Indore News: इंदौर में स्मार्ट क्लासरूम टेंडर में फर्जीवाड़ा, जेम ID देकर कराया घोटाला, 2 पर FIR

Indore News: इंदौर में स्मार्ट क्लासरूम टेंडर में फर्जीवाड़ा, जेम ID देकर कराया घोटाला, 2 पर FIR

जिला शिक्षा केंद्र, इंदौर में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पोर्टल पर ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी मिलने के बाद राज्य साइबर सेल ने कंप्यूटर प्रो…और पढ़ें

Publish Date: Tue, 04 Aug 2026 10:40:37 PM (IST)Updated Date: Tue, 04 Aug 2026 10:40:37 PM (IST)

Indore News: इंदौर में स्मार्ट क्लासरूम टेंडर में फर्जीवाड़ा, जेम ID देकर कराया घोटाला, 2 पर FIR
Indore News: इंदौर में स्मार्ट क्लासरूम टेंडर में फर्जीवाड़ा

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाने के लिए इंटरएक्टिव पैनल की खरीदी में बड़ा घोटाला सामने आया है। जिला शिक्षा केंद्र, इंदौर में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल पर ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी मिलने के बाद राज्य साइबर सेल ने कंप्यूटर प्रोग्रामर और एक कारोबारी के खिलाफ आईटी एक्ट और बीएनएस की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।

जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2025 में 39 शासकीय माध्यमिक विद्यालयों और 8 नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावासों के लिए इंटरएक्टिव पैनल खरीदे जाने थे। नियमानुसार पहले तकनीकी मूल्यांकन (टेक्निकल बिड) को सक्षम अधिकारी से मंजूरी मिलना जरूरी था, लेकिन बिना किसी स्वीकृति के ही फाइनेंशियल बिड खोल दी गई। इससे पूरी निविदा प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई।

कंप्यूटर प्रोग्रामर ने कारोबारी को दी अपनी जेम आईडी

एसपी सव्यसाची सराफ के मुताबिक मामले की जिला पंचायत सीईओ द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई थी। डीएसपी नरेंद्र रघुवंशी द्वारा केस की जांच की गई तो पता चला जिला शिक्षा केंद्र में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामर तेज कुमार जाटव की जेम आईडी से टेंडर प्रकाशित और संचालित किया गया था।

आरोप है कि जाटव ने अपनी आईडी और पासवर्ड कारोबारी विक्रांत गुप्ता को उपलब्ध करा दिए, ताकि उसकी फर्म इनोवेक्टर सॉल्यूशंस को निविदा का लाभ मिल सके। साइबर सेल ने इंटरनेट प्रोटोकॉल डेटा रिकॉर्ड (आईपीडीआर) और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच में दोनों आरोपियों के बीच लगातार संपर्क होने के प्रमाण भी जुटाए और तेज कुमार जाटव और विक्रांत गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 43, 66 और 66 डी के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।

बीमारी का बहाना बनाकर बच रहा था प्रोग्रामर

एसपी के अनुसार इंटरएक्टिव पैनल क्रय किए जाने के लिए वर्ष 2025 में समिति गठित करने के बाद टेंडर जेम पोर्टल पर डाला गया था। पांच फर्मों को पात्र और 12 फर्मों को अपात्र माना गया था। कलेक्टर कार्यालय द्वारा सभी फर्मों को शॉर्टलिस्ट कर सूची तैयार की गई, जिसके बाद वित्तीय निविदा की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच में पाया गया कि जो फाइनेंशियल बिड ओपन किए गए थे, वे टेंडर बगैर तकनीकी मूल्यांकन और बगैर सक्षम अधिकारी की अनुमति के खोले गए थे।

यह भी पढ़ें- दतिया उपचुनाव हारते ही एक्शन में भाजपा, जिला कार्यकारिणी भंग, नरोत्तम समर्थक निशाने पर; आशुतोष ने पेश किए भीतरघात के सबूत

पुलिस ने जब प्रोग्रामर व कंप्यूटर ऑपरेटर तेज कुमार जाटव से पूछताछ की तो उसने बीमारी का बहाना बनाया और कहा कि आरोपित कारोबारी विक्रांत गुप्ता ने उसकी बीमारी का फायदा उठाकर एक्सेस ले लिया था। बड़ा सवाल यह है कि जब बिना तकनीकी स्वीकृति के फाइनेंशियल बिड खुल गई, तो क्या इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ दो लोग ही जिम्मेदार थे या फिर इसके पीछे और भी अधिकारियों की भूमिका रही? इसकी जांच अब साइबर सेल कर रही है।

Source link
#Indore #News #इदर #म #समरट #कलसरम #टडर #म #फरजवड #जम #दकर #करय #घटल #पर #FIR

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *