अमेरिकी मिसाइलों का निशाना बना ईरान का पुल जो चीन और रूस के लिए भी है अहम

अमेरिकी मिसाइलों का निशाना बना ईरान का पुल जो चीन और रूस के लिए भी है अहम

अमेरिका ने ईरान के अकताका ख़ान रेलवे ब्रिज पर हमले किए हैं

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ईरान के गोलेस्तान प्रांत में मौजूद अकताका ख़ान रेलवे ब्रिज को लेकर इन दिनों चर्चा हो रही है. अमेरिका ने बीते हफ़्ते अकताका ख़ान रेलवे ब्रिज पर हमले किए थे.

यह रास्ता इंचेब्रोन सीमा से ईरान को मध्य एशिया, रूस और चीन के रेल नेटवर्क से जोड़ता है.

लेकिन सवाल है कि ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए यह रास्ता कितना महत्वपूर्ण है और इसके बाधित होने के क्या परिणाम हो सकते हैं?

गोलेस्तान में अर्धसैनिक बल ‘नीनवे गार्ड्स’ ने एक बयान में बताया कि अकताका ख़ान रेलवे ब्रिज को अमेरिकी क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया गया था.

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोरगन नदी पर बने रेलवे पुल पर कम से कम सात मिसाइलें गिरीं.

ईरानी अधिकारियों ने किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी, लेकिन उन्होंने क्षेत्र के रेलवे बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की जानकारी दी.

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हाल के वर्षों में उत्तरी ईरान के रेल मार्ग एक प्रमुख व्यापार और आने जाने का रास्ता बन गए हैं.

साथ ही रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ ईरान के आर्थिक संबंधों को विकसित करने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस मार्ग ने आर्थिक प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने में मदद की है.

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ईरान के रेल ढांचे को निशाना बनाया है. इस साल अप्रैल में अमेरिका और इसराइल के ईरान से चल रहे युद्ध के दौरान, तेहरान,अल्बोर्ज़, क़ोम, इस्फ़हान, ज़ंजन और पूर्वी अज़रबैजान प्रांतों में कम से कम छह रेल पुलों को निशाना बनाया गया था.

हालांकि अकताका ख़ान पुल पर हमला अप्रैल 2026 में हुए युद्धविराम के टूटने के बाद ईरान के परिवहन ढांचे पर पहला हमला है.

अमेरिकी अधिकारियों ने अकताका ख़ान पुल का सीधे तौर पर जिक्र किए बिना घोषणा की कि उन्होंने उस दिन ईरानी “लॉजिस्टिकल और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर” के एक समूह को निशाना बनाया था.

अकताका ख़ान पर हमले के साथ ही खुरासान रजावी प्रांत में तोरबत रेलवे स्टेशन को भी निशाना बनाया गया. इस हमले के कारण मशहद जाने वाला रेलवे मार्ग बंद हो गया.

उत्तरी ईरान के रेलवे मार्ग का क्या महत्व है?

अकताका ख़ान पुल गोरगन-इंचेब्रोन रेलवे मार्ग पर स्थित है, जो इंचेब्रोन सीमा स्टेशन को ईरान के राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ता है. इस मार्ग के माध्यम से ईरान का रेल नेटवर्क तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान, रूस, चीन और अन्य मध्य एशियाई देशों से जुड़ा हुआ है.

इसी कारण अकताका ख़ान केवल एक स्थानीय पुल नहीं है, बल्कि ईरान को उत्तरी और पूर्वी यूरेशिया से जोड़ने वाले सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक का हिस्सा है. परिवहन और भू-राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा क्षेत्रीय व्यापार और आवागमन को प्रभावित कर सकती है.

अकताका ख़ान रेलवे पुल का महत्व ईरान के लिए हाल के सालों में बढ़ा है

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हाल के वर्षों में इंचेब्रोन सीमा चौकी ईरानी रेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश द्वारों में से एक बन गई है. इंचेब्रोन फ्री जोन के विकास, कार्गो टर्मिनल की क्षमता में वृद्धि और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश ने ईरान की सीमावर्ती अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र के महत्व को और बढ़ा दिया है.

