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मानसून में बारिश या फिसलन के कारण कई बुजुर्ग बाहर नहीं निकल पाते हैं। ऐसे में उनके पास घर पर पर्याप्त समय होता है। न्यूरोसाइंटिस्ट और इससे जुड़ी कई रिसर्च ने माना है कि यदि रोजाना कुछ समय शतरंज जैसे गेम्स खेलें तो दिमाग को वैसी ही चुनौती मिलती है, जैसे शरीर को व्यायाम करने से मिलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी कहता है कि 60 पार की उम्र में हफ्ते में 150 मिनट दिमागी कसरत करना चाहिए। इसमें शतरंज जैसे गेम बुजुर्गों के लिए ‘ब्रेन टॉनिक’ बन सकते हैं। शतरंज का साइंस – 3 तरह से लाभ 1. अल्जाइमर का जोखिम घटता – मेडिकल जर्नल जामा के शोध के अनुसार शतरंज जैसे मानसिक गेम नियमित खेलने वाले बुजुर्गों में अल्जाइमर का खतरा कम पाया। 2. फैसले की ताकत बढ़ती – चेस में हर चाल से पहले सोचना पड़ता है। प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स एक्टिव रहता है। भूलने की आदत घटती है। 3. अकेलापन दूर होता – बारिश में बाहर नहीं निकल पाते तो पोते या पड़ोसी के साथ 30 मिनट शतरंज से बातचीत और हंसी बनी रहती है। यह डिप्रेशन की दवा की तरह है। किसे ज्यादा फायदा और कब रुकें 1. चेस खेलें – जिन्हें भूलने की आदत शुरू हुई है। रिटायर होकर खाली बैठे हैं, घुटनों में दर्द से वॉक बंद है तो चेस खेलें। 2 सावधानी – आंखों में परेशानी हो तो नहीं खेलें। बारिश में कंजंक्टिवाइटिस का खतरा रहता है। कमर दर्द है तो लगातार नहीं बैठें। बुजुर्ग कैसे खेलें? 5 आसान ट्रिक बड़ा बोर्ड लें – लकड़ी का मैग्नेट वाला बोर्ड खरीदें। मोहरें पकड़ने में आसान होती है। 10 मिनट रूल – पूरा गेम नहीं आता है तो सिर्फ वजीर, घोड़ा, हाथी की चाल दोहराएं। टाइमर नहीं – एक चाल में 2 मिनट सोचें। आपके लिए जीत नहीं, सोच जरूरी है। पोते को टीचर बनाएं – 10-12 साल के बच्चे ऐसे गेम्स के लिए बेस्ट टीचर होते हैं। आप कहानी सुनाएं, वो चाल सिखाएंगे। कमर सीधी रखें – टेबल-कुर्सी पर बैठकर खेलें। हर 30 मिनट बाद 2 मिनट खड़े हों।
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