
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत वीडियो फुटेज में ऐसा कोई स्पष्ट दृश्य नहीं मिला, जिससे थाना प्रभारी या अन्य पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की अथवा हाथापाई सिद्ध होती हो, जबकि घटना थाना प्रभारी के कक्ष में होने का दावा किया गया था, उस कक्ष की सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें प्रस्तुत नहीं किया जाता, तो अभियोजन की कहानी संदेह के घेरे में आ जाती है। केवल मौखिक आरोपों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।
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