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बड़वानी जिले में कई दिनों की बारिश के बाद पिछले दो दिनों से मौसम साफ है। रविवार सुबह तेज धूप निकलने से किसान खेतों में पहुंचे। खरीफ फसलों में निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण जैसे कृषि कार्यों में तेजी आई है। पिछले 24 घंटे में जिले में बारिश नहीं हुई भू-संसाधन प्रबंधन कार्यालय की दैनिक वर्षा रिपोर्ट के अनुसार, जिले में पिछले 24 घंटे में औसतन 0 इंच बारिश दर्ज की गई। पाटी, राजपुर, पानसेमल, चाचरियापानी, वरला और निवाली में भी बारिश नहीं हुई। बड़वानी, अंजड़, ठीकरी और सेंधवा में भी वर्षा दर्ज नहीं की गई। 1 जून से 16 अगस्त तक जिले में औसतन 18.12 इंच बारिश दर्ज की गई है। पिछले साल इसी अवधि में 12.30 इंच बारिश हुई थी। तहसीलवार आंकड़ों में सेंधवा में सबसे अधिक 25.35 इंच और पानसेमल में सबसे कम 8.07 इंच बारिश दर्ज की गई। राजघाट में 134.60 मीटर पहुंचा नर्मदा का बैकवॉटर राजघाट में रविवार सुबह 8.30 बजे तक नर्मदा नदी का बैकवॉटर 134.60 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने से राजघाट परिसर पानी से घिर गया है। तट पर स्थित दत्त मंदिर की छत भी जलमग्न हो गई है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर और सरदार सरोवर बांध के सभी गेट बंद हैं। ओंकारेश्वर बांध की तीन टरबाइनें संचालित की जा रही हैं, जिनसे 711 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है। पुराने राजघाट की जगह नए घाट पर होगी पूजा-अर्चना बढ़ते जलस्तर को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पूजा-अर्चना के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई हैं। अगले सात से आठ माह तक श्रद्धालुओं को पुराने राजघाट के बजाय नवीन घाट पर मां नर्मदा के दर्शन, पूजन और आरती की सुविधा मिलेगी। राजघाट का प्राकृतिक सौंदर्य इन दिनों आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रतिदिन श्रद्धालु, पर्यटक और नर्मदा परिक्रमा यात्री पहुंच रहे हैं। मां नर्मदा घाट निर्माण समिति और रोहिणी सेवार्थ सामाजिक समिति ने सेवा केंद्र पुराने फिल्टर प्लांट के समीप स्थानांतरित किया है। यहां चाय-प्रसादी, शीतल पेयजल और परिक्रमा यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 138.60 मीटर पर दोनों रपटें डूब जाती हैं समिति के अनुसार बैकवॉटर का उच्चतम स्तर 138.60 मीटर तक पहुंचता है। इस स्थिति में राजघाट-बड़वानी मार्ग की दोनों रपटें डूब जाती हैं और पानी पुराने फिल्टर प्लांट तक पहुंच जाता है। इसी को देखते हुए सेवा संबंधी व्यवस्थाएं नए स्थान पर स्थानांतरित की गई हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र बडोदिया ने बताया कि जिले में मानसून का प्रभाव कमजोर हुआ है। अगले चार-पांच दिनों तक धूप और बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। इस दौरान कहीं-कहीं हल्की वर्षा भी हो सकती है। धूप निकलना खरीफ फसलों के लिए फायदेमंद डॉ. बडोदिया के अनुसार लगातार बादलों के बाद धूप निकलना खरीफ फसलों के लिए लाभदायक है। पर्याप्त सौर ऊर्जा मिलने से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे पौधों की बढ़वार मजबूत होगी और उत्पादन क्षमता में सुधार आएगा। उन्होंने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी, खरपतवार नियंत्रण और जरूरी कृषि कार्य समय पर पूरा करने की सलाह दी।
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