100 करोड़ के घोटाले का दाग
भाजपा परिषद के कार्यकाल में 100 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ, हालांकि, यह घोटाला पुरानी परिषद के समय से चला आ रहा था। मौके पर काम हुए नहीं और उनकी फाइलें बनकर तैयार हो गईं तथा बिल भी मंजूर होते रहे। जिन अधिकारियों को कामों का भौतिक सत्यापन करना होता था, वे भी इस घोटाले में शामिल थे। अभी भी इस घोटाले की जांच चल रही है। ईडी ने हाल ही में आरोपियों की करोड़ों की संपत्तियां अटैच की हैं।
ये काम शुरू कराए निगम परिषद ने
इंदौर में हर साल नर्मदा परियोजना के बिजली बिल पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसे कम करने के लिए नगर निगम ने 300 करोड़ रुपये की लागत से महेश्वर के समीप जलूद में सोलर प्लांट लगाया। इससे हर माह करीब पांच करोड़ रुपये की बचत हो रही है।
शहर में भविष्य में पानी की चिंता न रहे, इसके लिए नर्मदा के चौथे चरण का काम नगर निगम ने शुरू किया है। इस पर करीब 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
400 करोड़ रुपये की लागत से मास्टर प्लान की 23 सड़कों का काम शुरू हुआ है। फिलहाल शहर में 10 से ज्यादा सड़कों पर बाधक हिस्सों को हटाकर चौड़ीकरण किया जा रहा है।
निगम ने हुकमचंद मिल की जमीन का समाधान निकाला और श्रमिकों को उनका हक का पैसा दिलवाया। 40 एकड़ जमीन पर हाउसिंग बोर्ड प्रोजेक्ट ला रहा है।
ये काम नहीं हो पाए शुरू
शहर में 50 साल पुराने नेहरू स्टेडियम के स्थान पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनना था, लेकिन वह प्रोजेक्ट अभी तक शुरू नहीं हो पाया।
नगर निगम की खुद की वेबसाइट अभी तक तैयार नहीं हो पाई है। इस कारण कई ऑनलाइन सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पा रही हैं।
एमआर-4 सड़क का निर्माण अभी भी अधूरा है। यह सड़क नए बस स्टेशन से नहीं जुड़ पाई है।
शहर को ट्रैफिक की समस्या से मुक्त करने का दावा भाजपा परिषद ने किया था, लेकिन ट्रैफिक की समस्या अब भी बनी हुई है।
भविष्य को ध्यान में रखकर योजना बनाई
भाजपा परिषद ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं और उन पर काम शुरू किया है। नर्मदा के चौथे चरण के आने से अगले 15 वर्षों तक शहर में पानी की समस्या नहीं रहेगी। इसके अलावा सीवरेज और नई पाइपलाइन बिछाने के काम भी तेजी से किए गए हैं। ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए सड़कों को चौड़ा किया गया है। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर
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