शहर के बड़ा गणपति सड़क पर बेकाबू ट्रक से हुए हादसे को 11 महीनों बीत चुके हैं। घटना कई परिवारों के लिए दु:स्वप्न की तरह रही, लेकिन जिम्मेदारों ने व्यवस…और पढ़ें

HighLights
- आवेदक जरूरी दस्तावेज लगाकर डीसीपी कार्यालय में करें आवेदन
- बड़ा गणपति सड़क पर बेकाबू ट्रक से हुए हादसे को 11 महीनों बीत चुके हैं
- ऐसा सिस्टम बना दिया कि अब अपने सपनों का घर बनाने का शहरवासियों का सपना रोज टूट रहा है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के बड़ा गणपति सड़क पर बेकाबू ट्रक से हुए हादसे को 11 महीनों बीत चुके हैं। घटना कई परिवारों के लिए दु:स्वप्न की तरह रही, लेकिन जिम्मेदारों ने व्यवस्था सुधारने के बजाए ऐसा लाइसेंसी सिस्टम बना दिया कि अब अपने सपनों का घर बनाने का शहरवासियों का सपना रोज टूट रहा है।
15 सितंबर 2025 को एरोड्रम क्षेत्र में शिक्षक नगर से बड़ा गणपति तक शराबी ट्रक चालक मौत बनकर दौड़ा था। ट्रक ने दोपहिया-चार पहिया सहित एक दर्जन से ज्यादा वाहनों को टक्कर मार दी थी। हादसे में दो की मौके पर मौत के साथ 14 लोग घायल व एक युवती गंभीर घायल हो गई थी।
हादसे के बाद शहर की सीमाओं पर यातायात के जवान मुस्तैद रहते हैं, लेकिन बीते साल नो-एंट्री में बड़ा गणपति क्षेत्र में एक बेकाबू ट्रक को प्रवेश मिला था। गलती ट्रक को प्रवेश देने वालों की थी, लेकिन सजा बेकसूर वाहन चालकों को भुगतनी पड़ी। घटना से उम्मीद थी कि यातायात की निगरानी व्यवस्था दुरुस्त होगी, लेकिन हुआ कुछ और ही।
अपने आशियाने का सपना देखने वाले असहाय हैं
नियमों के फेर में अपने आशियाने का सपना देखने वाले उलझकर असहाय हैं। शहर में बड़ी संख्या में छोटे-बड़े घरों और भवनों का निर्माण हो रहा है और जिम्मेदारों ने सभी को नियमों की जटिलताओं में उलझा दिया। सबसे ज्यादा दिक्कत भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ट्रांजिट मिक्सर मशीन को लेकर है, क्योंकि इसके बिना घर का सपना जमीन पर नहीं उतर सकता।
प्रवेश से पहले विधिवत जानकारी देना होती है। पूरी जानकारी देने के बाद अनुमति मिल जाना चाहिए, लेकिन अनुमति लेने के लिए चक्कर काटना होते हैं। जानकारी देने के बाद भी अनुमति रोकने के पीछे स्पष्ट तर्क नहीं होते और न ही कोई नियम है। जब तक चाहें आवेदन टेबल पर ही रुका रहता है। जिन्हें घर बनाना है वे चक्कर काटते रहते हैं। जैसे-तैसे अनुमति के लिए प्रयास करते हैं। अनुमति की लाइसेंसी व्यवस्था से विकास का सपना कमजोर हो रहा है।
पानी के टैंकर शहर में दौड़ते हैं दिनभर
भारी वाहनों के प्रवेश को लेकर जिम्मेदारों का दोहरा रवैया भी सामने आया है। भारी वाहनों का मुख्य व व्यस्त मार्गों पर सुबह सात बजे से रात 11 बजे तक प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहता है। शहर में पानी के टैंकर दिनभर दौड़ते हैं। इनके सुरक्षा मानकों की कोई चिंता नहीं होती और न ही उचित जांच करते है। बीते दिनों शहर के व्यस्ततम क्षेत्र सियागंज में एक बेकाबू टैंकर ने कई वाहनों को टक्कर मारी थी। घटना के बाद गैर अनुमति के टैंकरों पर कार्रवाई की बात सामने आई थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। नियमों की गैर जरूरी सख्ती से हजारों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। नागरिकों की सुरक्षा के नियमों का पालन होना चाहिए। पूरी जानकारी के बाद अनुमति को रोककर रखने के रवैये पर अंकुश जरूरी है।
जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं होते
एडिशनल डीसीपी संतोष कौल के अनुसार शहर में ट्रांजिट मिक्सर मशीन के प्रवेश को लेकर अनुमति के लिए डीसीपी कार्यालय में आवेदन देना होता है। आवेदन में चाहे गए जरूरी दस्तावेज संलग्न करना पड़ते हैं। शहर में आवागमन का मार्ग और काम का उद्देश्य बताना होता है। अधिकांश आवेदक जरूरी दस्तावेज कार्यालय में प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं, इसलिए अनुमति अटक जाती है। आवेदक जरूरी दस्तावेज अवश्य लगाए, जिससे अनुमति तुरंत मिल जाए।
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