जहां पानी होना चाहिए वहां अब मैदान नजर आता है। बड़े बिलावली तालाब पर लगातार काम हो रहा है, लेकिन उसके ठीक पास स्थित छोटा बिलावली को जिम्मेदारों ने भगव …और पढ़ें

HighLights
- जल गंगा संवर्धन अभियान के दावों की खुली पोल, अप्रैल में ही सूखा तालाब बना मैदान
- सालभर पानी से लबालब रहने वाला यह तालाब अब अप्रैल-मई में ही पूरी तरह सूख चुका है
- छोटा बिलावली तालाब को जिम्मेदार विभागों ने पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रदेश सरकार भले ही जल संरक्षण और जल गंगा संवर्धन अभियान के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन इंदौर का छोटा बिलावली तालाब प्रशासनिक उदासीनता और अतिक्रमण की भेंट चढ़ता जा रहा है। कभी सालभर पानी से लबालब रहने वाला यह तालाब अब अप्रैल में ही पूरी तरह सूख चुका है।
हालत यह है कि जहां पानी होना चाहिए वहां अब मैदान नजर आता है। बड़े बिलावली तालाब की पाल मजबूत करने और सौंदर्यीकरण पर लगातार काम हो रहा है, लेकिन उसके ठीक पास स्थित छोटा बिलावली तालाब को जिम्मेदार विभागों ने पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया है। वर्षों से तालाब का गहरीकरण नहीं कराया गया, जबकि कैचमेंट एरिया में लगातार निर्माण और अतिक्रमण होते रहे। नतीजा यह हुआ कि बारिश का पानी तालाब तक पहुंचना ही बंद हो गया।
दरअसल खंडवा रोड़ पर बिलावली तालाब के पास ही छोटा बिलावली तालाब है और बिलावली तालाब की तरह ही इसमें भी वर्षभर पानी रहता है। वर्तमान में दोनों तालाबों में पानी नहीं है, लेकिन छोटा बिलावली तालाब तो मैदान बन चुका है। बिलावली तालाब कभी मध्य शहर की प्यास बुझाता था, लेकिन अब अपनी प्यास बुझाने के लिए तरस रहा है। वजह इसके आसपास व कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण, सघन बसाहट है, वहीं प्राकृतिकक पानी की चैनल को खत्म कर दिया गया है। अतिक्रमण और गहरीकरण नहीं होने से तालाब का दायरा सिकुडता जा रहा है और पानी भी नहीं भर पा रहा।
आसपास की कालोनियां प्रभावित
जानकारों का कहना है कि बड़ा और छोटा बिलावली तालाब शहर की बड़ी पानी की संरचना है, इससे आसपास का जलस्तर बनाए रखने में मदद मिलती है। इस साल तालाब सूखने से शहर के बड़े क्षेत्र का भूजल स्तर प्रभावित हुआ है। तालाब के आसपास की दर्जनों कालोनियों के बोरिंग मई माह में ही सूख चुके है या सूखने की कगार पर पहुंच चुके है।
कुएं करते थे वाटर रिचार्ज
तालाब में बने आधा दर्जन से अधिक कुएं, जो कभी वाटर रिचार्ज के प्रमुख स्रोत थे, अब पूरी तरह सूख चुके हैं। इससे क्षेत्र का भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल कागजों में जल संरक्षण अभियान चला रहा है, जबकि जमीन पर जल स्रोतों को मरने के लिए छोड़ दिया गया है। यदि जल्द गहरीकरण, अतिक्रमण हटाने और कैचमेंट एरिया बचाने की कार्रवाई नहीं हुई, तो छोटा बिलावली तालाब आने वाले समय में पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
अतिक्रमण चिह्नित करने को कहा गया है
छोटा बिलावली के अतिक्रमण चिन्हित करने के लिए अधिकारियों से कहा गया है। तालाब की चेनलों का भी पता लगाया जा रहा है, जहां पर भी अतिक्रमण है, वह सभी हटाएं जाएंगे। कुछ जगह कॉलोनाइजनों ने चेनल बंद कर पाइप डाल दिए है, उन्हें भी हटावाया जाएगा। – अभिषेक शर्मा बब्लू, जलकार्य प्रभारी
इंदौर में अतिक्रमण कर खत्म कर दिया तालाब का अस्तित्व, जिम्मेदार बेखबर
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