इंचेब्रोन से होकर गुजरने वाली ईरान-तुर्कमेनिस्तान-कजाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय रेलवे लाइन इस क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण परिवहन परियोजनाओं में से एक है. यह मध्य एशियाई देशों को लंबी समुद्री मार्गों की आवश्यकता के बिना फारस की खाड़ी और खुले जलक्षेत्र से जोड़ेगीं.

अंतरराष्ट्रीय गलियारों में अकताका ख़ान की भूमिका

अकताका ख़ान पुल के महत्व का आकलन दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्गों के संदर्भ में किया जाना चाहिए.

इसमें पहला नाम है चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ का. इसके तहत पूर्वी एशिया, मध्य एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच जमीन और समुद्री मार्गों का एक जाल बनाया गया है. इस जाल की एक शाखा चीन से शुरू होती है और तुर्कमेनिस्तान से गुजरते हुए इंचब्रोन सीमा पर ईरान में प्रवेश करती है.

दूसरा, उत्तर-दक्षिण अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारा, जिसे भारत, ईरान, रूस और मध्य एशियाई देशों को जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

इसका उद्देश्य हिंद महासागर, रूस और यूरोप के बीच माल परिवहन की लागत और समय को कम करना है.

अकताका ख़ान पुल इन मार्गों की पूर्वी शाखा पर स्थित है और इसलिए इसे कोई भी नुकसान होने से क्षेत्र के परिवहन नेटवर्क का एक हिस्सा प्रभावित हो सकता है हालांकि इस प्रभाव की सीमा व्यवधान की अवधि और मार्ग के पुनर्निर्माण की गति पर निर्भर करती है.

इस पुल के जरिए मालवाहक ट्रेन चीन से ईरान आती हैं

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ईरानी रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल चीन से कम से कम 65 मालगाड़ियां ईरान में दाखिल हुईं.

फारस की खाड़ी में समुद्री तनाव बढ़ने और समुद्री मार्गों पर असुरक्षा बढ़ने के बाद ईरान और चीन के बीच मालगाड़ियों की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है. यहां तक कि कई बार चीन से हर तीन से चार दिन में एक मालवाहक ट्रेन ईरान में प्रवेश करती है.

हाल के सालों में रूस ने भी इस मार्ग का उपयोग बढ़ा दिया है.

नवंबर 2015 में पहली रूसी मालगाड़ी तुर्कमेनिस्तान और इंचेब्रोन सीमा के रास्ते ईरान में प्रवेश कर तेहरान के दक्षिण में स्थित एप्रन ड्राई पोर्ट पर अपना माल उतार चुकी थी.

दोनों देशों के अधिकारियों ने इस घटना को क्षेत्र के रेल गलियारों के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम माना.

पहले ईरान, कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान ने बंदर अब्बास और वैश्विक बाजारों तक इस मार्ग के माध्यम से अनाज और अन्य मध्य एशियाई वस्तुओं के निर्यात को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की.

पेट्रोल से सिरेमिक तक के व्यापार का अहम रास्ता

गोरगन-इंचेब्रोन रेलवे न केवल एक आने जाने का रास्ता है, बल्कि ईरान और मध्य एशिया, रूस और चीन के बीच सबसे महत्वपूर्ण भूमि व्यापार मार्गों में से एक है.

ईरान इस मार्ग से पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, सीमेंट, निर्माण सामग्री, टाइलें और सिरेमिक जैसे उत्पादों के साथ-साथ अपने कुछ कृषि उत्पादों का निर्यात करता है.

इसके विपरीत, इस गलियारे से ईरान के आयात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अनाज, गेहूं, जौ, मक्का, कपास और रासायनिक उर्वरकों का होता है. रूस और कजाकिस्तान ईरानी बाजार में इन वस्तुओं के अहम आपूर्तिकर्ता हैं.

