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शाजापुर में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का लाभ शाजापुर के मरीजों को पिछले करीब एक साल से नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा है। इसके चलते मरीजों को बाजार से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। 50 से 90% तक सस्ती दवाएं मिलती थीं प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र का उद्देश्य आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं बाजार मूल्य से 50 से 90 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध कराना है। इस योजना से गरीब, मध्यम वर्ग, बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बड़ी राहत मिलती थी। केंद्र पर मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, थायराइड, अस्थमा, संक्रमण, दर्द, बुखार समेत महिलाओं और बच्चों से जुड़ी सैकड़ों आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाती थीं। इसके अलावा सर्जिकल सामग्री और सैनिटरी नैपकिन जैसे स्वास्थ्य उत्पाद भी रियायती दरों पर मिलते थे। सीएमएचओ बोलीं- फार्मासिस्ट नहीं होने से बंद है केंद्र स्थानीय निवासी मुकेश चौहान ने बताया कि जन औषधि केंद्र का उद्घाटन बड़े स्तर पर हुआ था, लेकिन कुछ महीनों के संचालन के बाद इसे बंद कर दिया गया। उनका कहना है कि एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इसे दोबारा शुरू करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिससे सरकार की जनकल्याणकारी योजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कमला आर्य ने बताया कि फार्मासिस्ट की अनुपलब्धता के कारण जन औषधि केंद्र का संचालन बंद है। उन्होंने कहा कि केंद्र का संचालन रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से गठित समिति करती है। इस संबंध में समिति से चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि केंद्र को फिर से शुरू किया जा सके।
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