अलर्ट: अब साइबर ठगी सिर्फ मोबाइल तक ही नहीं, ई-वाहनों तक भी पहुंची

अलर्ट: अब साइबर ठगी सिर्फ मोबाइल तक ही नहीं, ई-वाहनों तक भी पहुंची

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। साइबर अपराध अब केवल बैंक खाते, यूपीआई और मोबाइल फोन तक सीमित नहीं रहा। इंटरनेट और ब्लूटूथ आधारित स्मार्ट इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के बढ़ते उपयोग के साथ अब साइबर ठगों की नजर ई-वाहनों पर भी है।

उज्जैन और ग्वालियर समेत देश के कई शहरों में ई-रिक्शा के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) से कथित छेड़छाड़ कर वाहन रोकने और चालकों से रुपये वसूलने जैसे मामले सामने आने के बाद ई-वाहनों की साइबर सुरक्षा पर गंभीर बहस शुरू हो गई है। इस बीच केंद्र सरकार ने बीएटी-बीएमएस जैसे मोबाइल एप को ऐप स्टोर से हटाने की कार्रवाई की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होगा। असली चुनौती ई-वाहनों के डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित बनाने की है।

बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन का डिजिटल कंट्रोल सेंटर होता है। यह बैटरी का तापमान, वोल्टेज, चार्जिंग, डिस्चार्जिंग और प्रत्येक सेल की कार्यप्रणाली पर नजर रखता है। कई आधुनिक ई-रिक्शा, दोपहिया और अन्य ई-वाहनों में यह सिस्टम ब्लूटूथ और मोबाइल एप से जुड़ा होता है, जिससे चालक मोबाइल पर बैटरी की स्थिति देख सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस सिस्टम में मजबूत पासवर्ड, एन्क्रिप्शन और सुरक्षित ऑथेंटिकेशन नहीं हो तो ब्लूटूथ रेंज (करीब 10 से 15 मीटर) में मौजूद कोई व्यक्ति उससे जुड़ने का प्रयास कर सकता है। यदि उसे एक्सेस मिल जाए तो बैटरी की डिस्चार्ज सेटिंग बदलकर वाहन को रोकना या उसकी कार्यप्रणाली प्रभावित करना संभव हो सकता है।

हाल के मामलों ने यह भी स्पष्ट किया है कि खतरा केवल ई-रिक्शा तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे इंटरनेट और सॉफ्टवेयर आधारित दोपहिया, कारें और कमर्शियल ईवी बढ़ेंगे, वैसे-वैसे साइबर हमलों का जोखिम भी बढ़ेगा। वाहन के डिजिटल सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच मिलने पर उसे बीच रास्ते रोकना, डिजिटल फिरौती (रैनसम) मांगना, बैटरी सेटिंग से छेड़छाड़ करना या वाहन संचालन बाधित करना संभव हो सकता है। इससे चालक की आजीविका के साथ सड़क सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है।

हालांकि राहत की बात यह है कि सभी ई-वाहन इस जोखिम की जद में नहीं हैं। जिन वाहनों में पारंपरिक लेड-एसिड बैटरी लगी है या जिनके बीएमएस में मजबूत सुरक्षा, एन्क्रिप्शन और कंपनी आधारित प्रमाणीकरण मौजूद है, उनमें ऐसी आशंका काफी कम मानी जाती है। जोखिम मुख्य रूप से उन वाहनों में अधिक है, जिनमें ब्लूटूथ आधारित बीएमएस है और जिनकी सुरक्षा सेटिंग कमजोर है या डिफाल्ट पासवर्ड नहीं बदला गया है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि बीएटी-बीएमएस एप पर प्रतिबंध केवल तत्काल राहत का कदम है। यदि किसी वाहन के डिजिटल सिस्टम में सुरक्षा खामी बनी रहती है तो भविष्य में कोई दूसरा एप या टूल भी उसी कमजोरी का फायदा उठा सकता है। इसलिए समाधान किसी एक एप को हटाने में नहीं, बल्कि सुरक्षित साफ्टवेयर डिजाइन, मजबूत एन्क्रिप्शन, नियमित फर्मवेयर अपडेट और साइबर सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाने में है। दुनिया के कई देशों में पहले भी इंटरनेट आधारित वाहनों की सुरक्षा कमजोरियां सामने आ चुकी हैं। इसके बाद आटोमोबाइल उद्योग में व्हीकल साइबर सिक्योरिटी को अलग सुरक्षा मानक के रूप में विकसित किया गया।

इंदौर के साइबर विशेषज्ञ चातक वाजपेई के अनुसार आज की इलेक्ट्रिक गाड़ियां केवल वाहन नहीं, बल्कि पहियों पर चलती कंप्यूटर डिवाइस हैं। साइबर अपराधी अब लोगों के बैंक खातों के साथ उनकी रोजमर्रा की कमाई और आवाजाही को भी निशाना बना रहे हैं। उनके अनुसार वाहन खरीदते ही डिफाल्ट पासवर्ड बदलना, केवल अधिकृत मोबाइल एप का उपयोग करना और स्थानीय स्तर पर साफ्टवेयर में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ से बचना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि बीएमएस से छेड़छाड़ केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बैटरी ओवरहीट होने, आग लगने या गंभीर दुर्घटना का खतरा भी पैदा हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वाहन खरीदते समय माइलेज, बैटरी क्षमता और सुरक्षा फीचर के साथ साइबर सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मानदंड होगी। जिस तरह सड़क सुरक्षा के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट जरूरी हैं, उसी तरह स्मार्ट ई-वाहनों के दौर में डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक हो जाएगी।

कैसे काम करता है बीएमएस?

  • बैटरी के तापमान और वोल्टेज की निगरानी करता है।
  • चार्जिंग और डिस्चार्जिंग नियंत्रित करता है।
  • प्रत्येक बैटरी सेल की स्थिति पर नजर रखता है।
  • कई मॉडलों में ब्लूटूथ और मोबाइल एप से जुड़ा होता है।
  • बैटरी की सुरक्षा और प्रदर्शन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्या हो सकता है नुकसान?

  • चलते वाहन का अचानक रुक जाना।
  • चालक की आजीविका प्रभावित होना।
  • डिजिटल फिरौती (रैनसम) की आशंका।
  • बैटरी ओवरहीटिंग, तकनीकी खराबी या आग का खतरा।
  • भविष्य में अन्य स्मार्ट ई-वाहनों पर भी ऐसे साइबर हमलों की संभावना।

क्या आपका ई-वाहन सुरक्षित है?

  • वाहन का डिफाल्ट पासवर्ड बदलें।
  • जरूरत न हो तो ब्लूटूथ बंद रखें।
  • केवल अधिकृत मोबाइल एप का उपयोग करें।
  • कंपनी के फर्मवेयर और सुरक्षा अपडेट समय पर इंस्टाल करें।
  • स्थानीय मैकेनिक से साफ्टवेयर में छेड़छाड़ न कराएं।
  • किसी भी असामान्य व्यवहार पर तुरंत अधिकृत सर्विस सेंटर से संपर्क करें।

साइबर ठगी की जांच पर हाई कोर्ट सख्त, एसपी-टीआई व विवेचक को केस डायरी सहित किया तलब

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