इंदौर में जारी रहेगी परिंदों को कोर्ट से मिली राहत, फिलहाल नहीं कटेंगे रानी सराय परिसर के सैकड़ों हरे-भरे पेड़

इंदौर में जारी रहेगी परिंदों को कोर्ट से मिली राहत, फिलहाल नहीं कटेंगे रानी सराय परिसर के सैकड़ों हरे-भरे पेड़

रानी सराय में लगे सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों पर फिलहाल कुल्हाड़ी नहीं चलेगी। इन पेड़ों पर रह रहे परिंदों को पूर्व में दी राहत जारी रखते हुए हाई कोर्ट ने प…और पढ़ें

Publish Date: Sat, 25 Jul 2026 11:23:28 AM (IST)Updated Date: Sat, 25 Jul 2026 11:23:28 AM (IST)

इंदौर में जारी रहेगी परिंदों को कोर्ट से मिली राहत, फिलहाल नहीं कटेंगे रानी सराय परिसर के सैकड़ों हरे-भरे पेड़
कोर्ट ने परिंदों को दी राहत। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कोर्ट ने कहा एनजीटी से मिली अनुमति की कॉपी प्रस्तुत करें, 10 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
  2. रोक हटाने के लिए मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने दिया है आवेदन
  3. कोर्ट ने दो सप्ताह का समय देते हुए सुनवाई आगे बढ़ा दी, लेकिन तब तक कोई पेड़ काटा नहीं जाएगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : रानी सराय में लगे सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों पर फिलहाल कुल्हाड़ी नहीं चलेगी। इन पेड़ों पर रह रहे परिंदों को पूर्व में दी राहत जारी रखते हुए हाई कोर्ट ने पेड़ काटने पर लगी रोक को यथावत रखा है।

शुक्रवार को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान इंदौर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने बताया कि एनजीटी ने इन पेडों को काटने की अनुमति दे दी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अनुमति है तो उसकी प्रति प्रस्तुत करें। कोर्ट ने कॉपी प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए सुनवाई आगे बढ़ा दी, लेकिन तब तक कोई पेड काटा नहीं जाएगा।

हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका प्रियांशु जैन ने एडवोकेट लवेश सारस्वत के माध्यम से प्रस्तुत की है। कहा है कि रानी सराय में हजारों परिंदे पेड़ों पर घरोंदा बनाकर रह रहे हैं। अगर पेड़ों को काटा गया तो हजारों परिंदों पर संकट आ जाएगा। इसके अलावा एक अन्य याचिका डा. अमन शर्मा ने एडवोकेट अभिनव धनोतकर के माध्यम से प्रस्तुत की है। इस जनहित याचिका में मप्र वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम को चुनौती दी गई है। इस जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने वर्ष 2024 में एमओजी लाइन्स और मल्हाराश्रम क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी।

रोक हटाने के लिए मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने दिया है आवेदन

रानी सराय में पेडों को काटने पर लगी रोक हटाने के लिए मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने एक आवेदन कोर्ट में प्रस्तुत किया है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कार्पोरेशन के वकील ने कहा कि उन्होंने एनजीटी से पेड काटने की अनुमति ले ली है। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि मुख्य याचिका में पूरे एक्ट को चुनौती दी गई है।

जब एक्ट को दी गई चुनौती ही विचाराधीन है तो फिर इसके आधार पर पेड काटने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने मेट्रो रेल कार्पोरेशन से कहा कि वह एनजीटी से मिली अनुमति की प्रति प्रस्तुत करे। मामले में अब 10 अगस्त को सुनवाई होगी।

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