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1999 में मूक-बधिर युवक और युवती ने विवाह किया। शुरुआत में सब ठीक रहा, लेकिन कुछ साल बाद आर्थिक तंगी ने रिश्तों में ऐसी कड़वाहट घोली कि दोनों ने 24 साल पुरानी शादी तोड़ने का निर्णय ले लिया। किसी तरह मामला मप्र के जस्टिस विवेक रूसिया (वर्तमान में मप्र ह
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दोनों की काउंसिलिंग में सामने आया कि आर्थिक तंगी से रिश्तों की डोर टूटने जा रही है। चूंकि, पति-पत्नी पूर्व में कैफे ही चलाते थे। इस पर मप्र हाई कोर्ट ने न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में ही दोनों के लिए एक कैफे खुलवाने का निर्णय लिया। मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की इस अनूठी पहल का परिणाम ये निकला कि दोनों ने पुराने मतभेद भुलाकर फिर से नई पारी शुरू करने का निर्णय लिया।
अदालत से मिला ‘इशारा’… तो तलाक की दहलीज से लौट आए मूक-बधिर दंपती; कैफे से नई शुरुआत कर बोर्ड पर लिखेंगे मिठास व स्वाद के ऑर्डर…
जिला न्यायालय परिसर में पौधे रोपे… ‘पंच ज’ अभियान के अंतर्गत जिला न्यायालय परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया, जस्टिस जीएस आहलूवालिया व अन्य जजों ने पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
गुरुवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व प्रशासनिक न्यायमूर्ति जीएस आहलूवालिया ने कैफे का शुभारंभ किया। कैफे का नाम इशारा रखा गया है। चित्र में दंपती स्वल्पाहार देते हुए।
जजेस ने साइन लैंग्वेज में ताली बजाई कैफे के शुभारंभ अवसर पर जस्टिस अनुराधा शुक्ला, जस्टिस आशीष श्रोती, जस्टिस अमित सेठ, जस्टिस पवन द्विवेदी, जस्टिस आनंद सिंह बहरावत और जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता मौजूद रहे। साथ ही प्रधान जिला न्यायाधीश ललित किशोर, प्रधान जिला न्यायाधीश (सतर्कता) जाकिर हुसैन, ओएसडी/रजिस्ट्रार ऋतुराज सिंह चौहान उपस्थित रहे। इस दौरान जजेज ने साइन लैंग्वेज में ताली बजाकर उत्साहवर्धन भी किया।
अंग्रेजी लिख व समझ लेती हैं पूजा पूजा और दीपक दिल्ली में एनजीओ की मदद से कैफे चलाते थे। पूजा अंग्रेजी लिख और समझ लेती हैं। कैफे में ग्राहकों के लिए सफेद बोर्ड रखा जाएगा। इसमें वे लिखकर बता सकेंगे कि उन्हें क्या चाहिए? उनकी दो बेटी हैं।
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