शहर के पांच स्थानों पर जेंट्री गेट से भी पोस्टर हटाए गए। इंदौर की सड़कों पर लगे जेंट्री गेट पर विभिन्न इलाकों की जानकारी और दिशा-सूचक संकेतक लगे हैं, लेकिन उन पर भी आयोजनों के पोस्टर चस्पा कर दिए जाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
क्या कहा कोर्ट ने
कोर्ट ने कहा कि अवैध होर्डिंग को लेकर वर्ष 2022 में जबलपुर हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे। इसके अलावा सरकार ने भी वर्ष 2019 से अवैध होर्डिंग को लेकर नियम बना रखे हैं। उनका पालन क्यों नहीं हो रहा है? कोर्ट ने कहा कि यदि अवैध होर्डिंग की शिकायत प्राप्त होती है तो उसे लंबित न रखा जाए। अवैध होर्डिंग हटाने की कार्रवाई 24 घंटे के भीतर शुरू की जाए और ऐसा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। याचिका में कहा गया था कि अवैध होर्डिंग पर अवैध तरीके से विज्ञापन लगाए जा रहे हैं। इससे अनुमति लेकर विज्ञापन लगाने वाली एजेंसियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
इंदौर में यह याचिका एसएस कंपनी ने दायर की थी, जो विज्ञापन लगाने का काम करती है। याचिका में कहा गया था कि नगर निगम को शुल्क का भुगतान कर शहर में यूनिपोल और होर्डिंग के स्ट्रक्चर लगाने की अनुमति मिलती है। इसके बाद उन पर विज्ञापन प्रदर्शित किए जाते हैं, लेकिन शहर में जब धार्मिक और राजनीतिक आयोजन होते हैं, तो उन होर्डिंगों पर अवैध तरीके से बैनर लगा दिए जाते हैं। इसके लिए एजेंसी को कोई शुल्क भी नहीं चुकाया जाता और पहले से लगे विज्ञापनों को भी नुकसान पहुंचाया जाता है।
अवैध होर्डिंग कितने, नहीं होता सर्वे
शहर में कितने अवैध होर्डिंग हैं, इसका नगर निगम की ओर से कभी आधिकारिक सर्वे नहीं कराया जाता। शहर में जब भी किसी जननेता का आगमन होता है, सड़कों पर अवैध होर्डिंग लगा दिए जाते हैं, लेकिन उन्हें तत्काल नहीं हटाया जाता। बाद में नगर निगम का अमला उन्हें हटाता है। नगर निगम की राजस्व समिति के प्रभारी निरंजन चौहान का कहना है कि समय-समय पर अवैध होर्डिंग हटाने का अभियान चलाया जाता है। हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
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