हाल के वर्षों में ईरान और चीन के बीच व्यापार बढ़ने के साथ-साथ इस मार्ग पर कंटेनर परिवहन का हिस्सा भी बढ़ा है. औद्योगिक मशीनरी और कुछ उपभोक्ता वस्तुओं के अलावा कारखानों के लिए कच्चा माल इस रेल नेटवर्क के माध्यम से ईरान में प्रवेश करता है.

साथ ही, यह गलियारा रूस, मध्य एशिया, चीन और ईरान के दक्षिणी बंदरगाहों के बीच माल के लिए महत्वपूर्ण रास्तों में से एक बन गया है. इससे गुजरने वाले कुछ सामान फारस की खाड़ी के देशों और भारत तक पहुंचाए जाते हैं.

क्या इस मार्ग ने प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने में कोई भूमिका निभाई है?

हाल के वर्षों में इस मार्ग का महत्व बढ़ गया है. साथ ही ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों में वृद्धि और रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के विस्तार के कारण भी इसमें वृद्धि हुई है.

कई विश्लेषकों का मानना ​​है कि उत्तरी ईरान के सड़क और रेल मार्गों ने देश के व्यापार मार्गों में विविधता लाने में मदद की है. साथ ही समुद्री मार्गों पर ईरान की विदेशी व्यापार निर्भरता को कुछ हद तक कम किया है.

ईरानी अधिकारियों ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम रेल गलियारों का विकास पड़ोसी देशों और एशियाई देशों के साथ व्यापार बढ़ाने की देश की रणनीति का हिस्सा है.

आईआरएनए की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के दौरान आर्थिक दबाव को कम करने के लिए उत्तरी रेल कॉरिडोर का इस्तेमाल किया है

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लेकिन आलोचकों का कहना है कि प्रतिबंधों के प्रभावों को कम करने में इन गलियारों की भूमिका सीमित है और ये बैंकिंग और वित्तीय प्रतिबंधों के कारण उत्पन्न सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते.

कई विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में इंचब्रोन मार्ग ईरान के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय व्यापार मार्गों में से एक बन गया है. साथ ही रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार में इसका महत्व बढ़ गया है.

सरकार की आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के दौरान इस बारे में लिखा था.

एजेंसी के मुताबिक ईरान ने अर्थव्यवस्था पर दबाव कम करने के लिए रेल मार्ग का इस्तेमाल किया.

इस गलियारे ने ईरान को उपभोक्ता वस्तुओं, औद्योगिक सामग्रियों, खाद्य पदार्थों, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी के आयात में मदद की और बदले में, गैर-तेल वस्तुओं का निर्यात किया.

इस हमले का ईरान की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

ईरान के रेलवे विभाग ने घोषणा की कि हमले के तुरंत बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों पर पुनर्निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है. रेलवे के सीईओ ने बताया कि तकनीकी टीमें घटनास्थल पर तैनात कर दी गई हैं और क्षतिग्रस्त लाइनों में से कुछ को थोड़े ही समय में फिर से चालू कर दिया गया है.

फिलहाल कुछ माल सड़क परिवहन, कैस्पियन सागर बंदरगाहों, सरख्स रेल मार्ग या सड़क एवं रेल परिवहन के संयोजन के माध्यम से पहुंचाया जा सकता है.

हालांकि विशेषज्ञों का मानना ​​है कि क्षमता, लागत और गति के मामले में इनमें से कोई भी विकल्प गोरगन-इंचेब्रोन मार्ग का पूर्ण विकल्प नहीं है.

अगर पुनर्निर्माण प्रक्रिया प्लान के मुताबिक चलती है तो मार्ग पर होने वाली परिचालन संबंधी बाधा संभवतः अस्थायी होगी.

लेकिन भौतिक क्षति से परे कुछ विश्लेषकों का मानना ​​है कि इस घटना का मुख्य महत्व इसके आर्थिक और मनोवैज्ञानिक परिणामों में निहित है, क्योंकि अहम रास्तों की सुरक्षा कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड पार्टनर्स के निर्णय लेने में महत्वपूर्ण कारक हैं.

अकताका ख़ान पुल पर हमले का गूंज ईरान की सीमाओं से परे भी हो सकती है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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