पश्चिम बंगाल: मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य करने वाले आदेश पर क्या बोला विपक्ष?

पश्चिम बंगाल: मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य करने वाले आदेश पर क्या बोला विपक्ष?

वारिस पठान और हुमायूं कबीर

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, वारिस पठान और हुमायूं कबीर ने वंदे मातरम गाना अनिवार्य करने के आदेश का विरोध किया है

प्रकाशित

पढ़ने का समय: 6 मिनट

पश्चिम बंगाल में मदरसों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर दिया गया है. राज्य में इसी महीने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पहली बार सत्ता में आई है.

देश भर से इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. इस आदेश का कई मुस्लिम नेताओं की ओर से ख़ास विरोध हो रहा है.

कुछ दिन पहले राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल के स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर दिया था.

पश्चिम बंगाल में 19 मई को राज्य भर के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य करने के सरकारी आदेश जारी किए गए हैं. विपक्षी पार्टियों ने इस कदम को ‘मनमाना’ और ‘देश की बहुलवादी संस्कृति को कमज़ोर करने की कोशिश’ बताया.

पश्चिम बंगाल सरकार में मदरसा शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किया है.

इस आदेश में कहा गया है कि मदरसा शिक्षा से जुड़े सारे पुराने आदेश रद्द किए जाते हैं और राज्य के हर मदरसे में पढ़ाई शुरू होने से पहले वंदे मातरम गाना अनिवार्य होगा.

मुस्लिम धर्मगुरुओं और नेताओं ने क्या कहा

वारिस पठान कोट कार्ड

वंदे मातरम गीत बंकिम चंद्र चटर्जी ने साल 1875 में लिखा था, जो बांग्ला और संस्कृत में था. यह गीत बाद में बंकिम चंद्र चटर्जी ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘आनंदमठ’ (1885) में जोड़ दिया.

इस गीत में उन्होंने सात करोड़ जनता का भी उल्लेख किया है जो उस समय बंगाल प्रांत (जिसमें ओडिशा-बिहार शामिल थे) की कुल आबादी थी. इसी तरह जब अरबिंदो घोष ने इसका अनुवाद किया तो इसे ‘बंगाल का राष्ट्रगीत’ का टाइटल दिया.

ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइज़ेशन के मुख्य इमाम, डॉक्टर उमर अहमद इल्यासी का कहना है, “चाहे मामला ‘वंदे मातरम’ का हो या ‘मादरे वतन ज़िंदाबाद’ का, दोनों का भाव देशभक्ति और भारत की महिमा करना ही है. इस्लाम में, पूजा और आराधना केवल ईश्वर के लिए की जाती है, इसलिए कुछ लोग ‘वंदे मातरम’ के बजाय ‘मादरे वतन ज़िंदाबाद’ कहते हैं.”

“हिंदू संस्कृत में ‘वंदे मातरम’ कहते हैं, और मुसलमान उर्दू में ‘मादरे वतन ज़िंदाबाद’ कहते हैं, लेकिन भाव एक ही है. यह राष्ट्र का गीत है, और इस मुद्दे पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए.”

शुभेंदू अधिकारी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, शुभेंदू अधिकारी ने इसी महीने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की शपथ ली है (फ़ाइल फ़ोटो)

पश्चिम बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाने के आदेश पर, कोलकाता ख़िलाफ़त कमेटी के प्रमुख मोहम्मद अशरफ अली कासमी ने इसे मुसलमानों के ख़िलाफ़ बताया है.

उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “मैंने पहले भी कहा था कि सरकार को किसी भी धर्म के आधार पर काम नहीं करना चाहिए. हम यह नहीं कहते कि ‘वंदे मातरम’ नहीं गाया जाना चाहिए, लेकिन इसे मुसलमानों पर थोपना गलत है.”

