बुजुर्गों को पेड़ों की संज्ञा दी जाती हैं, जो स्वयं जीवनभर धूप में तपकर अपने निःस्वार्थ प्रेम, अनुभव, संस्कार और आशीर्वाद की छाँव में पूरे परिवार को संभाले रखते हैं। इस बात की मिसाल उस समय दिखाई दी, जब आनंदम सीनियर सिटीज़न सेंटर के वरिष्ठ सदस्यों ने सोमवार को शहर के पितृ पर्वत पर कुल 66 पौधे लगाए।
इंसान अपने जीवन में बहुत कुछ कमाता है, लेकिन सबसे खूबसूरत विरासत वही होती है, जो उसके जाने के बाद भी लोगों के काम आए। फिर बात पर्यावरण संरक्षण की हो, तो दायित्व कई गुना बढ़ जाता है।
इसी सोच के साथ, आनंदम और उसकी महिला इकाई आनंदिनी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस वृक्षारोपण कार्यक्रम में आनंदम परिवार के 40 सदस्यों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और पौधों की देखभाल का संकल्प भी लिया।
अपने जन्मदिन के उपलक्ष्य में संस्था के सदस्य कर्नल हर्ष कौल द्वारा 20 पौधों का सहयोग दिया गया। ऐसे में, अपने जन्मदिन को पेड़ों के नाम समर्पित करने की इस सोच ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया।
आनंदम सीनियर सिटीज़न सेंटर के सचिव एस.बी. खंडेलवाल ने कहा, “पौधरोपण करना आसान है, लेकिन असली सेवा तब है, जब उन्हें बड़ा होते हुए देखने की जिम्मेदारी भी निभाई जाए।
आनंदम ट्रस्ट और आनंदिनी की अध्यक्ष गुरवीन कौर भाटिया ने कहा, “जीवन में सबसे बड़ा सुख सिर्फ अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ छोड़ जाने में है।
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