Indore News: कोविड के बाद जटिल होती गई फेफड़ों की बीमारियां, अब AI और नई तकनीकें उम्मीदें जगा रही

Indore News: कोविड के बाद जटिल होती गई फेफड़ों की बीमारियां, अब AI और नई तकनीकें उम्मीदें जगा रही

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शनिवार से चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 की मुख्य कॉन्फ्रेंस का औपचारिक शुभारंभ हो चुका है। इस महत्वपूर्ण चिकित्सा सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशों से भी बड़ी संख्या में पल्मोनोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, थोरासिक सर्जन, मेडिकल रिसर्चर और युवा चिकित्सक हिस्सा लेने पहुंचे हैं। आयोजन के पहले दिन फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के आधुनिक उपचार, नवीन शोध कार्यों और चिकित्सा क्षेत्र की उन्नत तकनीकों पर दुनियाभर से आए विशेषज्ञों ने अपने गहरे अनुभव साझा किए। इस वैश्विक स्तर की कॉन्फ्रेंस में अब तक 700 से अधिक प्रतिभागियों ने अपना पंजीयन कराया है।

पल्मोनरी मेडिसिन और आधुनिक तकनीकों पर गहन मंथन

कॉन्फ्रेंस के प्रथम दिवस पर पल्मोनरी मेडिसिन, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर, स्लीप मेडिसिन, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, थोरासिक सर्जरी और रेस्पिरेटरी रिसर्च जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित कई साइंटिफिक सेशंस आयोजित किए गए। इन सत्रों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों के निदान व उपचार में आ रहे नए बदलावों, आधुनिक तकनीकों और अपने क्लिनिकल अनुभवों को उपस्थित प्रतिभागियों के साथ साझा किया। इस प्रतिष्ठित कॉन्फ्रेंस का विधिवत इनोग्रेशन पहले दिन इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन सुरेश सिंह भदोरिया, डॉ राजेंद्र प्रसाद एवं डॉ अतुल सी मेहता द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

युवा चिकित्सकों का शोध प्रदर्शन और क्विज प्रतियोगिता

इस आयोजन में देश के अलग-अलग राज्यों से आए श्वसन रोग विभाग के 100 से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों ने अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। इसके साथ ही, 30 से अधिक टीमों ने पोस्ट ग्रेजुएट क्विज प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी एकेडमिक व क्लिनिकल जानकारी का बेहतरीन प्रदर्शन किया। रिसर्च पेपर और पोस्टर प्रेजेंटेशन, क्लिनिकल केस डिस्कशन तथा वैज्ञानिक संवाद के माध्यम से युवा चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीधे सीखने और अपने शोध कार्यों को प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त हुआ।

डॉ अतुल सी मेहता को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

कॉन्फ्रेंस में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव एवं अन्य देशों की अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, पद्मश्री सम्मानित विशेषज्ञ और देश के वरिष्ठ चिकित्सकों ने विभिन्न साइंटिफिक सेशंस को संबोधित किया। इस विशेष सत्र के दौरान चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले और यूएस में अपना लोहा मनवा चुके डॉ अतुल सी मेहता को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, विशेषज्ञों ने फेफड़ों की बीमारियों के इलाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीक, इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं और मरीज केंद्रित उपचार पद्धतियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की।

जीवनशैली में बदलाव और प्रदूषण से बढ़ रही फेफड़ों की बीमारियां

कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी प्रो. डॉ. रवि डोसी ने स्वास्थ्य चिंताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बदलती जीवनशैली, बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और एलर्जी वर्तमान में फेफड़ों की बीमारियों के प्रमुख कारण बन रहे हैं। यही वजह है कि अस्थमा, सीओपीडी, फेफड़ों का संक्रमण और लंग कैंसर जैसी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि समय पर जांच, शुरुआती पहचान और आधुनिक उपचार से इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। अगर लक्षणों की सही समय पर जांच कर उपचार प्राप्त हो जाए तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को भी हराना संभव है। धूम्रपान से दूरी, स्वच्छ वातावरण, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, टीकाकरण और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।

चिकित्सा शिक्षा और शोध को मिलेगी नई दिशा

डॉ डोसी ने आगे बताया कि कॉन्फ्रेंस के पहले दिन साइंटिफिक सेशंस में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों की उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिली। विभिन्न विषयों पर हुए गहन विचार-विमर्श से चिकित्सकों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक उपचार पद्धतियों को समझने का अवसर मिला है। कोविड के बाद उत्पन्न होने वाली श्वसन संबंधी जटिलताओं, टीबी के बाद फेफड़ों पर पड़ने वाले प्रभाव तथा पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और वैज्ञानिक उपचार आज के समय की बड़ी आवश्यकता है। वहीं ब्रोंकोस्कोपी एवं नेविगेशन तकनीकों में हो रहे नवाचार फेफड़ों की बीमारियों के सटीक निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बड़ी संख्या में पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों ने अपने शोध प्रस्तुत किए और क्विज प्रतियोगिता में भी उत्साह के साथ भाग लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों की बेहतर देखभाल को नई दिशा देते हैं। कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन भी वैज्ञानिक सत्र, क्लिनिकल केस डिस्कशन, विशेषज्ञ व्याख्यान और रिसर्च प्रेजेंटेशन जारी रहेंगे, जिनमें देश और विदेश के विशेषज्ञ फेफड़ों की बीमारियों के उपचार से जुड़े नवीनतम शोध और अनुभव साझा करेंगे।

Source link
#Indore #News #कवड #क #बद #जटल #हत #गई #फफड #क #बमरय #अब #और #नई #तकनक #उममद #जग #रह

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *