इंदौर में हुई 13 इंच बारिश ने बोरिंगों को तो रिचार्ज कर दिया है, लेकिन अभी भी शहरवासियों को जलसंकट झेलना पड़ रहा है। नलों में जो पानी रोज सप्लाई हो रहा है, वह ज्यादातर इलाकों में साफ नहीं आ रहा है। पानी में मटमैलापन है और कई परिवार पानी को गर्म करके पी रहे हैं, ताकि पानी के कारण बीमारी न हो। उधर, भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड के बाद नगर निगम के अफसर भी इस बार गंदे पानी की समस्या को लेकर ज्यादा सतर्क हैं और रोज पानी के सैंपलों की संख्या बढ़ा दी है।
इंदौर के सुखलिया ग्राम, खातीपुरा, परदेशीपुरा, बाणगंगा, जनता कॉलोनी सहित कई इलाकों में नलों में गंदा पानी आ रहा है। इसके अलावा राजवाड़ा और आसपास के इलाकों में नर्मदा लाइन पुरानी हो चुकी है और वहां नालियां भी खुली हैं। इस कारण वहां भी नलों से मटमैले पानी की सप्लाई हो रही है। नगर निगम कंट्रोल रूम और निगम के 311 एप पर भी रोज सैकड़ों की संख्या में लोग गंदे पानी की शिकायतें कर रहे हैं।
निगम ने सर्वे शुरू किया
शहर में जिन इलाकों में पानी गंदा आ रहा है, वहां एनजीओ के माध्यम से नगर निगम ने सर्वे शुरू किया है। कर्मचारियों की टीम घरों में जाकर पानी की सप्लाई से जुड़ी जानकारी ले रही है। उन इलाकों पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है, जहां नर्मदा लाइन और ड्रेनेज लाइन पास-पास बिछाई गई हैं।
दरअसल, शहर के नए इलाकों में ड्रेनेज लाइन सड़क किनारे है, जबकि पुराने इलाकों में गंदे पानी के लिए बैकलेन बनी हुई है और वहां से पानी चैंबरों में जाता है। अफसरों का कहना है कि कई बार हौज का पानी लाइनों में चला जाता है और वह लाइनों में भरा रहता है। दूसरे दिन सप्लाई के समय वही पानी नलों में आता है। जनकार्य समिति प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू ने कहा कि गंदे पानी की शिकायतें आ रही हैं। इस कारण कई इलाकों में अभी भी टैंकरों से सप्लाई जारी है। किराए के टैंकर धीरे-धीरे बंद किए जाएंगे।
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