इंदौर में तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया है। इस भीषण गर्मी में लोगों घरों से बाहर निकलने में घबरा रहे है। ऐसे में वन्यप्राणियों की हालात खराब हो रही है …और पढ़ें

HighLights
- रालामंडल, पीटीएस, रेसींडेंसी सहित अन्य जगहों की चिन्हित, वनरक्षकों को दी जिम्मेदारी
- अकेले इंदौर शहर में पंद्रह स्थानों को चिन्हित किया गया है
- सकोरे में पानी रखा जा रहा है, साथ ही ज्वार और मक्का के दाने भी दिए जा रहे हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मोरों को गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाने को लेकर वन विभाग जगह-जगह दाना-पानी की व्यवस्था करने में लगा है। अकेले इंदौर शहर में पंद्रह स्थानों को चिन्हित किया गया है। जहां मोरों की संख्या सबसे ज्यादा है। इन स्थानों पर सकोरे में पानी रखा जा रहा है। साथ ही ज्वार और मक्का के दाने भी दिए जा रहे है।
रालामंडल, रेसीडेंसी एरिया, हुकुमचंद मिल, बाणगंगा, पीटीएस सहित पंद्रह स्थान है। जबकि मानपुर में भी कुछ स्थानों पर मोरों को गर्मी से राहत देने को लेकर व्यवस्था जुटाई जा रही है। मगर महू और चोरल में अभी तक दाना-पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिम्मेदारों से पूछने पर बजट के अभाव का राग अलाप रहे है।
इंदौर जिले का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इस भीषण गर्मी में लोगों घरों से बाहर निकलने में घबरा रहे है। ऐसे में वन्यप्राणियों की हालात खराब हो रही है, क्योंकि जंगल में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं है। यहां तक कि तालाब भी सूखने लगे हैं। ऐसे में इंदौर और रालामंडल रेंज मोरो को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने में लगा है।
जिम्मेदारी वनरक्षकों को दी गई है
रोजाना सुबह-शाम चिन्हित स्थानों पर सकोरे में पानी भरा जाता है। यह जिम्मेदारी वनरक्षकों को दी गई है। डेढ़ महीने में कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में एक भी मोरो के डिहाइड्रेशन का मामला सामने नहीं आया है। साथ ही वन विभाग ने दो से तीन मोरो को बीमार महू पशु चिकित्सालय में इलाज के लिए भेजा है।
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