नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : किसी को 0001 नंबर चाहिए, तो किसी को 0007, तो कोई अपनी जन्मतिथि या लकी नंबर को गाड़ी की पहचान बनाना चाहता है। पसंदीदा नंबरों के इस शौक में परिवहन विभाग के खजाने को भर दिया है।
इंदौर परिवहन कार्यालय ने जनवरी से जुलाई 2026 तक महज सात महीनों में 11746 आकर्षक पंजीयन नंबर बेचकर 20.18 करोड़ से अधिक राजस्व जमा किया। अलग पहचान और रुतबे के लिए कुछ लोग खास नंबर खरीदते हैं। यही वजह है कि 0001, 0007, 0009, 7777, 9999 जैसे नंबर पाने के लिए लोग लाखों रुपये तक खर्च कर रहे हैं।
इंदौर में नई गाड़ी खरीदने के बाद अब कई लोगों के लिए असली पसंद उसके मॉडल से ज्यादा उसका रजिस्ट्रेशन नंबर हो गया है। यही वजह है कि लोग फैंसी नंबरों के लिए लाखों रुपये तक खर्च करने से पीछे नहीं हटते हैं। वर्ष 2026 में जनवरी से जुलाई के बीच परिवहन कार्यालय इंदौर ने 20 करोड़ 18 लाख 68 हजार 500 रुपये राजस्व अर्जित किया।
परिवहन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो सात माह में सबसे अधिक कमाई 10 से 20 हजार रुपये श्रेणी में हुई। इस श्रेणी में सात माह में 5254 नंबर बिके और विभाग ने इससे सात करोड़, 90 लाख 25 हजार रुपये कमाए, सभी श्रेणी में सर्वाधिक है। इस श्रेणी में सेमी फैंसी नंबर जैसे 0100, 0123, 0111 जैसे सीरीज के सामान्य मांग वाले नंबर मिलते हैं।
आरटीओ प्रदीप शर्मा का कहना है कि वाहन स्वामी ऑनलाइन बोली लगाकर अपनी पसंद का वाहन नंबर ले सकता है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। इंदौर में हमेशा से पसंदीदा नंबरों का क्रेज रहा है।
20 नंबरों को मिली तीन लाख से अधिक कीमत
परिवहन कार्यालय इंदौर के रिकॉर्ड के अनुसार 20 ऐसे रहे, जिनको तीन लाख से अधिक में बेचा गया। इन 20 नंबरों से विभाग के खजाने में 74.52 लाख रुपये जमा हुए। अकेले जुलाई माह में इस केटेगरी के 4 नंबर बिके और इनसे विभाग को 13.91 लाख से अधिक राजस्व मिला। 1 लाख से 2.50 लाख रुपये तक की श्रेणी में महज 58 नंबर आवंटित हुए, लेकिन इनसे 82 लाख 63 हजार रुपये की आय हुई।
नंबर छोटा, लेकिन कीमत बड़ी
वीआईपी नंबरों की मांग में सबसे ऊपर चार अंकों वाले ऐसे नंबर हैं, जिन्हें लोग याद रखने में आसान या शुभ मानते हैं। यह नंबर छोटा होता है, लेकिन कीमत बड़ी होती है। 0001 से लेकर 0009 तक के नंबरों के लिए खासा उत्साह देखा गया। 9999 भी इसी सूची में शामिल है। नीलामी में जैसे-जैसे दावेदार बढ़ते हैं, वैसे-वैसे नंबर की कीमत भी बढ़ती जाती है। 0001 पूर्व में इंदौर में 13 लाख रुपये तक में बिक चुका है।
मार्च में सर्वाधिक 5.40 करोड़ मिले
मार्च माह में सर्वाधिक 3179 लोगों द्वारा फैंसी नंबर लिए गए और इससे विभाग को सर्वाधिक 5.40 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ। सबसे कम आवेदन अप्रैल में महज 304 लोगों ने लिए और इससे 51.22 लाख रुपये राजस्व मिला। यानी जनवरी, फरवरी और मार्च में परिवहन विभाग को 15 करोड़ रुपये से अधिक मिल गए। 20 हजार से 50 हजार रुपये वाली श्रेणी में 2,413 नंबर बिके और विभाग के खाते में 7 करोड़ 37 लाख 73 हजार 500 रुपये पहुंचे।
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