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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के साथ संभावित समझौते का रविवार को संकेत देते हुए कहा है कि ‘शायद आज थोड़ी देर में और ख़बरें सामने आएंगी.’
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने कहा कि पिछले एक हफ्ते में अमेरिका और ईरान के बीच रुख़ में नजदीकी ज़रूर आई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अहम मुद्दों पर समझौता हो जाएगा.
बातचीत को लेकर जारी सरगर्मी से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पक्षों के बीच प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बन गई है.
हालांकि, देर शाम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ‘व्यवस्थित और रचनात्मक तरीके से’ जारी है और उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को किसी भी समझौते में जल्दबाज़ी न करने का निर्देश दिया है.
उधर ईरान के सरकारी मीडिया की ओर से कहा गया है कि समझौता अमेरिका की ओर से लगाई गई पाबंदियों की वजह से ‘अटका’ हुआ है.
समझौते को लेकर ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इस बातचीत का स्वागत करते हुए बयान दिए हैं. ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा समझौता होना चाहिए जिसमें होर्मुज़ स्ट्रेट पर बेरोकटोक आवाजाही की स्वतंत्रता हो.
यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने ही यह भी कहा कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जा सकते.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि उनका देश दुनिया को यह भरोसा दिलाने के लिए तैयार है कि वह परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है.
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के मुताबिक़, अमेरिका के साथ संभावित समझौते को लेकर ‘एक या दो’ मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं.
इसमें कहा गया है कि इन मुद्दों पर ‘अमेरिका की तरफ़ से अड़चन’ की वजह से मामला अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है.
‘एपिक फ़्यूरी’ के लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं- रुबियो
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भारत के दौरे पर आए रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “आने वाले कुछ घंटों में दुनिया को ‘कम से कम (होर्मुज़) स्ट्रेट के मामले में’ कुछ अच्छी ख़बर मिल सकती है.”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा, “हमें अभी कुछ और काम करना है. अच्छी ख़बर है, लेकिन अभी अंतिम ख़बर नहीं है.”
रुबियो ने यह भी कहा कि ईरान कभी भी ‘परमाणु हथियार नहीं रख सकता.’ उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात को लेकर स्पष्ट रहे हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि यह सोचना कि राष्ट्रपति ऐसे किसी समझौते पर सहमत होंगे जो परमाणु मुद्दे पर ईरान की स्थिति को और मजबूत कर दे, ‘बेतुका’ है.
प्रेस कॉंफ्रेंस में बीबीसी के टॉम बेटमैन ने 28 फ़रवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में क्षतिग्रस्त हुए स्कूलों की संख्या से जुड़ी रिपोर्टों पर जांच के बारे में पूछा.
इसके जवाब में रुबियो ने कहा कि वह ‘सैन्य रणनीति पर बात नहीं करेंगे, क्योंकि यह मेरा विभाग नहीं है.’
उन्होंने कहा कि अमेरिका के लक्ष्य ‘बहुत स्पष्ट’ थे, जिनमें ईरान की नौसेना को नष्ट करना, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल दागने की क्षमता ख़त्म करना और उसके ‘रक्षा औद्योगिक ढांचे’ को नुक़सान पहुंचाना शामिल था.
रुबियो ने कहा, “ये ‘एपिक फ्यूरी’ के उद्देश्य थे और ये उद्देश्य हासिल कर लिए गए.”
हालांकि रुबियो के बयान के कुछ घंटे बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध तब तक लागू रहेंगे जब तक कोई समझौता नहीं हो जाता, उसकी पुष्टि नहीं हो जाती और उस पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते. दोनों पक्षों को अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए.”
ट्रंप ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘ग़लती की कोई गुंजाइश नहीं है’ और “अमेरिका-ईरान संबंध अधिक पेशेवर और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन ईरान को यह समझना होगा कि वह परमाणु हथियार या बम प्राप्त नहीं कर सकता है.”
‘होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए समझौते की मांग’

भारत में मार्को रुबियो के बयान के तुरंत बाद, स्टार्मर ने एक्स पर लिखा, “ऐसा समझौता होना चाहिए जो संघर्ष को समाप्त करे और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोले, जिसमें बिना शर्त और बिना किसी रोक-टोक के नौवहन की स्वतंत्रता हो.”
उन्होंने कहा कि युद्ध के प्रभाव से अपने नागरिकों की रक्षा के लिए ब्रिटिश सरकार ‘जो कुछ कर सकती है, वह सब करेगी’. और उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर “इस मौके का फायदा उठाकर दीर्घकालिक कूटनीतिक समाधान हासिल करने” पर काम करेंगे.
बात कहां अटकी है?
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इसमें कहा गया है कि इन बिंदुओं पर अमेरिका की ओर से ‘बाधा’ के कारण मामला अभी तक अंतिम रूप नहीं ले पाया है.
समाचार एजेंसी का कहना है कि मध्यस्थ पाकिस्तान को ईरान के रुख़ से अवगत करा दिया गया है, और अगर ‘अमेरिका की बाधा जारी रहती है’ तो समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़ी समाचार एजेंसी फ़ार्स, ने रिपोर्ट किया है कि ये अड़चन वाले बिंदु फ़्रीज़ ईरानी संपत्तियों और तेल और उससे जुड़े पदार्थों पर लगे प्रतिबंधों से संबंधित हैं.
फ़ार्स ने बताया कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत को ‘संभावित रूप से युद्ध समाप्त होने के बाद’ तक स्थगित कर दिया गया है.
इसमें कहा गया है कि वर्तमान प्रारूप केवल युद्ध समाप्त करने के मुद्दे तक सीमित है और इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी कोई भी जानकारी शामिल नहीं है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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