“क्योंकि इस गीत की कुछ पंक्तियाँ हमारे धर्म के विरुद्ध हैं… हम पश्चिम बंगाल सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह इस फैसले को वापस ले. हम बहुत स्पष्ट रूप से कहते हैं कि हम इसी देश में रहते हैं और हम इससे प्यार करते हैं, लेकिन हम इस देश की पूजा नहीं करते. मुसलमान केवल और केवल अल्लाह की इबादत करते हैं.”

एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान कहना है, “हम सभी ‘वंदे मातरम’ का आदर करते हैं, सम्मान करते हैं. लेकिन, संविधान हमें अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और धार्मिक स्वतंत्रता देता है… ‘वंदे मातरम’ में कुछ ऐसी पंक्तियाँ हैं जिसे बोलने की अनुमति इस्लाम नहीं देता है. हम केवल अल्लाह की वंदना करते हैं. हमारा विश्वास है कि ईश्वर केवल एक ही है.”

“जब गन गण मन पढ़ा जाता है तो दिल खोलकर हम पढ़ते हैं, हम खुशी-खुशी पढ़ते हैं, हम गर्व से पढ़ते हैं. हम गर्व से कहते हैं कि हम भारतीय मुसलमान हैं. मगर इस तरह से अब नहीं पढ़ा तो एंटी नेशनल- यह सरासर ग़लत है.”

विपक्षी दलों का विरोध

सुजन चक्रवर्ती कोट

सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में हो रही “गिरावट” से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है, जबकि राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने मदरसा शिक्षा निदेशालय के इस आदेश को “ग़लत” बताया.

सुजन चक्रवर्ती ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को तबाह कर दिया है. इस सरकार की पहली प्राथमिकता शिक्षा के क्षेत्र को फिर से खड़ा करना होना चाहिए. लेकिन प्रशासन को इस बात में ज़्यादा दिलचस्पी है कि स्कूलों की असेंबली में कौन सा गाना गाया जाए. इससे उनकी मंशा साफ़ ज़ाहिर होती है कि वे लोगों को भड़काना चाहते हैं, न कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना.”

उनका कहना है, “मुसलमानों के शिक्षा प्रतिष्ठान में कोई वंदे मातरम नहीं होना चाहिए. मदरसों में सरकार का कोई योगदान नहीं है. वे मुसलमानों के पैसे से चल रहे हैं. मदरसों को इस तरह का आदेश देने का सरकार को कोई अधिकार नहीं है.”

क्या कह रहे हैं बीजेपी नेता

किया घोष कोट कार्ड

बीजेपी नेता और पार्टी प्रवक्ता कीया घोष ने कहा, “वंदे मातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है. इसलिए इसे हर जगह गाया जाना चाहिए. फिर इस पर इतना मतभेद क्यों है? जो लोग भारत माता की वंदना से मना करते हैं उन्हें तो भारत में रहने का कोई अधिकार ही नहीं है. अगर आप भारत में रहते हैं, तो आपको वंदे मातरम गाना ही होगा…”

सरकार के इस आदेश के बाद बीजेपी विधायक विजय ओझा ने कहा, “जब इसे ज़रूरी किया गया है तो मदरसे कौन से भारत से बाहर हैं. आज़ादी के समय हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई सभी वंदे मातरम बोलते थे. ये सारा राजनीतिक षडयंत्र के नाते एक-दूसरे के अंदर दुश्मनी पैदा करने के लिए हो रहा है. वंदे मातरम हर भारतवासी के लिए पूज्य है.”

इस मुद्दे पर बीजेपी नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा है, “मैं समझता हूं कि वंदे मातरम को लेकर किसी को भी किसी भी तरह से सांप्रदायिकता का माहौल नहीं पैदा करना चाहिए. जो लोग वंदे मातरम को लेकर सांप्रदायिक, असहिष्णुता, अनटचेबिलिटी और इंटॉलरेंस का माहौल पैदा करना चाहते हैं, वो देश के सौहार्द के माहौल को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे लोगों को सफल नहीं होने देना है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

Source link
#पशचम #बगल #मदरस #म #वद #मतरम #क #अनवरय #करन #वल #आदश #पर #कय #बल #वपकष

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *