के बाद से पिको दो फोगो ज्वालामुखी में 28 बार विस्फोट दर्ज किए जा चुके हैं.

बेहद शुष्क जलवायु वाले केप वर्डे में न तो कोई नदी है न झील और न ही मीठे पानी का कोई बड़ा प्राकृतिक स्रोत.

इसलिए घरों तक पहुंचने वाला पीने का पानी पूरी तरह समुद्री जल को मीठा बनाने वाले डिसैलिनेशन प्लांट से आता है.

यहां बहुत कम बारिश होती है. सूखा अक्सर पड़ता है और कई बार वर्षों तक बना रहता है.

इसकी वजह से यहां फसलों की पैदावार बुरी तरह प्रभावित होता रही है और खाद्यान्न संकट भी पैदा हुआ है.

ज्वालामुखीय गतिविधियों से बने इस द्वीपसमूह का अधिकांश भूभाग ऊबड़-खाबड़, शुष्क और खेती के लिए प्रतिकूल है.

साल, बोआ विस्टा और मायो जैसे कुछ द्वीप समतल हैं और रेत के टीलों से ढके हुए हैं, जबकि सैंटो अंताओ और साओ निकोलाउ जैसे द्वीप ऊंची चट्टानों और खड़ी ढलानों के लिए प्रसिद्ध हैं.

देश का सबसे ऊंचा स्थान पिको दो फोगो है, जिसकी ऊंचाई 2,829 मीटर है. यही केप वर्दे का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी भी है.

इस ज्वालामुखी का सबसे हालिया विस्फोट नवंबर 2014 से फरवरी 2015 के बीच हुआ था. ढाई सौ वर्षों में यह सबसे लंबा ज्वालामुखी विस्फोट था.

इसके गंभीर परिणाम सामने आए. कई गांव पूरी तरह तबाह हो गए, करीब 1,000 लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा.

6. संगीत परंपरा: सेजारिया एवोरा का ‘मोर्ना’ और ‘फुनाना’

सेजारिया एवोरा

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इमेज कैप्शन, सेजारिया एवोरा केप वर्डे के इतिहास की सबसे प्रसिद्ध और सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय पहचान पाने वाली कलाकार हैं

केप वर्दे अपनी अनूठी संगीत परंपरा के लिए भी जाना जाता है.

यहां के दो प्रमुख पारंपरिक संगीत रूप मोर्ना और फुनाना हैं.

विश्वविख्यात गायिका सेजारिया एवोरा ने अपने मधुर ‘मोर्ना’ गायन के जरिए केप वर्दे के संगीत को पूरी दुनिया में पहचान दिलाई.

केप वर्दे में पारंपरिक संगीत वहां के लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है.

यह न केवल सार्वजनिक उत्सवों, बल्कि पारिवारिक समारोहों में भी पूरे उत्साह के साथ गूंजता है.

यहां का सबसे प्रमुख संगीत रूप मोर्ना है.

2019 में यूनेस्को ने इसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया था.

धीमी लय और भावपूर्ण उदासी से भरपूर मोर्ना में ‘साउदादे’ की भावना झलकती है.

यह अपने वतन या प्रियजनों से बिछड़ने की कसक और गहरे लगाव को व्यक्त करता है, खासकर उन लोगों की भावनाओं को, जो अपने देश से दूर विदेशों में रहते हैं.

इसमें गिटार, कावाकिन्यो (एक छोटा तार वाला वाद्य), वायलिन और हल्के तालवाद्यों का प्रयोग किया जाता है.

मोर्ना को दुनिया भर में पहचान दिलाने का सबसे बड़ा श्रेय महान गायिका सेजारिया एवोरा (1941–2011) को जाता है.

‘नंगे पांव वाली दिवा’ के नाम से मशहूर एवोरा ने इस संगीत शैली को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंचों तक पहुंचाया.

केप वर्डे की दूसरी प्रमुख पारंपरिक संगीत शैली फुनाना है. इसकी पहचान तेज़, जोशीली और नृत्य के अनुकूल लय से होती है.

इसमें मुख्य रूप से अकॉर्डियन और फेरिन्हो (लोहे की छड़ को रगड़कर बजाया जाने वाला ताल वाद्य) का इस्तेमाल किया जाता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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