एमपी के बड़े शहर शिक्षा की गुणवत्ता में पिछड़े, इंदौर-भोपाल को पछाड़कर चमके सीधी और उज्जैन, PGI-D रिपोर्ट में खुलासा

एमपी के बड़े शहर शिक्षा की गुणवत्ता में पिछड़े, इंदौर-भोपाल को पछाड़कर चमके सीधी और उज्जैन, PGI-D रिपोर्ट में खुलासा

यह रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जारी की है। इसमें देश के 784 जिलों का मूल्यांकन 600 अंकों और 70 संकेतकों के आधार पर क…और पढ़ें

Publish Date: Sun, 12 Jul 2026 09:03:50 PM (IST)Updated Date: Sun, 12 Jul 2026 09:03:50 PM (IST)

एमपी के बड़े शहर शिक्षा की गुणवत्ता में पिछड़े, इंदौर-भोपाल को पछाड़कर चमके सीधी और उज्जैन, PGI-D रिपोर्ट में खुलासा
स्कूल शिक्षा में प्रदेश में नंबर वन बने सीधी-उज्जैन बने।

HighLights

  1. परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में फिसड्डी रहे इंदौर-भोपाल-जबलपुर
  2. बड़े शहरों में डिजिटल लर्निंग और सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती
  3. PGI-D रिपोर्ट में एमपी के प्रमुख जिलों को सुधार की जरूरत

अरविंद दुबे, इंदौर। मध्य प्रदेश के बड़े और संसाधन संपन्न जिले भी स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में राज्य के सर्वश्रेष्ठ जिले नहीं बन सके। केंद्र सरकार के परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फार डिस्ट्रिक्ट्स (पीजीआई-डी) 2025-26 में प्रदेश के केवल सीधी (333 अंक) और उज्जैन (323 अंक) ही प्रचेष्टा-1 ग्रेड तक पहुंच सके, जबकि इंदौर (284), भोपाल (285), ग्वालियर (277) और जबलपुर (267) जैसे बड़े जिले प्रचेष्टा-2 ग्रेड में रहे।

बड़े जिलों का कमजोर प्रदर्शन

रिपोर्ट बताती है कि बेहतर संसाधन, शहरीकरण और बड़े शिक्षा तंत्र के बावजूद बड़े जिले परिणाम, डिजिटल लर्निंग, कक्षा शिक्षण, स्कूल सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के संयुक्त मूल्यांकन में शीर्ष में जगह नहीं बना सके। यह रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जारी की है। इसमें देश के 784 जिलों का मूल्यांकन 600 अंकों और 70 संकेतकों के आधार पर किया गया है। मूल्यांकन के लिए यू-डाइस प्लस, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024 और प्रबंध पोर्टल के आंकड़ों का उपयोग किया गया है।

प्रदेश में बड़े जिलों की स्थिति

जिला कुल अंक ग्रेड
सीधी 333 प्रचेष्टा-1
उज्जैन 323 प्रचेष्टा-1
सीहोर 295 प्रचेष्टा-2
भोपाल 285 प्रचेष्टा-2
इंदौर 284 प्रचेष्टा-2
ग्वालियर 277 प्रचेष्टा-2
जबलपुर 267 प्रचेष्टा-2

बड़े शहरों में भी सीखने के परिणाम चुनौती

  • चारों बड़े शहरों के अंकों का विश्लेषण बताता है कि किसी एक क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन होने के बावजूद समग्र प्रदर्शन प्रभावित हुआ।
  • भोपाल को 285 अंक मिले। शासन प्रक्रियाओं में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन रहा, लेकिन कुल स्कोर प्रचेष्टा-1 तक नहीं पहुंच सका।
  • इंदौर 284 अंकों के साथ भोपाल से केवल एक अंक पीछे रहा। डिजिटल लर्निंग और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।
  • ग्वालियर को 277 अंक मिले। जबलपुर 267 अंकों के साथ चारों प्रमुख शहरों में सबसे पीछे रहा।

राष्ट्रीय तस्वीर भी बताती है लंबा सफर बाकी

रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष भी देश का कोई भी जिला सर्वोच्च उत्कर्ष ग्रेड हासिल नहीं कर पाया। केवल 19 जिले उत्तम-2 तक पहुंचे, जबकि 97 जिले उत्तम-3 में रहे। सबसे अधिक 325 जिले प्रचेष्टा-1 तथा 307 जिले प्रचेष्टा-2 ग्रेड में आए। इसका मतलब है कि देश के अधिकांश जिलों की तरह मध्य प्रदेश के प्रमुख जिले भी अभी सुधार वाले समूह में हैं।

कैसे तैयार होती है यह रिपोर्ट

पीजीआई-डी (परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फार डिस्ट्रिक्ट्स) जिला स्तर पर स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता मापने का राष्ट्रीय सूचकांक है। इसमें मूल्यांकन किया जाता है सीखने के परिणाम प्रभावी कक्षा शिक्षण आधारभूत सुविधाएं एवं छात्र अधिकार स्कूल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण डिजिटल लर्निंग प्रशासनिक एवं शासन प्रक्रियाएं (इन छह श्रेणियों के अंतर्गत कुल 70 संकेतकों पर अंक दिए जाते हैं। कुल स्कोर 600 अंक का होता है।)

ग्रेड का क्या मतलब है

ग्रेड कुल अंक (%)
उत्कर्ष 90% से अधिक
उत्तम-1 81-90%
उत्तम-2 71-80%
उत्तम-3 61-70%
प्रचेष्टा-1 51-60%
प्रचेष्टा-2 41-50%
प्रचेष्टा-3 31-40%
आकांशी-1 21-30%
आकांशी-2 11-20%
आकांशी-3 10% तक

पीजीआई-डी का संदेश स्पष्ट है कि शिक्षा का मूल्यांकन अब केवल भवन और सुविधाओं से नहीं, बल्कि बच्चों के सीखने, स्कूल प्रबंधन और डिजिटल तैयारी से होगा। यही भविष्य की शिक्षा का पैमाना है।- योगेंद्र दुबे, शिक्षाविद

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