इमेज स्रोत, DCPC, Bangluru East
(इस कहानी के कुछ ब्योरे आपको विचलित कर सकते हैं)
बेंगलुरु के एक क्रेच में अमानवीय व्यवहार से पीड़ित बच्चों में मानसिक परेशानियों की आशंका सामने आई है.
कम से कम एक अभिभावक ने बताया है कि डे-केयर सेंटर के केयरगिवर्स की कथित प्रताड़ना की वजह से उनकी बेटी ‘मानसिक सदमे’ से गुज़र रही है.
इस मामले में बेंगलुरु पुलिस ने शनिवार को दूसरी गिरफ़्तारी की. पुलिस उन तीन बच्चों के अभिभावकों के बयान दर्ज कर रही है, जो डे-केयर सेंटर में कथित प्रताड़ना के दौरान बनाए गए वीडियो में ज़ोर-ज़ोर से रोते हुए दिखाई दिए थे.
बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “एक अभिभावक ने अपनी बच्ची के व्यवहार में बदलाव की बात कही है. हमने दो अन्य अभिभावकों के भी बयान दर्ज किए हैं. लेकिन बाकी 32 छोटे बच्चों के सभी अभिभावक अभी तक पुलिस के सामने बयान दर्ज कराने नहीं आए हैं.”
बच्ची के अभिभावकों ने पुलिस को बताया कि जब भी वे उसे बाथरूम ले जाते थे, वह “मानसिक सदमे की स्थिति में चली जाती थी.”
अपने बच्चे के वीडियो देखने के बाद ही उन्हें समझ आया कि घर पर उसके इस मानसिक आघात की वजह क्या थी.
सीमांत कुमार सिंह ने कहा, “बच्चे बहुत छोटे हैं. डे-केयर सेंटर में सिर्फ़ एक से तीन साल की उम्र के बच्चों को ही रखा जाता है. और उन्हें भी महीने में सिर्फ़ 12 दिन डे-केयर सेंटर में छोड़ा जाता है, जब उनकी मांएं दफ़्तर में काम करने आती हैं. बाकी दिनों में वे वर्क फ़्रॉम होम करती हैं.”
नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर एक अन्य अधिकारी ने बताया कि वीडियो में एक दूसरी बच्ची इसलिए बुरी तरह रो रही थी क्योंकि वह डे-केयर सेंटर में इस्तेमाल होने वाले वेस्टर्न कमोड की आदी नहीं थी.
एक बच्चे के अभिभावक ने बताया कि डे-केयर सेंटर से घर लाने के बाद उनमें किसी तरह की परेशानी नहीं देखी गई.
दूसरी गिरफ़्तारी

इस बीच पुलिस ने डे-केयर सेंटर की एक दूसरी केयरगिवर को भी गिरफ़्तार कर लिया है. लंबी पूछताछ के बाद सुजाता को गिरफ़्तार किया गया.
सुजाता वही महिला हैं जिन्हें पिछले महीने डे-केयर सेंटर की नौकरी से निकाल दिया गया था. हालांकि, उन्हें नौकरी से हटाए जाने की सही वजह अब तक सामने नहीं आई है.
पुलिस को अब पता चला है कि सुजाता ने प्रताड़ना के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर साझा किए थे. इसके अलावा उन्होंने एक वीडियो ख़ुद भी बनाया था.
ये सभी कृत्य सूचना प्रौद्योगिकी क़ानून (आईटी एक्ट) का उल्लंघन हैं. एक व्यक्ति ने चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर पर गुमनाम फ़ोन किया था, जिसके बाद ये वीडियो बेंगलुरु ईस्ट ज़िला बाल संरक्षण इकाई को भेजे गए थे.
इस फ़ोन कॉल के बाद बाल संरक्षण इकाई के क़ानूनी अधिकारी ने ज़्यादा जानकारी मांगी और वीडियो देखे.
