
– Sanjay Dutt की दमदार वापसी या अधूरा सवाल?
रेटिंग: ⭐⭐⭐☆ (3.5/5)
संजय दत्त की नई फिल्म Aakhri Sawal एक राजनीतिक और वैचारिक ड्रामा है, जिसका निर्देशन अभिजीत मोहन वारंग ने किया है। फिल्म में संजय दत्त के साथ अमित साध, नमाशी चक्रवर्ती, समीरा रेड्डी और तृधा चौधरी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। कहानी एक प्रोफेसर और उसके छात्र के बीच वैचारिक टकराव से शुरू होती है और धीरे-धीरे राष्ट्रीय बहस का रूप ले लेती है।
कहानी
फिल्म की कहानी प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी (संजय दत्त) और उनके छात्र विक्की हेगड़े (नमाशी चक्रवर्ती) के बीच विचारधारात्मक संघर्ष पर आधारित है। एक शोध प्रबंध को लेकर शुरू हुआ विवाद मीडिया, राजनीति और सार्वजनिक बहस तक पहुंच जाता है। फिल्म इतिहास, राष्ट्रवाद और वैचारिक मतभेद जैसे विषयों पर चर्चा करने की कोशिश करती है।
क्या अच्छा है?
- संजय दत्त का स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा की तरह प्रभावशाली है।
- नमाशी चक्रवर्ती ने भी आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया है।
- फिल्म कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक और वैचारिक सवाल उठाती है।
- बैकग्राउंड स्कोर और सिनेमैटोग्राफी कई दृश्यों को प्रभावशाली बनाते हैं।
क्या कमजोर है?
- दूसरे हाफ में कहानी अपनी पकड़ खो देती है।
- कई संवाद जरूरत से ज्यादा लंबे और उपदेशात्मक महसूस होते हैं।
- कोर्टरूम और बहस वाले दृश्य उतने प्रभावशाली नहीं बन पाए जितनी उनसे उम्मीद थी।
- फिल्म का संदेश कई जगह कहानी पर भारी पड़ता है।

अभिनय
संजय दत्त ने प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी के किरदार में गरिमा और गंभीरता दिखाई है। नमाशी चक्रवर्ती के साथ उनकी टक्कर फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष है। अमित साध और समीरा रेड्डी ने भी अपने-अपने किरदारों को अच्छी तरह निभाया है।
निष्कर्ष
Aakhri Sawal एक महत्वाकांक्षी फिल्म है जो गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना चाहती है। हालांकि इसकी पटकथा और गति हर जगह प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं होती, लेकिन संजय दत्त का अभिनय और फिल्म का विषय इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं। यदि आपको विचारोत्तेजक ड्रामा और राजनीतिक बहस पर आधारित फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म आपको पसंद आ सकती है।
अंतिम रेटिंग: 3.5/5 ⭐
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