Microplastics:कहीं आपके शरीर में भी तो नहीं जमा हो रहा है प्लास्टिक? डॉक्टर ने बताया कैसे दूर करें ये खतरा – Microplastics In Human Body Know Its Health Risk And How To Get Rid Of This

Microplastics:कहीं आपके शरीर में भी तो नहीं जमा हो रहा है प्लास्टिक? डॉक्टर ने बताया कैसे दूर करें ये खतरा – Microplastics In Human Body Know Its Health Risk And How To Get Rid Of This

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पानी को आप सुरक्षित समझकर पी रहे हैं, जिस खाने को पौष्टिक मानकर खा रहे हैं और जिस हवा में सांस ले रहे हैं, उसके साथ प्लास्टिक के बेहद छोटे-छोटे कण भी हमारे शरीर में प्रवेश कर रहे हैं? मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जिस तरह से दुनियाभर में प्लास्टिक वाली चीजों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, इसने माइक्रोप्लास्टिक के खतरे को भी बढ़ा दिया। यह अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि तेजी से उभरता हुआ स्वास्थ्य का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।

पिछले कुछ अध्ययनों में प्लास्टिक के सूक्ष्मकणों के खून, फेफड़ों, प्लेसेंटा, स्तन के दूध और यहां तक कि मस्तिष्क के ऊतकों तक में पाए जाने की रिपोर्ट सामने आई हैं। दरअसल, प्लास्टिक कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता। समय के साथ यह टूटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल जाता है। यही कण पानी, मिट्टी, हवा और खाद्य श्रृंखला का हिस्सा बन जाते हैं। 

इंसानी शरीर में बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक के स्तर को वैज्ञानिक सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, हार्मोनल असंतुलन और कोशिकाओं को डैमेज करने वाला बताते रहे हैं। तो क्या कोई तरीका है जिससे माइक्रोप्लास्टिक को शरीर में पहुंचने से रोका जा सके?




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माइक्रोप्लास्टिक और हार्ट अटैक की समस्या
– फोटो : Amarujala.com/AI


माइक्रोप्लास्टिक हृदय की सेहत के लिए भी खतरनाक

अमर उजाला में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में हमने बताया था कि माइक्रोप्लास्टिक हृदय की सेहत के लिए भी बड़ा खतरा हो सकता है। वैज्ञानिकों ने हार्ट अटैक का शिकार रहे कई मरीजों के खून में बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कण पाए हैं। 

 

  • शरीर में माइक्रोप्लास्टिक मुख्य रूप से तीन माध्यमों भोजन, पानी और सांस के जरिए  प्रवेश करता है। 
  • सी फूड्स, बोतलबंद पानी, पैक्ड फूड, नमक और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों में माइक्रोप्लास्टिक मिलने की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है। 
  • इसके अलावा हवा में मौजूद सूक्ष्म प्लास्टिक कण सांस के साथ शरीर में जा सकते हैं।


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माइक्रोप्लास्टिक का शरीर पर असर
– फोटो : Adobe Stock Images


क्या होता है इसका स्वास्थ्य पर असर

अध्ययन बताते हैं कि माइक्रोप्लास्टिक शरीर में इंफ्लेमेशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और कोशिकाओं पर प्रभाव डाल सकता है। 

 

  • कुछ अध्ययनों में हार्मोनल सिस्टम और प्रतिरक्षा प्रणाली पर संभावित असर की भी चर्चा की गई है।
  • हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुआ है कि सामान्य स्तर पर माइक्रोप्लास्टिक का संपर्क किन-किन बीमारियों का प्रत्यक्ष कारण बनता है।

मोहाली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने खुलासा करते हुए बताया कि सिंगल-यूज पीईटी बोतलों से निकलने वाले नैनोप्लास्टिक इंसानी शरीर के महत्वपूर्ण जैविक तंत्रों को बाधित कर सकते हैं। ये कण आंतों में मौजूद फायदेमंद जीवाणुओं, रक्त कोशिकाओं और एपिथेलियल सेल्स के सामान्य कामकाज को कमजोर करते हैं, जिससे सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।


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खान-पान में गड़बड़ी से होने वाली दिक्कतें
– फोटो : Adobe stock photos


माइक्रोप्लास्टिक के खतरे से कैसे बचें?

कैलिफोर्निया में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी कहते हैं कुछ आसान तरीके अपनाकर आप माइक्रोप्लास्टिक के खतरे को कम कर सकते हैं।

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  • डिब्बाबंद चीजें, भोजन में प्लास्टिक के केमिकल मिलने का एक मुख्य जरिया है। डॉ. सेठी के अनुसार, इसे पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए।  इसकी अंदरूनी परत से बीपीए (बिस्फेनॉल A) सीधे खाने वाली चीजों में मिल जाता है। डिब्बाबंद ड्रिंक्स भी नुकसानदायक हैं। 

 

  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना सिर्फ पाचन के लिहाज से ही पेट के लिए नुकसानदायक नहीं होता। ये अक्सर प्लास्टिक की पैकेजिंग में आते हैं, जिससे खाने में प्लास्टिक के केमिकल मिल जाते हैं। कॉर्न चिप्स और पैक्ड स्नैक्स इसका मुख्य स्रोत रहे हैं। डॉ. सेठी बताते हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड चीजें सेहत के लिए कई तरह से खतरनाक हो सकती हैं

 

  • खाने में माइक्रोप्लास्टिक से बचने का एक आसान तरीका यह है कि प्लास्टिक पैकेजिंग से पूरी तरह बचा जाए, यहां तक कि ताजे खाने के मामले में भी ऐसा होता है। डॉ. सेठी कहते हैं, प्लास्टिक पैकेजिंग वाली चीजों को खोलकर खाने से पहले  उसमें माइक्रोप्लास्टिक वाली चीजें हो सकती हैं।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।




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