पुलिस पहले ही विजयलक्ष्मी को गिरफ़्तार कर चुकी है क्योंकि “उनकी भूमिका बिल्कुल साफ़ थी.” उन्होंने रो रहे बच्चे की देखभाल करने की अपनी ज़िम्मेदारी पूरी नहीं की.
महिला आईपीएस अधिकारी और डीसीपी मोहम्मद सुजीथा की अगुवाई वाली पुलिस टीम सिंधु और बिंदु से भी पूछताछ कर चुकी है और उनके बयान दर्ज कर लिए गए हैं.
वीडियो में यही दोनों महिलाएं उस बच्चे की देखभाल करती हुई दिखाई देती हैं, जिसे सिर्फ़ भारतीय शैली के कमोड का इस्तेमाल करने की आदत थी.
हालांकि, पुलिस अब भी डे-केयर सेंटर की सुपरवाइज़र मंजुला की तलाश कर रही है, जो इस सेंटर की पांचवीं महिला हैं.
पुलिस ने आउटसोर्स डे-केयर सेंटर के मालिक को पूछताछ के लिए पेश होने का नोटिस जारी किया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक़, मालिक इस समय ऑस्ट्रेलिया में हैं.
आईटी कंपनी का बयान
आईटी कंपनी कैपजेमिनी के परिसर में कर्मचारियों की सुविधा के लिए यह क्रेच संचालित होता है. कंपनी ने इस मामले में दूसरा बयान जारी किया है.
बयान के अनुसार, “हमारे डे-केयर सेवा देने वाले की सख़्त जांच की जाती है. ये सुविधाएं हमारे उन कर्मचारियों की मदद के लिए हैं, जो अपने बच्चों की ज़िम्मेदारी इन केंद्रों को सौंपते हैं. यह हमारे टीम सदस्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का अहम हिस्सा है.”
कंपनी ने प्रभावित परिवारों के लिए ‘एम्प्लॉई असिस्टेंस प्रोग्राम के तहत डेडिकेटेड काउंसलिंग और ज़रूरत के मुताबिक़ वर्क फ़्रॉम होम का लचीला विकल्प’ देने का एलान किया है.
कंपनी ने कहा है कि वह भारत में अपनी सभी इकाइयों में मौजूद सभी डे-केयर सेवा देने वालों की दोबारा समीक्षा कर रही है.

क्या है पूरा मामला
यह मामला तब सामने आया जब चाइल्ड हेल्पलाइन को एक फ़ोन आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि दो-तीन साल से कम उम्र के बच्चों के साथ बुरा व्यवहार किया जा रहा था.
बेंगलुरु पूर्व ज़िला बाल संरक्षण इकाई के लॉ ऑफ़िसर तिलकेश कुमार ने बीबीसी न्यूज हिन्दी को यह जानकारी दी थी.
उन्होंने कहा, “हमने शिकायतकर्ता से और जानकारी साझा करने को कहा और हमें वीडियो मिले.”
इसके बाद उसी शिकायत को पुलिस ने प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ़आईआर) के रूप में दर्ज कर लिया.
वीडियो में एक कमरे के फ़र्श पर बैठे कुछ बच्चे रोते हुए दिखाई दे रहे हैं. इसके बाद टॉयलेट में उन पर जेट स्प्रे से पानी डाला जा रहा है. वीडियो में बच्चों को वॉशिंग मशीन के ड्रम में डालते हुए भी देखा जा सकता है.
तिलकेश कुमार ने पुष्टि की कि शुरुआती शिकायत एक पूर्व कर्मचारी ने की थी, जिसे कथित तौर पर नौकरी से निकाल दिया गया था.
पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है. आरोप है कि वे बच्चों को वॉशिंग मशीन के अंदर डाल देती थीं और उनके मुंह में शौचालय के जेट स्प्रे से पानी डालती थीं.
यह डे-केयर क्रेच बेंगलुरु पूर्व में आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनी कैपजेमिनी के कर्मचारियों के लिए आउटसोर्स की गई सुविधा थी.
कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह फिलहाल इस क्रेच को अस्थायी रूप से बंद कर रही है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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